प्रमुख समेत पूरे परिवार की हत्या की रची थी साजिश

Updated at : 03 Feb 2018 6:31 AM (IST)
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प्रमुख समेत पूरे परिवार की हत्या की रची थी साजिश

फैसला. चिकित्सक समेत नौ लोगों ने दी गवाही, पांच को उम्रकैद घटनास्थल पर रात में पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था पुलिस बल छपरा(कोर्ट) : 19 अगस्त, 2007 कि रात की वह भयावह घटना, जिसे माओवादियों ने प्रमुख के घर पर अंजाम दिया था, उसे कम से कम मकेर एवं उसके आसपास के प्रखंड […]

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फैसला. चिकित्सक समेत नौ लोगों ने दी गवाही, पांच को उम्रकैद

घटनास्थल पर रात में पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था पुलिस बल
छपरा(कोर्ट) : 19 अगस्त, 2007 कि रात की वह भयावह घटना, जिसे माओवादियों ने प्रमुख के घर पर अंजाम दिया था, उसे कम से कम मकेर एवं उसके आसपास के प्रखंड के लोग तो नहीं ही भूल पाये हैं. दस वर्ष पांच महीना चौदह दिन बाद जब इस मामले में न्यायालय का फैसला आया तो पुनः एक बार उस रात का मंजर सबकी आंखों से गुजरने लगा. मकेर थाना से महज कुछ ही दूरी पर मछही जमालपुर स्थित तत्कालीन प्रखंड प्रमुख मुकेश उर्फ गुड्डू शर्मा का घर जहां दर्जनों हथियारबंद माओवादियों ने हमला कर घंटों उत्पात मचाया था. बम और गोलियों के साथ लैंडमाइंस के धमाकों ने पूरे इलाके को थर्रा दिया था. ऐसी बात नहीं थी कि स्थानीय पुलिस और जिला के आला अधिकारी घटना से अनभिज्ञ थे.
बल्कि गोलियों की तड़तड़ाहट व बम के धमाकों ने सभी की नींदे उड़ गयी थी और वरीय अधिकारियों द्वारा इसकी सूचना राज्य मुख्यालय तक को दे दी गयी थी. पुलिस कप्तान संजय सिंह सूचना मिलते ही मढ़ौरा डीएसपी के साथ मकेर थाना पहुंच गये थे. जबकि स्थानीय पुलिस घटनास्थल से कुछ दूरी पर पहुंच मूकदर्शक बन सुबह होने का इंतजार कर रही थी. माओवादी पूरी तैयारी के साथ आये थे और पूरे गांव को घेर लिया था. एक दस्ता प्रमुख के घर पर पहुंचा और जिसे देखा उसे गोली मार दी. मृतकों में प्रमुख की पत्नी पवन देवी, चाचा शंभूनाथ शर्मा और निजी गार्ड मृत्युंजय शर्मा शामिल थे. माओवादी प्रमुख को खोज रहे थे लेकिन प्रमुख हमला के वक्त अपने बैठकखाना में थे और वे गुप्त दरवाजे से निकल पास की झाड़ी में जा छिपे. बहुत ढूढ़ने के बाद भी जब प्रमुख नहीं मिले तो माओवादियों ने घर के चारों तरफ लैंडमाइंस बिछा कर घर व वाहन को उड़ा दिया, लेकिन वे प्रमुख को मारने में असफल रहे.
lपुलिस और कोर्ट की कार्रवाई
इस मामले में प्रमुख ने मकेर थाना कांड संख्या 29/07 में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए रामबहादुर महतो, रामजी साह, रामायण महतो,जितेंद्र राम और कृष्णा महतो समेत 26 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया था. मामले के आईओ दारोगा विजय कुमार ने 16 नवंबर 2007 को आरोपितों के विरुद्ध कोर्ट में आरोप पत्र समर्पित किया था जिसमें सत्र न्यायाधीश ने मामले में विचारण के दौरान 11 जनवरी 2016 को आरोप का गठन किया था. मामले में चिकित्सक व आईओ समेत नौ गवाहों ने गवाही दी है.
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