बच जाती जान

Published at :23 Dec 2014 7:46 AM (IST)
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बच जाती जान

उसी रास्ते पहुंचा कैश वैन इसुआपुर के थानाध्यक्ष संजय कुमार तिवारी की हत्या के करीब 20-25 मिनट बाद उसी रास्ते भारतीय स्टेट बैंक के श्याम कौड़िया शाखा में 2.5 करोड़ रुपये ट्रांजिट मनी पहुंची, जिसे लूटने के लिये पहले से अपराधी श्याम कौड़िया ढाला पर घात लगा कर खड़े थे. साजिश के तहत लूट की […]

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उसी रास्ते पहुंचा कैश वैन
इसुआपुर के थानाध्यक्ष संजय कुमार तिवारी की हत्या के करीब 20-25 मिनट बाद उसी रास्ते भारतीय स्टेट बैंक के श्याम कौड़िया शाखा में 2.5 करोड़ रुपये ट्रांजिट मनी पहुंची, जिसे लूटने के लिये पहले से अपराधी श्याम कौड़िया ढाला पर घात लगा कर खड़े थे. साजिश के तहत लूट की योजना को अंजाम देने के लिये खड़े अपराधियों पर अगर थानाध्यक्ष की नजर नहीं पड़ती तो उनकी जान बच जाती, लेकिन बैंक की ट्रांजिट मनी 2.5 करोड़ रुपये लूट जाती. क्षेत्र में यह चर्चा है कि थानाध्यक्ष ने 2.5 करोड़ बचाने के लिये जान की बाजी लगा दी. और बैंक की राशि को लूटे जाने से बचा लिया.
एक वर्ष पहले हुई थी शादी
थानाध्यक्ष संजय कुमार तिवारी की शादी करीब डेढ़ वर्ष पहले हुई थी और उन्हें एक मात्र छह माह का दूधमुंहा पुत्र हैं. इस घटना के बाद उनकी पत्नी पर मानो दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है. उनकी मौत के खबर मिलने के बाद सदर अस्पताल पहुंची उनकी पत्नी दहाड़ मार कर रोती रही. उसे रोते-बिलखते देख कर न केवल संजय के सहयोगी रहे पुलिस कर्मियों की आंखें भर आयी बल्कि वहां मौजूद पुलिस अधीक्षक तथा पुलिस उप महानिरीक्षक भी अपनी आंसू नहीं रोक सके. उनकी पत्नी के रोने-बिलखने से पूरा माहौल गमगीन हो गया. लेकिन उनकी गोद में बैठा छ: माह का दूधमुंहा बच्च को क्या पता की उसके सिर से उसके पिता का साया उठ गया है.
भावुक हो गये डीआइजी
सदर अस्पताल में पहले से खड़े पुलिस अधीक्षक सत्यवीर सिंह तथा पुलिस उप महानिरीक्षक विनोद कुमार उस समय भावुक हो गये और घायल थानाध्यक्ष संजय कुमार तिवारी को स्वयं उठाने के लिए एंबुलेंस की ओर लपक पड़े. जब घायल श्री तिवारी को लेकर एंबुलेंस से चिकित्साकर्मी व पुलिसकर्मी अस्पताल पहुंचे. घटना की सूचना मिलते ही सबसे पहले एसपी तथा डीआइजी सदर अस्पताल पहुंचे और चिकित्सा कर्मियों को उपचार के लिये सभी आवश्यक प्रबंध पहले से कर लिये जाने का अनुरोध किया.
अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ शंभुनाथ सिंह तथा डॉ एमपी सिंह, डॉ अमरेश कुमार समेत करीब आधा दर्जन चिकित्सक देखते ही देखते अस्पताल पहुंच गये और ऑपरेशन थियेटर को तैयार कर लिया. घायल थानाध्यक्ष के पहुंचते ही ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया, जहां करीब आधे घंटे तक चिकित्सा कर्मियों द्वारा किया गया प्रयास सफल नहीं हो सका और थानाध्यक्ष ने दम तोड़ दिया.
…और रो पड़े सहकर्मी
वर्ष 2009 बैच के दारोगा संजय कुमार तिवारी को अपराधियों द्वारा गोली मारे जाने की खबर मिलते ही करीब दो दर्जन से अधिक पुलिस पदाधिकारी सदर अस्पताल पहुंच गये, जैसे ही संजय के दम तोड़ने की खबर मिली, उनके बैच के कई पुलिस पदाधिकारी रो पड़े और उनके साथ प्रशिक्षण से लेकर पुलिस केंद्र और विभिन्न थानों में बिताये गये पलों को याद कर अपनी आंखों की आंसू बहने से नहीं रोक सके. इस दौरान नगर थानाध्यक्ष शरतेंदु शरत, मुफस्सिल थानाध्यक्ष शंभु शरण सिंह, भगवान थानाध्यक्ष धर्मेद्र भारती व अन्य अधिकारी मौजूद थे., रिविलगंज थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार राय, मांझी थानाध्यक्ष धर्मेद्र कुमार कुशवाहा के अलावा नगर थाना के जेएन राम, राजकुमार चौधरी समेत काफी संख्या में पुलिस पदाधिकारी मौजूद थे.
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