आमी में मृतक के परिजनों ने जाम की सड़क

आमी में मृतक के परिजनों ने जाम की सड़कदोषी बाइक सवार की गिरफ्तारी की कर रहे थे मांगासड़क दुर्घटना में गयी थी देवानंद महतो की जानसड़क पर शव रख कर परिजन व ग्रामीणों ने छपरा-पटना मार्ग को दो घंटे तक रखा अवरुद्ध बीडीओ व सीओ के आश्वासन पर टूटा जाम नोट: फोटो मेल से भेजा […]
आमी में मृतक के परिजनों ने जाम की सड़कदोषी बाइक सवार की गिरफ्तारी की कर रहे थे मांगासड़क दुर्घटना में गयी थी देवानंद महतो की जानसड़क पर शव रख कर परिजन व ग्रामीणों ने छपरा-पटना मार्ग को दो घंटे तक रखा अवरुद्ध बीडीओ व सीओ के आश्वासन पर टूटा जाम नोट: फोटो मेल से भेजा गया है.संवाददाता, दिघवाराथाना क्षेत्र की रामपुर आमी पंचायत के रामपुर आमी गांव निवासी व सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवा बैठे 40 वर्षीय देवानंद महतो के परिजनों व स्थानीय ग्रामीणों ने शुक्रवार की सुबह दोषी बाइक सवार की गिरफ्तारी व पूरे परिवार को प्रशासन द्वारा मुआवजे की राशि उपलब्ध कराने की मांग को लेकर एनएच 19 जाम कर दिया एवं सुबह के 7.30 बजे छपरा-पटना सड़क मार्ग पर आमी गेट के समीप सड़क पर शव को रख कर आगजनी करते हुए वाहनों के परिचालन को पूर्णत: अवरुद्ध कर दिया. सड़क पर शव के साथ बैठे आक्रोशित परिजनों का कहना था कि जब तक पीड़ित परिवार को प्रशासन द्वारा नियमानुकूल मुआवजे की राशि उपलब्ध नहीं करवायी जायेगी, तब तक सड़क जाम जारी रहेगा. उधर, जाम की सूचना मिलते ही सोनपुर इंस्पेक्टर अरविंद कुमार, दिघवारा बीडीओ राजमीति पासवान, सीओ अजय शंकर व थानाध्यक्ष सतीश कुमार ने जाम स्थल पर पहुंच कर आक्रोशित लोगों को समझाया. वहीं, बीडीओ व सीओ ने पीड़ित परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत कर हरसंभव सरकारी सहायता दिलवाने का आश्वासन दिया. तब जाकर दो घंटे बाद सुबह के 9.30 बजे वाहनों का परिचालन शुरू हो सका. लगभग दो घंटे तक सड़क जाम रहने के कारण गाड़ियों की लंबी कतारें लग गयी थीं, वहीं मां अंबिका के दर्शन करने जानेवाले श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. पिता के शव से लिपट कर बेहोश हो जा रही थीं बेटियांछपरा-पटना मार्ग के मध्य आमी गेट के समीप शुक्रवार की सुबह का दृश्य देख कर हर किसी की आंखें नम थीं. मुख्य सड़क पर खटिया पर रखे देवानंद के शव से लिपट कर रोते परिजनों को स्थानीय लोग सांत्वना दे रहे थे. मगर, परिजनों की आंखों से अश्रु धाराएं रुकने का नाम नहीं ले रही थीं. मृतक की पत्नी लीलावती बेसुध पड़ी थी. वहीं, तीन बेटियों में दो बेटियां शव से लिपट कर रोते-रोते बार-बार बेहोश हो जा रही थीं. हर किसी की जुबान पर यही सवाल था कि आखिरकार देवानंद के परिजनों की जिंदगी की गाड़ी कैसे आगे बढ़ेगी?
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