गुरु की हवस, पंचों की दलाली और खाकी की लाचारी: गर्भवती युवती की आबरू पर बैठी 10 लाख की 'समानांतर अदालत'

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गुरु की हवस, पंचों की दलाली और खाकी की लाचारी: गर्भवती युवती की आबरू पर बैठी 10 लाख की 'समानांतर अदालत'

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विभूतिपुर में युवती को गर्भवती करने के आरोपी शिक्षक ने पंचों को 10 लाख रुपये देकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की। पुलिस जांच जारी है।

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Vibhutipur Teacher Case: जब समाज के तथाकथित पहरेदार ही बेटियों की अस्मत की बोली लगाने लगें, तो इंसाफ की उम्मीद किससे की जाए? समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर थाना क्षेत्र से सामने आया यह मामला समाज में महिलाओं के साथ हो रहे दोहरे अन्याय, पुरुषवादी सोच और खाकी की लाचारी का खौफनाक चेहरा उजागर करता है. यहां मर्यादा और संस्कार सिखाने वाला शिक्षक सह योग गुरु जब एक युवती को गर्भवती करने का गुनहगार बना, तो कानून की चौखट के समानांतर रसूखदारों ने अपनी 'अवैध कचहरी' सजा दी. पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय इस संगीन अपराध को दबाने के लिए पूरे 10 लाख रुपये में 'सौदा' तय कर दिया गया.

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साढ़े छह लाख नकद और कार बंधक: पंचों की खुली सौदेबाजी

समाज में नैतिकता का ढोंग रचने वाले पंचों ने कानून और संविधान को ताक पर रखकर इंसाफ का बाजार सजा दिया:

  • मोटी रकम का खेल: आरोपी शिक्षक ने मामले को रफा-दफा करने के लिए पंचों के पास साढ़े छह लाख रुपये नकद पहुंचा दिए.
  • गाड़ी की गारंटी: बाकी बचे साढ़े तीन लाख रुपये के एवज में एक पंच के नाम अपनी लग्जरी कार बंधक रख दी गई.
  • सफेदपोशों का गठजोड़: खुद को न्यायप्रिय बताने वाले समाज के स्वयंभू ठेकेदार इस घिनौने अपराध पर पर्दा डालने में सीधे तौर पर भागीदार बने हुए हैं.

दबाव में सिसकती पीड़िता, मेडिकल और कोर्ट बयान से दूरी

पितृसत्तात्मक दबाव और सामाजिक बदनामी के डर से पीड़िता कानून के पास जाने से बच रही है. मामले की अनुसंधानकर्ता सब इंस्पेक्टर आरती कुमारी ने बताया कि पीड़िता को मेडिकल जांच और धारा 164 के तहत कोर्ट में बयान दर्ज कराने के लिए लगातार बुलाया जा रहा है, लेकिन वह हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर आने से इनकार कर रही है. यह स्थिति दर्शाती है कि कैसे पंचायती व्यवस्था पीड़ित महिलाओं की आवाज घोंटकर उन्हें खामोश कर देती है.

सिस्टम के मुंह पर तमाचा: कानून जीतेगा या पंचों का रसूख?

एफआईआर दर्ज होने के बाद भी खुलेआम पंचायती चलना और भारी-भरकम रकम की सौदेबाजी होना पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या खाकी इस अवैध 'समानांतर कोर्ट' के सिंडिकेट को तोड़कर पीड़िता को न्याय दिला पाएगी, या फिर कानून की आंख में धूल झोंककर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा.

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