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saran news. पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा में 346 शोधार्थी हुए सम्मिलित

Updated at : 30 Sep 2024 11:00 PM (IST)
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saran news. पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा में 346 शोधार्थी हुए सम्मिलित

जेपीयू के अलग-अलग ब्लॉक में दो पालियों में ली गयी परीक्षा, परिणाम आने के बाद शुरू होगा उत्तीर्ण छात्रों का रिसर्च

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छपरा . पीएचडी कोर्स वर्क 2022 की परीक्षा जयप्रकाश विश्वविद्यालय कैंपस स्थित मल्टीपरपस परीक्षा भवन, साइंस ब्लॉक व सोशल साइंस ब्लॉक स्थित केंद्र पर दो पालियों में आयोजित की गयी. पहली पाली में कोर कोर्स से जुड़े विषय की परीक्षा ली गयी, जिसके तहत शोधार्थियों ने रिसर्च एंड मैथोलॉजी तथा कंप्यूटर प्रशिक्षण से जुड़े प्रश्नों का उत्तर दिया. वहीं दूसरी पाली में मुख्य विषय से जुड़े सब्जेक्टिव प्रश्न पूछे गये. पहली पाली में परीक्षा नियंत्रक डॉ अशोक कुमार मिश्रा ने परीक्षा का औचक निरीक्षण किया, जहां उन्होंने केंद्राधीक्षक व वीक्षकों से भी जानकारी प्राप्त की. सभी वीक्षक निर्धारित समय पर पहुंच गये थे. उन्होंने सोशल साइंस ब्लॉक में भी जाकर परीक्षा दे रहे छात्रों से जानकारी प्राप्त की. उन्होंने बताया कि दोनों पालियों की परीक्षा शांतिपूर्ण ढ़ंग से हुई. इस परीक्षा में किसी का निष्कासन नहीं हुआ. विषय पर आधारित प्रश्न पूछे गये थे. वहीं पीएचडी के सिलेबस में 10 फीसदी बदलाव किया गया है. जिसे लेकर भी प्रश्न के पैटर्न पहले से तैयार कर लिये गये थे. सिलेबस के अनुरूप ही सवाल आने के कारण किसी भी शोधार्थी की शिकायत प्राप्त नहीं हुई. दोनों पालियों में कुल 346 शोधार्थियों ने कोर्स वर्क की परीक्षा दी. वेबसाइट पर जारी होगा परिणाम परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि नवंबर के प्रथम सप्ताह तक परिणाम जारी करने का लक्ष्य रखा गया है. कोर्स वर्क का परिणाम आने के बाद एक सप्ताह के अंदर पीजीआरसी की बैठक आयोजित की जायेगी. जिसमें उत्तीर्ण शोधार्थियों को रिसर्च का विषय तथा गाइड भी एलॉट कर दिया जायेगा. परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद न्यूनतम तीन साल या अधिकतम छह साल के अंदर रिसर्च पूरा कर लेना होगा. परीक्षा परिणाम वेबसाइट पर भी जारी होगा. दो सेमिनार व सिंपोजियम में शामिल होना जरूरी कोर्स वर्क उत्तीर्ण करने के बाद छात्र-छात्राएं गाइड के निर्देशन में सिनॉप्सिस तैयार करेंगे. सिनॉप्सिस तैयार होने के बाद उसे पहले डिपार्टमेंटल रिसर्च काउंसिल में अप्रूव कराना होगा. विभाग से सिनॉप्सिस अप्रूव होने के बाद उसे पीजीआरसी में भेजा जायेगा. पीजीआरसी की बैठक में सिनॉप्सिस की जांच होगी. पीजीआरसी से अप्रूव होने के बाद विभाग स्तर पर सिंपोजियम व सेमिनारों का आयोजन होगा. अधिकतम दो सेमिनार में शामिल होने वाले छात्रों का साक्षात्कार होगा. जिस प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद उन्हें उपाधि दी जायेगी.

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