महज 30 फीसदी छात्र हुए पास

Published at :26 Jun 2015 7:46 AM (IST)
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महज 30 फीसदी छात्र हुए पास

पार्ट वन की परीक्षा में 70 हजार परीक्षार्थी हुए थे शामिल 11 माह बाद निकला रिजल्ट पार्ट टू की तरह पार्ट वन के रिजल्ट में भी गड़बड़ी की आशंका छपरा (नगर) : लंबे इंतजार के बाद अंतत: जेपीविवि प्रशासन ने परीक्षा लेने के लगभग 11 माह बाद गुजरने के बाद स्नातक पार्ट वन का रिजल्ट […]

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पार्ट वन की परीक्षा में 70 हजार परीक्षार्थी हुए थे शामिल
11 माह बाद निकला रिजल्ट
पार्ट टू की तरह पार्ट वन के रिजल्ट में भी गड़बड़ी की आशंका
छपरा (नगर) : लंबे इंतजार के बाद अंतत: जेपीविवि प्रशासन ने परीक्षा लेने के लगभग 11 माह बाद गुजरने के बाद स्नातक पार्ट वन का रिजल्ट गुरुवार को विवि की वेबसाइट पर जारी कर दिया. हालांकि रिजल्ट को लेकर छात्रों में शुरुआत में तो उत्साह दिखा, मगर रिजल्ट देखने के बाद अधिकतर छात्रों के होश उड़ गये. पार्ट टू के रिजल्ट की छाया पार्ट वन के रिजल्ट में नजर आयी.
एक अनुमान के मुताबिक, परीक्षा में शामिल 70 प्रतिशत से अधिक परीक्षार्थियों का रिजल्ट फेल व पेंडिंग के रूप में दिखाया गया है. ऐसे में रिजल्ट के इंतजार में बैठे छात्र, जिनका रिजल्ट अच्छा रहा उनके चेहरे पर तो खुशी के भाव थे. वहीं, फेल व पेंडिंग रिजल्ट वालों छात्रों के चेहरे पर मायूसी दिखी. मालूम हो कि पार्ट वन की परीक्षा में छपरा, सीवान, गोपालगंज के करीब 70 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए थे. छात्रों ने इस रिजल्ट में भी गड़बड़ी की आशंका जतायी है.
अगस्त 2014 में ली गयी थी परीक्षा : जेपीविवि में संचालित तीन वर्षीय स्नातक पार्ट वन की परीक्षा पिछले साल ही अगस्त-सितंबर में ली गयी थी. वैसे यूजीसी की गाइड लाइन के अनुसार, परीक्षा आयोजन के तीन माह बाद ही रिजल्ट घोषित कर देना है, जबकि जेपीविवि प्रशासन द्वारा परीक्षा लिये जाने के करीब 11 माह बाद रिजल्ट घोषित किया गया. देर से रिजल्ट जारी किये जाने के कारण छात्रों का सेशन लेट होने की आशंका काफी बढ़ गयी है.
अभी तक दौड़ रहे हैं पार्ट टू के छात्र
मालूम हो कि इसके पूर्व में पार्ट टू के रिजल्ट में भी भारी पैमाने पर छात्रों को विभिन्न विषयों में उपस्थित होने के बावजूद अनुपस्थित दिखा कर उन्हें फेल व प्रोमोटेड घोषित कर दिया गया था.
अलबत्ता त्रुटिपूर्ण रिजल्ट को लेकर छात्र संगठनों द्वारा कई बार हंगामा प्रदर्शन कर रिजल्ट में सुधार व उत्तर पुस्तिका की दोबारा जांच कराने की मांग की गयी थी. हालांकि उसके बाद से त्रुटिपूर्ण रिजल्ट में सुधारने के लिए छात्र-कॉलेज से लेकर विवि तक की दौड़ लगाते रहे. वहीं, विवि प्रशासन ने सुधार के लिए आवेदन को खुद जमा करने की जगह उसे सीधे वेबसाइट पर डालने का निर्देश देकर अपना पल्ला झाड़ लिया है.
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