संस्कृत महज एक भाषा नहीं, संपूर्ण जीवन है, बोले आरके सिंह- दर्शन की जननी संस्कृत

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 29 Oct 2023 8:09 PM

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पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ प्रो आरके सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में संस्कृत के विकास से संबंधित जो भी उचित होगा अवश्य करूंगा. संस्कृत महज एक भाषा नही है यह संपूर्ण जीवन है, यह विज्ञान है और संपूर्ण दर्शन भी है.

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पटना. समग्र संस्कृत विकास समिति की ओर से महान नीतिज्ञ चाणक्य के विचारों का दार्शनिक अध्ययन विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया. बीआइए सभागार में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर के विद्वानों, मनीषियों व संस्कृतानुरागियों का सम्मान किया गया. पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ प्रो आरके सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में संस्कृत के विकास से संबंधित जो भी उचित होगा अवश्य करूंगा. संस्कृत महज एक भाषा नही है यह संपूर्ण जीवन है, यह विज्ञान है और संपूर्ण दर्शन भी है. डॉ. प्रो. आरके सिंह कुलपति पाटलिपुत्रा विश्विद्यालय, पटना ने कहा कि पाटलिपुत्रा विश्विद्यालय, पटना में संस्कृत के विकास से सम्बंधित जो भी उचित होगा मैं अवश्य करूँगा. संस्कृत माँ के तुल्य है.

संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषा

समग्र विकास समिति के संयोजक डॉ. मिथिलेश कुमार तिवारी ने आगत अतिथियों का स्वागत किया. अपने स्वागत भाषण में डॉ मिथिलेश तिवारी ने कहा विगत 12 वर्षों से हर वर्ष इस कार्यक्रम का सफल आयोजन किया जा रहा है. समिति के संयोजक डॉ मिथिलेश कुमार तिवारी ने कहा संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है लेकिन आज ये विलुप्त होने के कगार पर है. कार्यक्रम का उद्देश्य इस भाषा को जन जन तक पहुंचाना है. प्रो राजेश कुमार सिंह ने चाणक्य के विचारों पर विस्तृत प्रकाश डाला. महान समाज सेवी श्री ललन सिंह ने कहा कि मैं अपने गाँव में संस्कृत के विकास के लिए एक संस्कृत महाविद्यालय खोलने का विचार कर रहा हूं. शिवाकांत तिवारी, राष्ट्रीय सचिव, भारत तिब्बत सहयोग मंच ने चाणक्य के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला.

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वेद को पढ़े बिना नागरिक को भारतीय संस्कृति का ज्ञान नहीं हो सकता

बिहार इंडस्ट्रीयल एसोसियेशन सभागार में समग्र संस्कृत विकास समिति द्वारा “भारतीय राष्ट्रीयता तथा अस्मिता के अग्रदूत एवम महान नीतिज्ञ चाणक्य के विचारों का दार्शनिक अध्ययन” विषय पर आयोजित सेमिनार में बोलते हुए विधानपार्षद नवल किशोर यादव पर भारतीय समकालीन विचारों के विभन्न आयाम पुस्तक का विमोचन भी किया गया. प्रो नवल किशोर यादव ने कहा कि वेद को पढ़े बिना नागरिक को भारतीय संस्कृति का ज्ञान नहीं हो सकता है. डॉ. अविनाश कुमार गेस्ट्रोलोजिस्ट ने संस्कृत में लिखित प्राचीन शल्य चिकित्सा पर विस्तृत प्रकाश डाला. डॉ. मनोज झा प्राचार्य, राजकीय संस्कृत महाविद्यालय ने कहा कि संस्कृत के कारण ही भारत विश्व गुरु बना और आज इसकी अवहेलना हो रही है.

इन विद्वानों को किया गया सम्मानित

बीआईए सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में संस्कृत, दर्शनशास्त्र,पाली,प्राकृत,अर्थशास्त्र व अंग्रेजी साहित्य में राष्ट्रीय स्तर के विद्वानों मनीषियों व संस्कृतानुरागियो का सम्मान भी किया गया. मौके पर ललन सिंह, आरएन सिंह, शिवाकांत तिवारी, डॉ अविनाश कुमार, डॉ मनोज झा, डॉ ज्योति शंकर सिंह, डॉ सुबोध सिंह, डॉ विनय तिवारी, डॉ संजय सिंह, शैलेश त्रिपाठी, सुधांशु रंजन, डॉ गौतम जितेन्द्र आदि विद्वानों को सम्मानित किया गया. धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष राजनीतिशास्त्र डॉ. ज्योति शंकर सिंह के द्वारा किया गया.

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