आंधी से िगरे आम के टिकोले, लीची व गेहूं की फसल को भी भारी नुकसान

Updated at : 13 Apr 2018 5:02 AM (IST)
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आंधी से िगरे आम के टिकोले, लीची व गेहूं की फसल को भी भारी नुकसान

छपरा : पिछले एक महीने से लगातार आ रही आंधी से जिले किसानों का बुरा हाल हो गया है और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. कुछ दिन पहले जो किसान आम और लीची के मंजर को देखकर फूले नहीं समा रहे थे, उन्हीं किसानों के चेहरों पर इन दिनों उदासी के भाव साफ देखने […]

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छपरा : पिछले एक महीने से लगातार आ रही आंधी से जिले किसानों का बुरा हाल हो गया है और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. कुछ दिन पहले जो किसान आम और लीची के मंजर को देखकर फूले नहीं समा रहे थे, उन्हीं किसानों के चेहरों पर इन दिनों उदासी के भाव साफ देखने को मिल रहे हैं. आम व लीची के लगभग 50 प्रतिशत फसल आंधी की भेंट चढ़ गये, जिससे किसानों को लाखों का नुकसान पहुंचा है. जिन किसानों ने बेहतर टिकोले आने के बाद उनकी अच्छी ढंग से देखभाल कर फलों को बेचने का सपना संजोये थे, उनकी उम्मीदों को आंधी उड़ा ले गया है. मंजर न बेचने वाले ऐसे किसानों को काफी नुकसान हुआ है.

दिघवारा संवाददाता के अनुसार, अंबिका हाईस्कूल आमी के उत्तर में अवस्थित फल के बागानों के अलावे हराजी, शीतलपुर, बस्तीजलाल, त्रिलोकचक, झौवा, मलखाचक, पिपरा, फरहदा आदि जगहों पर लगे आम व लीची के मंजर का अधिकांश हिस्सा झड़ गया है जिससे किसानों में काफी मायूसी है. इसके अलावा मौसम की बेरुखी से किसानों की मुश्किलें बढ़ गयी है. मौसम में हर दिन हो रहे अप्रत्याशित बदलाव के चलते किसान अपनी गेहूं के फसल को नहीं कटवा रहे हैं और कुछ जगहों पर किसान फसल को कटाकर खलिहानों में रखे हुए हैं पर इस आशंका में दौनी नहीं करवा रहे हैं कि कहीं फसल बारिश की भेंट न चढ़ जाये.

किसानों का कहना है कि जब तक उनलोगों की गेहूं की दौनी नहीं हो जाती है और जब तक अनाज घरों तक नहीं पहुंच जाते हैं,तब तक सांसें लटकी हुई है. इससे पूर्व लगातार आंधी के आने से किसानों का भूसा भी बर्बाद हुआ है जिससे हजारों किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. त्रिलोकचक,हराजी,आमी,कुरैया,मलखाचक,कनकपुर आदि जगहों के किसान भी इसी परेशानी का सामना कर रहे हैं.

आवागमन भी बाधित हुआ
परसा संवाददाता के अनुसार, बुधवार की शाम करीब पांच बजे अचानक तेज धूल के साथ आंधी आयी. करीब बीस मिनट तक आंधी चली व छिटपुट बारिश भी शुरू हुई. कुछ समय के लिए आवागमन बाधित हो गया तथा सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त सा हो गया. आंधी के कारण सबसे अधिक नुकसान आम के पौधों को हुआ. पानापुर संवाददाता के अनुसार बाढ़ की विभीषिका झेल चुके प्रखंडवासियों पर गत शनिवार को आयी आंधी पानी के साथ ओलावृष्टि से दोहरी मार पड़ी है. धान की फसलें क्षतिग्रस्त होने के बाद किसानों ने सोचा था कि गेहूं की पैदावार से उसकी भरपाई की जायेगी. लेकिन बेमौसम की बरसात और ओलावृष्टि ने उनके अरमानों पर तुषारापात कर दिया है. ओलावृष्टि ने किसानों के साथ साथ फ्लो एवं सब्जियों की खेती करनेवालों किसानों को भी काफी क्षति पहुंचायी है.
गंडक नदी के दियारा क्षेत्र में रेत पर लाखों रुपये खर्च कर तरबूज की खेती किये किसानों की फसलें बर्बाद हो गयी है.
क्या कहते हैं अधिकारी
आंधी व पानी से नुकसान का आकलन करवाया जा रहा है. सरकार के द्वारा निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जायेगी. आम के टिकोलों व लीची को तेज आंधी की वजह से ज्यादा नुकसान हुआ है.
जयरामपाल,जिला कृषि पदाधिकारी, सारण
क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
अभी दो तीन दिनों तक आंधी व ओला वृष्टि की आशंका बनी हुई है. गर्म तथा ठंडा हवा के दबाव की वजह से आंधी उठ रही है. जो किसान गेहूं की कटाई कर चुके है. उन्हें जल्द दौनी करवाकर अनाज को सुरक्षित कर लेना चाहिए.
डॉ विद्यानंद पांडेय, कृषि वैज्ञानिक
रोक के बावजूद नहीं थम रहा बालू का अवैध व्यापार
क्या कहते हैं पदाधिकारी
सारण जिले में लगातार बालू के अवैध धंधेबाजों के खिलाफ कार्रवाई जारी है. वहीं इससे संबंधित रिपोर्ट प्रतिदिन राज्य मुख्यालय को भेजी जा रही है. गुरुवार को राज्य मुख्यालय से पहुंची छापेमारी दल की टीम ने भी सारण के खनन विभाग के पदाधिकारियों के सहयोग से छापेमारी शुरू की है. उन्होंने कहा कि छापेमारी के बाद ही विस्तृत रिपोर्ट देंगे.
उमेश चौधरी, जिला खनन पदाधिकारी, सारण
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