49 लाख के फर्जीवाड़े की जांच शुरू, बैंक खातों का डिटेल खंगाल रही है पुलिस

Updated at : 07 Dec 2017 8:10 AM (IST)
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49 लाख के फर्जीवाड़े की जांच शुरू, बैंक खातों का डिटेल खंगाल रही है पुलिस

दिघवारा : रेलवे के ग्रुप डी में बहाली के नाम पर दर्जन भर से अधिक बेरोजगार युवकों के साथ हुए लगभग 49 लाख रुपये के फर्जीवाड़ा को लेकर दिघवारा थाने में दर्ज प्राथमिकी के बाद अब पुलिस अनुसंधान में जुट गयी है और साक्ष्य जुटाने का हरसंभव प्रयास कर रही है. पुलिस का कहना है […]

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दिघवारा : रेलवे के ग्रुप डी में बहाली के नाम पर दर्जन भर से अधिक बेरोजगार युवकों के साथ हुए लगभग 49 लाख रुपये के फर्जीवाड़ा को लेकर दिघवारा थाने में दर्ज प्राथमिकी के बाद अब पुलिस अनुसंधान में जुट गयी है और साक्ष्य जुटाने का हरसंभव प्रयास कर रही है. पुलिस का कहना है कि साक्ष्य जुटाने के बाद जल्द ही अभियुक्तों की गिरफ्तारी के प्रयास किये जायेंगे. जैसे-जैसे पुलिस की अनुसंधान की गाड़ी आगे बढ़ रही है, कुछ ऐसे आदमी भी सामने आये हैं जिन्होंने भी नौकरी के नाम पर कांड के मुख्य अभियुक्त को राशि दिया था.
नाम न छापने की शर्त पर एक अभिभावक ने बताया कि अगर बेरोजगार युवकों के साथ हुए फर्जीवाड़े के मामले की सही से जांच हो तो फर्जीवाड़े की राशि एक करोड़ से अधिक पहुंच जायेगी. सूत्रों की मानें तो पुलिस जयप्रकाश समेत कई अन्य नामजद अभियुक्तों के खातों की तलाश कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसके खाते में कितनी राशि जमा की गयी व कितनी राशि की निकासी हुई है?
पुलिस को खातों की जांच के क्रम में ऐसे कुछ सबूत मिले हैं जो मामले के अनुसंधान में सहायक हो सकते हैं.पुलिस को जयप्रकाश के खातों पर विशेष नजर है.
रेल में नौकरी के खेल से धीरे धीरे उठ रहा पर्दा
नौकरी के नाम पर हुए फर्जीवाड़े को लेकर प्राथमिकी दर्ज होने के बाद इसी से संबंधित कई मामले सामने आ रहे हैं जिसमें लोगों ने दबी जुबान में कहा है कि उनलोगों ने भी अपने बच्चों को नौकरी दिलाने के नाम पर प्राथमिकी के मुख्य आरोपित जयप्रकाश साह को राशि दी थी.
नगर के राईपट्टी निवासी सुरेश गाईं ने बताया कि जयप्रकाश ने ही उनके पुत्र को नौकरी दिलाने के नाम पर उससे लाखों की राशि की ठगी की और बाद में फर्जी जॉइनिंग लेटर थमा दिया. श्री गाईं के अनुसार उन्होंने जयप्रकाश को राशि का भुगतान बैंक अकाउंट के तहत किया था. 17 सितम्बर, 2015 सेंट्रल बैंक की दिघवारा शाखा से उसके खाते में 1 लाख 40 हजार व 18 सितंबर 2015 को बैंक ऑफ बड़ौदा की दिघवारा शाखा से 1 लाख 60 हजार की राशि का ट्रांसफर किया गया था. फिर एक लाख रुपया नकद लिया, उसके बाद उसके बेटा सोनू को ट्रेनिंग के लिए कोलकाता भेजा गया, जहां तीन महीने की ट्रेनिंग हुई और इस क्रम में भी 50 हजार रुपये खर्च हुए. बाद में डाक से योगदान पत्र घर आया और जब जॉइनिंग लेटर लेटर की जांच हुई तो वह फर्जी निकला.
क्या कहते हैं अन्वेषणकर्ता
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अनुसंधान किया जा रहा है. अनुसंधान के क्रम में कई बैंक खातों का डिटेल निकाला गया है. किसी लोग के पास अगर इस मामले से संबंधित साक्ष्य है तो पुलिस को बताएं ताकि अभियुक्तों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके. जरूरत हुई तो पुलिस कोलकाता भी जायेगी.
श्रीराम ठाकुर, एएसआई, दिघवारा थाना
कोर्ट परिवाद के आधार पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी
नौकरी के नाम पर पैसे के लेन देन का यह खेल 2015 में शुरू हुआ और जब ट्रेनिंग के बाद फर्जी जॉइनिंग लेटर लोगों के हाथ लगा तो मामला प्रकाश में आया. दिघवारा थाना क्षेत्र के शीतलपुर निवासी जयप्रकाश साह,संजय कुमार साह,सौरभ राज उर्फ गोविंदा,सीमा देवी,मधु गुप्ता,पुरुषोत्तम साह के अलावे नयागांव थाना क्षेत्र के महमूदचक निवासी दीपू साह,शिवपूजन साह व सकल साह को आरोपित किया गया है.
दर्ज प्राथमिकी के बाद से आरोपितों की तलाश में पुलिस जुटी है.
एक दर्जन से अधिक लोगों से आरोपितों ने ली है राशि
जिन लोगों से नौकरी के नाम पर राशि ली गयी है उनमें बस्तीजलाल के दिलीप कुमार, सत्येंद्र कुमार, राकेश कुमार व सोनू कुमार, गोपालगंज के उचकागांव के बलेसरा निवासी राकेश कुमार, शीतलपुर कोठी के बलबंत कुमार बसंत कुमार, प्रेम प्रदीप, सुधीर राम, उमेश प्रसाद व पटना कुर्जी के सुधांशु रंजन प्रमुख हैं. ऐसे सभी लोगों से जनवरी 2015 में रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर फार्म भरवाए गये .
और फिर अपनी सुविधानुसार अभियुक्तों ने ऐसे लोगों से कैश या फिर बैंक खातों के सहारे राशि की वसूली की.
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