हाल बनियापुर आरटीपीएस काउंटर का, सुबह चार बजे से लगती है कतार

Published at :22 Mar 2016 6:13 AM (IST)
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हाल बनियापुर आरटीपीएस काउंटर का, सुबह चार बजे से लगती है कतार

चप्पल व ईंट रख लगाते हैं लाइन जी हां, चौकिए नहीं ये किसी भवन निर्माण का स्थल या किसी देवालय का प्रवेश द्वारा नहीं बल्कि बनियापुर का आरटीपीएस काउंटर है, जहां कतार में लगने के लिए सशरीर उपस्थित होना आवश्यक नहीं, बल्कि यहां ईंट एवं चप्पल के माध्यम से कतार में क्रम का निर्धारण होता […]

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चप्पल व ईंट रख लगाते हैं लाइन

जी हां, चौकिए नहीं ये किसी भवन निर्माण का स्थल या किसी देवालय का प्रवेश द्वारा नहीं बल्कि बनियापुर का आरटीपीएस काउंटर है, जहां कतार में लगने के लिए सशरीर उपस्थित होना आवश्यक नहीं, बल्कि यहां ईंट एवं चप्पल के माध्यम से कतार में क्रम का निर्धारण होता है.
बनियापुर : आरटीपीएस काउंटर पर आवेदकों की भारी भीड़ के चलते कतार में पहले क्रम पर आवेदन जमा करने के उद्देश्य से प्रखंड क्षेत्र के दूर-दराज के आवेदक अहले सुबह से पहुंच काउंटर पर ईंट पर अपना नाम लिख या फिर अपनी एक चप्पल रख कतार में अपने क्रम का निर्धारण सुनिश्चित करते हैं. यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है और आरटीपीएस काउंटर पर तैनात कर्मी इस पर अनभिज्ञता जता व्यवस्था में सुधार से अपना पल्ला झाड़ लेते हैं.
काउंटर पर उमड़ती है भारी भीड़ : विद्यालय में मिलने वाली सरकार प्रायोजित लोक कल्याणकारी योजनाओं में आवासीय, आय एवं जाति प्रमाणपत्र की अनिवार्यता के चलते बड़ी संख्या में स्कूली छात्र एवं छात्राएं आवेदन के लिए काउंटर पर पहुंचते हैं. विभागीय सूत्रों की मानें तो प्रतिदिन ढाई सौ से तीन सौ आवेदन प्राप्त होते हैं,
जिनमें स्कूली छात्राें के आवेदन ज्यादा होते हैं.
काउंटर के कर्मी करते हैं परेशान : एक तरफ जहां विद्यालय में योजनाओं के लाभ के लिए आवेदन के साथ अनिवार्य प्रमाणपत्र की मांग की जाती है. वहीं काउंटर पर बैठे कर्मी आवेदन पर संबंधित विद्यालय के एचएम की अनुशंसा को आवश्यक बता आवेदन को लौटा देते हैं, जिससे समय पर प्रमाणपत्र नहीं बनने के कारण योजनाओं के लाभ से वंचित हो जाते हैं. छात्रों का कहना है कि जाति, आवासीय, आय सहित आवश्यक प्रमाणपत्रों को बनवाने के लिए एचएम की अनुशंसा का कोई विभागीय प्रावधान नहीं है और कर्मी बेवजह परेशान करते हैं.
दो दिन महिलाओं तो चार दिन पुरुषों का आवेदन लिया जाता है : दिल्ली की सरकार भले ही ऑड इभेन के आधार पर वाहनों का परिचालन करा रही है, मगर यहां के आरटीपीएस कार्यालय लंबे समय से मेल-फिमेल के आधार पर चल रहा है. सूत्रों के अनुसार सोमवार एवं गुरुवार को केवल महिलाओं एवं छात्राओं के आवेदन लिये जाते हैं, वहीं शेष दिन पुरुष व छात्र आवेदन देते हैं. यदि जानकारी के अभाव में कोई निर्धारित दिन की जगह अन्य दिन आवेदन देने के लिए पहुंच जाता है, तो उसका आवेदन आरजू-विनती के बाद भी नहीं लिया जाता, जिससे समय की बरबादी और बेवजह परेशानी का सामना करना पड़ता है.
मेल-फीमेल के आधार पर चलता है काउंटर
अफरा-तफरी की स्थिति रहती है कायम
काउंटर पर आवेदक की भारी भीड़ एवं ईंट एवं चप्पल के आधार पर कतार में क्रम के निर्धारण को ले अावेदकों के बीच तीखी बहस एवं झड़प की स्थिति बनती रहती है और कभी-कभार मारपीट की भी नाैबत आ जाती है एवं स्थिति को सामान्य बनाने के लिए पुलिस की भी मदद लेनी पड़ती है.
कार्यालय पर बिचौलिये हैं हावी
कार्यालय पर बिचौलिए हावी हैं और थोक में आवेदन ले कार्यालय में आते हैं, जिनके आवेदन का निबटारा पहले कर्मी करते हैं, जिससे कतार में खड़े लोगों का आवेदन लेने में काफी विलंब होता है. बिचौलिये की मदद के उद्देश्य से आवेदन में त्रुटि निकाल बेवजह परेशान किया जाता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
छात्र-छात्राओं की भारी भीड़ के कारण ऐसी स्थिति बनती है. बीइओ एवं एचएम के साथ बैठक कर विद्यालय स्तर पर आवेदन ले कार्यालय को देने की बात की गयी, मगर एचएम की उदासीनता के चलते ऐसी स्थिति बनती है. अन्य शिकायत पर जांच कर व्यवस्था को दुरुस्त किया जायेगा.
अमित कुमार पांडेय, बीडीओ सह सीओ
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