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Samastipur News:अब हेडमास्टर भी मिशन दक्ष के तहत चिह्नित बच्चों को पढ़ायेंगे

Updated at : 14 Oct 2025 6:48 PM (IST)
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Samastipur News:अब हेडमास्टर भी मिशन दक्ष के तहत चिह्नित बच्चों को पढ़ायेंगे

अब हेडमास्टर भी मिशन दक्ष के तहत चिह्नित बच्चों को पढ़ायेंगे. बच्चों को इस प्रकार से चिह्नित किया जायेगा कि प्रति शिक्षक पांच से सात बच्चे संबद्ध हों.

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Samastipur News:समस्तीपुर : अब हेडमास्टर भी मिशन दक्ष के तहत चिह्नित बच्चों को पढ़ायेंगे. बच्चों को इस प्रकार से चिह्नित किया जायेगा कि प्रति शिक्षक पांच से सात बच्चे संबद्ध हों. ऐसे में शिक्षक बच्चों पर व्यक्तिगत ध्यान दे सकेंगे. विद्यालय निरीक्षण के दौरान निरीक्षी अधिकारी की ओर से मिशन दक्ष की विशेष कक्षा का अवलोकन किया जायेगा. भ्रमण प्रतिवेदन में वर्गकक्ष की प्रगति के संबंध में अपनी टिप्पणी भी देंगे. इस आशय का आदेश प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने जिला शिक्षा अधिकारी को जारी किया है. निर्देश में कहा गया है कि वर्ग तीन से आठ में अध्ययनरत ऐसे बच्चे जिनमें हिंदी, गणित व अंग्रेजी के बुनियादी कौशल का अभाव है, उनके लिए मिशन दक्ष चलाया जा रहा है. विद्यालय से संबद्ध टोला सेवक व तालीमी मरकज का सहयोग मिशन दक्ष की कक्षाओं के संचालन में लिया जायेगा. शिक्षक बच्चों को हिन्दी, गणित व अंग्रेजी के शुरुआती बुनियादी कौशलों को विकसित करना प्रारंभ करेंगे. कक्षावार कौशल विकसित कराने तक बच्चों के साथ जुड़े रहेंगे.

बच्चों की प्रगति का नियमित रूप से होगा आकलन

बच्चों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए प्रत्येक शिक्षक के पास उनके संबद्ध बच्चों के समूह के साथ एक पंजी रहेगी. इसका अवलोकन हेडमास्टर की ओर से प्रतिदिन किया जायेगा. बच्चों की प्रगति का नियमित आकलन संबंधित शिक्षकों की ओर से किया जायेगा. इससे संबंधित रिकार्ड स्कूल में संधारित की जायेगी. ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर इसकी इंट्री की जायेगी. मिशन दक्ष के बच्चों के लिए अलग नोटबुक रखा जायेगा. विशेष दक्ष कक्षा में किये जा रहे कार्यों को उस नोट बुक में लिखेंगे. मिशन दक्ष के तहत शिक्षकों द्वारा गृह कार्य दिया जायेगा. इसकी जांच शिक्षक प्रतिदिन करेंगे. गृह कार्य व वर्ग में कराये जा रहे कार्यों की जांच में शिक्षक द्वारा लाल स्याही का उपयोग किया जायेगा. यह भी निर्देश दिया गया है कि प्रतिदिन किस विषय को व किस विषय वस्तु को पढ़ाया जाय, इस संबंध में संबंधित शिक्षक एक विषय सारिणी का निर्माण करेंगे.

शिक्षकों के पढ़ाने की शैली पर भी होगी नजर

सरकारी विद्यालयों की शिक्षण गुणवत्ता को सुधारने के उद्देश्य से एकेडमिक मॉनिटरिंग की योजना शुरू की है. यह निगरानी कार्य राज्य के विभिन्न अध्यापक प्रशिक्षण कॉलेजों और संस्थानों के संकाय सदस्यों द्वारा किया जायेगा. इस पहल का उद्देश्य न केवल शिक्षकों के सेवाकालीन प्रशिक्षण की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना है, बल्कि शिक्षण प्रक्रिया में गुणात्मक सुधार भी सुनिश्चित करना है. राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद के निदेशक के निर्देश के तहत यह कार्य योजना सभी संबंधित संस्थानों को जारी कर दी गई है. इस योजना के अंतर्गत विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करते हुए शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति, आधारभूत संरचना, शिक्षण सहगामी गतिविधियों और कक्षा संचालन का मूल्यांकन किया जायेगा. सेवाकालीन आवासीय प्रशिक्षण में भाग ले रहे शिक्षकों की कक्षा में पढ़ाने की शैली और छात्रों के सीखने के स्तर पर भी विशेष नजर रखी जायेगी. यह मॉनिटरिंग सिस्टम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निरंतर सुधार को सुनिश्चित करने का प्रयास है. प्रत्येक संकाय सदस्य को अनुश्रवण की रिपोर्ट एक निर्धारित फॉर्मेट में राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद को सौंपनी होगी, ताकि पूरे राज्य में एक समान गुणवत्ता मानक स्थापित किया जा सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Ankur kumar

लेखक के बारे में

By Ankur kumar

Ankur kumar is a contributor at Prabhat Khabar.

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