दिव्यांगता को दी मात, फिर रचाया दहेजमुक्त विवाह

Updated at : 30 Nov 2017 6:59 AM (IST)
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दिव्यांगता को दी मात, फिर रचाया दहेजमुक्त विवाह

छपरा(नगर) : न बैंड न बाजा, न डीजे की धुन और नहीं परंपराओं के चादर में लिपटा दहेज रूपी अभिशाप. दहेज मुक्त विवाह रचा कर सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोच को एक नया आकार दिया है सारण के युवा एथलीट अमित कुमार सिंह ने. जिले के डोरीगंज निवासी अमित बचपन से ही दोनों […]

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छपरा(नगर) : न बैंड न बाजा, न डीजे की धुन और नहीं परंपराओं के चादर में लिपटा दहेज रूपी अभिशाप. दहेज मुक्त विवाह रचा कर सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोच को एक नया आकार दिया है सारण के युवा एथलीट अमित कुमार सिंह ने. जिले के डोरीगंज निवासी अमित बचपन से ही दोनों पैरों से पूर्णतः दिव्यांग हैं. सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले अमित ने अपनी दिव्यांगता को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया और समाज में व्याप्त प्रतिस्पर्धाओं से लड़कर स्वयं को एक बेहतर पैरा एथलीट के रूप में सशक्त किया है.

बीते रविवार आरा के बखोरापुर मंदिर में अपने जैसी ही एक दिव्यांग लड़की पूजा के मांग में सिंदूर भर कर अमित ने न सिर्फ एक मिसाल कायम किया है बल्कि दहेज मुक्त शादी रचा कर सरकार के इरादों को भी भरपूर हौसला देने का काम किया है. दिव्यांगों की एटलेटिक्स प्रतियोगिताओं में अमित ने कई बार सारण जिले का नाम रोशन किया है.

17 वीं नेशनल पैराएथलिट गेम्स में डिस्कस थ्रो इवेंट में दूसरा स्थान लाकर चर्चा में आये अमित को बिहार सरकार द्वारा राज्य खेल पुरस्कार व बिहार खेल अकादमी से अजातशत्रु अवार्ड भी प्राप्त हो चुका है. फिलहाल पैरा ओलंपिक खेलों में जाने के लिये दिन रात मेहनत कर रहे हैं. प्रभात खबर से हुई बातचीत में अमित ने बताया कि दिव्यांगता सिर्फ मानसिक होती है. यदि आपके पास इरादा हो तो हाथ-पांव नाकाम रहते हुए भी सबकुछ पाया जा सकता है. उनकी पत्नी पूजा के भी दोनों पैर पोलियोग्रस्त हैं. पटना के विसपपुर की रहने वाली पूजा को भी अपनी दिव्यांगता पर अफसोस नही है. वह घर के सभी काम बड़े आसानी से किया करती हैं. जब बात दोनों के शादी की हुई तो अमित ने दहेज के नाम पर कुछ भी लेने से इनकार कर दिया.

यहां तक कि रिश्तेदारों से गिफ्ट भी नहीं लिये. पूजा के पिता हितन सिंह ने अपनी बेटी को बस दो जोड़ी साड़ी और अपार स्नेह के साथ विदा किया है. अमित के गांव मानुपुर जहांगीर के लोग आज गर्वान्वित हैं. दहेज मुक्त विवाह कर दिव्यांग जोड़ों ने पूरे जिले को गर्व करने का एक बेहतरीन मौका दिया है.
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