पूर्ण शराबबंदी लागू करना पुलिस के लिए होगी कठिन चुनौती

Published at :06 Apr 2016 4:07 AM (IST)
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पूर्ण शराबबंदी लागू करना पुलिस के लिए होगी कठिन चुनौती

छपरा (सारण) : पूर्ण शराबबंदी को लागू करना पुलिस के लिए कठिन चुनौती होगा. संसाधन विहीन पुलिस शराब व ताड़ी के धंधे पर कैसे काबू पायेगी. यह नये पुलिस अधीक्षक के लिए भी महत्वपूर्ण टास्क बन गया है. थाने से लेकर पुलिस मुख्यालय तक पुलिसकर्मियों का घोर अभाव है. पदाधिकारियों की भी काफी कमी है. […]

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छपरा (सारण) : पूर्ण शराबबंदी को लागू करना पुलिस के लिए कठिन चुनौती होगा. संसाधन विहीन पुलिस शराब व ताड़ी के धंधे पर कैसे काबू पायेगी. यह नये पुलिस अधीक्षक के लिए भी महत्वपूर्ण टास्क बन गया है. थाने से लेकर पुलिस मुख्यालय तक पुलिसकर्मियों का घोर अभाव है. पदाधिकारियों की भी काफी कमी है.

आलम यह है कि गृह रक्षकों के भरोसे थाने से लेकर यातायात व्यवस्था संचालित हो रही है. जिले की अधिकतर पुलिस चौकियां बंद हैं. थानों में खटारा जीप से पैट्रोलिंग करायी जा रही है. थानों के बेसिक फोन बंद पड़े हैं. आवास, बैरक, शौचालय, बिजली, पानी तथा मालखाना, हाजत की सुविधा से वंचित थानों की पुलिस सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का कार्यान्वयन कैसे करेगी? यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है.

एक हवलदार के भरोसे है पुलिस चौकी : शहर के नगर तथा भगवान बाजार थाना क्षेत्र में कुल 11 पुलिस चौकियां हैं, जिनमें से मात्र चार पुलिस चौकी कार्यरत हैं. कार्यरत पुलिस चौकियों में महज एक-एक हवलदार हैं. सात पुलिस चौकियां वर्षों से बंद पड़ी हैं. इसी तरह रिविलगंज थाना क्षेत्र की दो पुलिस चौकी और सिताब दियारा ओपी को डेढ़ दशक पहले ही बंद कर दिया गया. अपराध नियंत्रन तथा अपराधियों पर नकेल कसने में पुलिस चौकियों की भूमिका अहम रही है. वर्तमान समय में इन पुलिस चौकियों के बंद होने के कारण ही अपराध नियंत्रण और अपराधियों पर नकेल कसने में बाधा उत्पन्न हो रही है.
काम का दबाव बढ़ा, पदाधिकारी घटे : पुलिस पर लगातार काम का दबाव बढ़ रहा है. आबादी भी बढ़ रही है. संचार माध्यमों तथा इंटरनेट के विकास के साथ साइबर क्राइम भी बढ़ा है. लेकिन पुलिस-पदाधिकारियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है. करीब चार दशक पहले थानों में दर्ज होने वाली अापराधिक घटनाओं की तुलना में वर्तमान समय में 20 गुणा अधिक कांड प्रतिवेदित हो रहे हैं, लेकिन थानों में चार दशक पहले जो पुलिस पदाधिकारियों के पद स्वीकृत थे, उसमें कोई वृद्धि नहीं हुई है. अगर बढ़ा तो केवल कार्य का दबाव.
50 फीसदी चौकीदार-दफादारों के पद रिक्त : चौकीदारों-दफादारों से ग्रामीण पुलिस का दर्जा मिल गया. उन पर भी काम का दबाव बढ़ गया है, लेकिन जिले में 50 फीसदी चौकीदारों-दफादारों के पद रिक्त पड़े हैं. ग्रामीण इलाकों में पुलिस के लिए मुखबिर का काम करने वाले चौकीदारों-दफादारों की कमी के कारण सूचना संग्रह में बाधा उत्पन्न हो रही है. सबसे अधिक ग्रामीण इलाकों में ही अवैध शराब का धंधा होता है. इस वजह से अवैध शराब के धंधेबाजों पर नकेल कसने में पुलिस के लिए चुनौती पूर्ण कार्य हो जायेगा.
खास बातें
11 में से सात पुलिस चौकियां हैं बंद.
चार पुलिस चौकियों में हैं एक-एक हवलदार.
ताजपुर, परसागढ, महम्मदपुर में नहीं है भवन.
मठ-मंदिर में चलती है पुलिस चौकी.
शहर की पुलिस चौकियों के भवन हो चुके है जीर्ण-शीर्ण.
शहर के पुलिस चौकियों की भूमि का हो रहा है दुरुपयोग.
रिविलगंज अड्डा नंबर-एक-दो की भूमि पर भी बढ़ा अवैध अतिक्रमण.
महिला थानों को अपना भवन नहीं.
एससी-एसटी थाने का भगवान बाजार थाने के आवास में हो रहा है संचालन.
क्या कहते हैं अधिकारी
भवन विहीन थाने में भवन उपलब्ध कराने और अन्य संसाधनों का प्रबंध करने का प्रस्ताव भेजा गया है. कई थानों के लिए स्वीकृति भी मिली है. संसाधनों की कमी को दूर किया जायेगा.
सत्यनारायण कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक
बंद हैं ये पुलिस चौकियां
बस स्टैंड
रतनपुरा-2
कटरा बरादरी
नवीगंज
अजायबगंज
रतनपुरा-4
मौना चौक
साहेबगंज
आयुक्त कॉलोनी
रिविलगंज अड्डा नंबर-एक
रिविलगंज अड्डा नंबर-दो
सिताब दियारा, ओपी
यहां नहीं कोई सुविधा
ताजपुर पुलिस चौकी
महम्मदपुर पुलिस चौकी
परसागढ़ पुलिस चौकी
इन थानों को नहीं है भवन
डोरीगंज
अवतार नगर थाना
नगरा
इसुआपुर
गौरा
सहाजितपुर
मकेर
पानापुर
महिला थाना
एससी-एसटी थाना
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