नहीं खुल रही विभाग की नींद

Published at :18 May 2016 11:45 PM (IST)
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नहीं खुल रही विभाग की नींद

लापरवाही. जर्जर पोल व तार के कारण हो रहे हैं हादसे जर्जर विद्युत पोल व तार के कारण लगातार हो रही जान-माल की क्षति की घटनाओं से विद्युत विभाग बेखबर है. एक पखवारे के अंदर दूसरी घटना हो गयी. मगर विभाग की नींद नहीं खुल रही है. जिले के दाउदपुर थाना क्षेत्र के बरेजा गांव […]

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लापरवाही. जर्जर पोल व तार के कारण हो रहे हैं हादसे

जर्जर विद्युत पोल व तार के कारण लगातार हो रही जान-माल की क्षति की घटनाओं से विद्युत विभाग बेखबर है. एक पखवारे के अंदर दूसरी घटना हो गयी. मगर विभाग की नींद नहीं खुल रही है. जिले के दाउदपुर थाना क्षेत्र के बरेजा गांव में बुधवार को धारा प्रवाहित विद्युत तार की चपेट में आने से एक महिला की मौत हो गयी तथा एक महिला समेत दो लोग झुलस गये.
छपरा (सारण) : जर्जर विद्युत पोल व तार के कारण लगातार हो रही जान-माल की क्षति की घटनाओं के प्रति विद्युत विभाग बेखबर बना हुआ है. अधिकारियों की लापरवाही के कारण एक पखवारे के अंदर दूसरी बड़ी घटना हो गयी. जिले के दाउदपुर थाना क्षेत्र के बरेजा गांव में बुधवार को धारा प्रवाहित विद्युत तार की चपेट में आने से एक महिला की मौत हो गयी तथा एक महिला समेत दो लोग झुलस गये. इसके पहले सात मई को छपरा नगर थाना क्षेत्र के सीढ़ी घाट के पास शशि कुमार कौशल के 30 वर्षीय पुत्र रोहित कुमार की मौत विद्युत स्पर्शाघात से मौत हो गयी थी.
यह घटना उस समय हुई जब वह शौच करने के लिए सरयू नदी के किनारे जा रहा था. आंधी-पानी के कारण टूट कर गिरे विद्युत तार की चपेट में आने से युवक मौत का शिकार बना. वहीं 12 मई को रिविलगंज थाना क्षेत्र के सिरिसिया गांव में धारा प्रवाहित विद्युत तार की चपेट में आने से भुअर बीन नामक एक अधेड़ झुलस गया था. एक पखवारे के अंदर दर्जनाधिक घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं.
करोड़ों खर्च के बावजूद नहीं बदली तसवीर : विद्युत तार को व्यवस्थित करने के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि खर्च की गयी है. बावजूद इसके शहर समेत जिले के कई इलाकों में जर्जर विद्युत तार व पोलों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है. इसके प्रति विद्युत विभाग के अधिकारी लापरवाह तथा उदासीन बने हुए हैं. विद्युतीकरण योजना के कार्यान्वयन का कोई मास्टर प्लान विभाग के द्वारा अब तक नहीं बनाया गया है.
राजनीतिक दबाव तथा पैसे व पैरवी के बल पर विद्युत पोल व तार बदलने की परंपरा आज भी कायम है. उपभोक्ताओं तथा नागरिकों की शिकायतों को बावजूद जर्जर पोल व तार नहीं बदले जा रहे हैं. शहर के दर्जनाधिक स्थानों पर अभी भी खुले विद्युत तार सड़कों से गुजरते हैं. घनी आबादी वाले मुहल्लों की गली व सड़कों पर बांस-बल्ले के सहारे विद्युत तार दौड़ाये गये हैं, जिससे हादसों की आशंका बनी रहती है. शहर में टोका फंसाने की संस्कृति पर लगाम नहीं लग पा रही है.
कार्य की गति है काफी धीमी : जर्जर विद्युत पोल व तार बदलने के कार्य की गति काफी धीमी है. दो वर्ष से जिले में यह कार्य चल रहा है. फिर भी मुख्य सड़क के विद्युत पोल व तार बदलने का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है. मुहल्लों में अब भी पुराने तार व पोल से बिजली आपूर्ति की जा रही है. इसे बदलने के लिए विद्युत की आपूर्ति भी रोकी जा रही है, फिर भी अपेक्षाकृत कार्य की गति तेज नहीं हो रही है. इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है.
नहीं बना है मास्टर प्लान : विद्युत पोल व तार लगाने के लिए विभाग की ओर से कोई मास्टर प्लान नहीं बनाया गया है. इस वजह से विद्युत पोल ठेकेदारों के द्वारा मनमाने ढंग से अपनी सुविधानुसार गाड़ दिया जा रहा है और विद्युत तार को झुलाया जा रहा है. ट्रांसफार्मर लगाने में भी आपदा प्रबंधन का ख्याल नहीं रखा जा रहा है. बेतरतीब ढंग से झूलते विद्युत तार, जीर्ण-शीर्ण पोल के कारण प्राय: दुर्घटनाएं होती हैं और इससे सड़क की भूमि का अतिक्रमण भी हो रहा है. शहर के सौंदर्यीकरण की योजना भी बाधित हो रही है. नये सिरे से विद्युत पोल व तार लगाने में भी मानदंडों का पालन नहीं हो रहा है.
चार वर्ष पहले हुआ था हादसा : जिले के दरियापुर थाना क्षेत्र के मानपुर के पास 11 हजार वोल्ट का तार टूट कर गिरने से पांच लोगों की मौत हो गयी थी. इसके पहले रिविलगंज में प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान तीन लोगों की मौत हो गयी थी. एक वर्ष पहले साढ़ा ढाला के पास विद्युत तार टूट कर गिरने से एक युवक की मौत हो गयी. इसके पहले एकमा में भी जर्जर विद्युत तार को ठीक कर रहे एक प्राइवेट मिस्त्री की मौत हो गयी थी.
एक पखवारे के अंदर दूसरी बड़ी घटना
मुआवजे का प्रावधान
विभाग की लापरवाही से विद्युत स्पर्शाघात से होने वाली मौत पर मुआवजा देने का प्रावधान है.
आश्रित को दो लाख रुपये की राशि दी जाती है.
मुआवजा प्राप्त करने के लिए शव का पोस्टमार्टम तथा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराना आवश्यक है
इइइ के यहां आवेदन करना होगा
आवेदन के साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्राथमिकी, मृत्यु तथा उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र देना अनिवार्य है.
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