शिक्षक-शिक्षिका कालीपट्टी लगाकर किया कार्य किया
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 24 May 2024 11:23 PM
शिक्षा विभाग के अलोकतांत्रिक, अमानवीय एवं दमनकारी आदेशों का विरोध अब शुरू हो गया है. शुक्रवार को जिले के शिक्षकों ने अपने बांह पर कालीपट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया.
समस्तीपुर : शिक्षा विभाग के अलोकतांत्रिक, अमानवीय एवं दमनकारी आदेशों का विरोध अब शुरू हो गया है. शुक्रवार को जिले के शिक्षकों ने अपने बांह पर कालीपट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया. बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ब्रजनन्दन शर्मा के आह्वान पर जिले के सैकड़ों शिक्षकों ने अपना प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शित किया. ग्रीष्मावकाश को रद्द करने, विद्यालय के समयावधि में अतार्किक व अप्रासंगिक बदलाव एवं विद्यालय निरीक्षण में कनीय कर्मियों को तैनात करने से शिक्षकों में भारी आक्रोश है. बता दें कि वर्षों से यह परंपरा रही है कि प्रातः कालीन पाली में विद्यालय का संचालन सुबह 6:30 बजे से 11:30 बजे तक होता रहा है, जबकि इस बार बच्चों के लिए विद्यालय की समयावधि 6 बजे से 12 बजे तक निर्धारित की गई है. शिक्षकों के प्रस्थान का समय 1:30 बजे अपराह्न विभाग ने तय किया है. इतना ही नहीं प्रधानाध्यापक को दो बजे अपराह्न से वीसी में भाग लेना है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का स्थल सभी प्रधानाध्यापक का अपना विद्यालय न बनाकर कंप्लेक्स रिसोर्स सेंटर में रखा गया है. स्वाभाविक है कि जिले के प्रधानाध्यापक तीन बजे शाम के बाद ही प्रस्थान करते हैं. जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनन्त कुमार राय ने बताया कि राज्य संघ के आह्वान पर जिले के शिक्षकों ने शुक्रवार से विरोध शुरू किया. राज्य संघ ने तय किया है कि सरकार उससे वार्ता कर शिक्षकों को इस मानसिक परेशानी से मुक्ति दिलाये, अन्यथा विवश होकर आचार संहिता समाप्त होने के बाद आन्दोलन का शंखनाद किया जायेगा. प्रधान सचिव अनिल कुमार ने ग्रीष्मावकाश समाप्त किये जाने का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि शिक्षकों की सेवा वोकेशनल है, जिसमें उसे 60 दिनों का अवकाश देय है, जबकि इस वर्ष 30 दिनों का अवकाश काट लिया गया है. विद्यालय के समयावधि में किये गये परिवर्तन से बच्चों को काफी असुविधा हो रही है. छोटे छोटे बच्चे बिना नाश्ता किये स्कूल जाने को विवश हैं और इस गर्मी में 12 बजे दोपहरी में छुट्टी के बाद घर जाते हैं. इससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. वहीं शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी छह बजे विद्यालय पहुंचने में काफी परेशानी होती है.
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