उजियारपुर थानाध्यक्ष पर वंदे मातरम के अपमान का आरोप, डीएम-एसपी से शिकायत, कार्रवाई की मांग

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आवेदन लेकर पहुंचे 20 सूत्री के उपाध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा | Prabhat Khabar Network

समस्तीपुर में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रगीत वंदे मातरम के कथित अपमान का मामला सामने आया है. उजियारपुर थाना परिसर में थानाध्यक्ष पर राष्ट्रगीत के समय बातचीत करने का आरोप है. इस संबंध में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत की गई है.

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Vande Mataram 2026: जिला स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के उपाध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने उजियारपुर थाना परिसर में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रगीत वंदे मातरम के कथित अपमान का आरोप लगाया है. उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारी के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है.

राष्ट्रगीत के दौरान बातचीत करने का आरोप

उपेंद्र कुशवाहा के अनुसार, 15 अगस्त को उजियारपुर थाना परिसर में स्वतंत्रता दिवस का आधिकारिक समारोह आयोजित किया गया था. ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगीत वंदे मातरम का सामूहिक गायन किया जा रहा था. इसमें पुलिसकर्मी, अधिकारी और अन्य उपस्थित लोग शामिल थे.

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसी दौरान उजियारपुर थानाध्यक्ष राष्ट्रगीत के समय बातचीत में व्यस्त रहे. उपेंद्र कुशवाहा का कहना है कि इससे समारोह की गरिमा प्रभावित हुई और उपस्थित लोगों की भावनाएं आहत हुईं.

वायरल वीडियो की तकनीकी जांच की मांग

शिकायत में कहा गया है कि राष्ट्रगीत के दौरान थानाध्यक्ष के बातचीत करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. उपेंद्र कुशवाहा ने वायरल वीडियो की तकनीकी जांच कराने की मांग की है.

उन्होंने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के अलावा मुख्यमंत्री तथा पुलिस महानिरीक्षक को भी शिकायत भेजकर मामले की जांच और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का आग्रह किया है.

वंदे मातरम को लेकर 2026 में बदला कानूनी प्रावधान

शिकायत में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में 2026 में हुए संशोधन का भी हवाला दिया गया है. संशोधन के बाद वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में उसी कानूनी संरक्षण के दायरे में लाया गया है, जिसके तहत राष्ट्रगान के गायन को जानबूझकर रोकना या ऐसे कार्यक्रम में व्यवधान पैदा करना दंडनीय है.

हालांकि, केवल बातचीत करने का आरोप अपने आप में उक्त कानूनी प्रावधान के तहत अपराध सिद्ध नहीं करता. मामले में वायरल वीडियो की प्रामाणिकता, बातचीत की प्रकृति और जानबूझकर व्यवधान पैदा करने जैसे तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी.

प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस मामले में जिला प्रशासन या पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है. शिकायत की जांच और वायरल वीडियो की तकनीकी पड़ताल के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

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