दो माह में नहीं रुका कटाव, तो मिट जायेगा सिताब दियारा का अस्तित्व : रुडी
Updated at : 12 Oct 2017 10:00 AM (IST)
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अगर दो महीने में बिहार तथा उत्तर प्रदेश की सरकार मिलकर कटाव रोकने के लिए योजना नहीं बनाती है तो, अगले साल जेपी जयंती कार्यक्रम यहां नहीं हो सकेगा. अगर इसी तरह से कटाव होते रहा, तो जेपी का पैतृक गांव सिताब दियारा सरयू नदी के गर्भ में समाहित हो जायेगा. कटाव के कारण देश […]
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अगर दो महीने में बिहार तथा उत्तर प्रदेश की सरकार मिलकर कटाव रोकने के लिए योजना नहीं बनाती है तो, अगले साल जेपी जयंती कार्यक्रम यहां नहीं हो सकेगा. अगर इसी तरह से कटाव होते रहा, तो जेपी का पैतृक गांव सिताब दियारा सरयू नदी के गर्भ में समाहित हो जायेगा. कटाव के कारण देश की ऐतिहासिक धरोहर समाप्ति के कगार पर है.
दोनों राज्यों की सरकार को इस धरती को बचाने के लिए जल्द ही कार्य योजना बनानी चाहिये. ऐतिहासिक धरती होने के कारण केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार दक्षिण से चल कर प्रत्येक वर्ष इसे नमन करने आते हैं. अगले साल प्रधानमंत्री के जेपी के धरती पर आगमन होने से पहले इस धरती को बचाने के लिए दोनों सरकार मिल कर कार्य योजना बनाये.
बिहार-उत्तर प्रदेश के दोनो गांव समाप्ति के कगार पर : भरत
बलिया के सांसद भरत सिंह ने कहा है कि सरयू नदी किनारे स्थित बिहार तथा उत्तर प्रदेश के गांवों पर खतरा मंडरा रहा है. सरयू नदी के कटाव के कारण कभी भी सिताब दियारा का खत्म हो सकता है. योजना बना कर इसे बचाने का प्रयास होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि जेपी आंदोलन में 19 माह तक जेल में रहा हूं. मैं छात्र जीवन से ही जेपी का अनुयायी हूं. जेपी के आदर्शों पर चलकर आज मैं इस जगह पहुंचा हूं. महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल ने कहा है कि जेपी की जन्म भूमि सिताब दियारा को बचाने के लिए केंद्रीय टीम से सर्वेक्षण करा कर कार्य योजना बना कर कार्यान्वित करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक भूमि को बचाया जाना देश के लिए जरूरी है.
पिछले साल केंद्रीय कैबनेट से प्रस्ताव पारित कर जेपी स्मारक बनाने का निर्णय लिया गया था. इसे बचाने का कार्य केंद्र सरकार तथा प्रदेश के साथ-साथ हमारी भी जिम्मेवारी है.जेपी स्मारक,पुस्तकालय देश की धरोहर है.
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