गर्मी व लू को देखते हुये किसान खड़ी फसलों में शाम के समय करें सिंचाई
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 27 Apr 2024 11:11 PM
समस्तीपुर : मौसम का तेवर लगातार गर्म हो रहा है. तापमान 40 पार जा रहा है. लू व हीट स्ट्राॅक की स्थिति बनी हुई है.
समस्तीपुर : मौसम का तेवर लगातार गर्म हो रहा है. तापमान 40 पार जा रहा है. लू व हीट स्ट्राॅक की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में मानव व पशु के साथ-साथ फसलों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ने की संभावना है. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. ए सत्तार ने कहा है उच्च तापमान एवं लू के प्रभाव से खड़ी फसलों में पानी की मांग अत्याधिक हो सकती है. खेत में नमी की कमी से फसलों के विकास एवं तत्पश्चात उपज पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है. इस स्थिति में खेत की निगरानी कर आवश्यकतानुसार सिंचाई शाम के समय करें. दूसरी ओर गर्म हवाओं से किसान अपने बाग को सुरक्षित करने के लिये आम और लीची के बगीचों में नमी बनाये रखें. नमी की कमी होने से फलों में नुकसान हो सकता है. अगर किसान के बाग में विगत वर्षों में फल फटने की स्थिति देखने को मिली हो तो ऐसे किसान अपने बाग में चार ग्राम घुलनशील बोरान प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें, जिससे आने वाले दिनों में फल फटने के नकुसान से बच सकते हैं. आम में फल मक्खी के प्रबन्धन के लिये फ्रूट फ्लाई ट्रैप सबसे बढ़िया विकल्प है. प्रति हेक्टेयर 15 से 20 फरोमैन ट्रैप लगाकर फ्रूट फ्लाई मक्खी को प्रबंधित किया जा सकता है. इन ट्रैपों को निचली शाखाओं पर 4 से 6 फीट की ऊंचाई पर बांधना चाहिए. एक ट्रैप से दूसरे ट्रैप के बीच में 35 मीटर की दूरी रखनी है. ट्रैप को कभी भी सीधे सूर्य की किरणों में नहीं रखें. ट्रैप को आम की बहुत घनी शाखाओं के बीच में नहीं बाधना है. ट्रैप बाग में स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिये. ट्रैप बांधने की अवस्था फल पकने से 60 दिन से पहले होना चाहिए और 6 से 10 सप्ताह के अंतराल पर नर की सुगंध बदलते रहना चाहिए. रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतों की गहरी जुताई कर खेत को खुला छोड़ दें ताकि सूर्य की तेज धूप मिट्टी में छिपे कीडा़ें के अंडे, प्यूपा एवं घास के बीजों को नष्ट कर दें. दुधारू पशुओं को दिन में धूप में चराने नहीं भेजें उसे छायादार स्थान पर रखें. चारा दाना सुबह जल्दी एवं शाम में देरे से खिलायें. सूखा चारा की मात्र कम कर दें एवं तिलहन खल्ली और हरे चारा की मात्र बढ़ा दें. लू लगने की स्थिति में पशु चिकित्सक की सलाह से मेलोक्सीकैम सूई लगवा लें एवं इंटालाईट ओरल तीन ग्राम पाउडर को दो लीटर पानी में घोलकर सुबह शाम पिलायें. प्रभावित पशु को बार-बार ठंडे पानी से धोयें. पशु में लू लगने के लक्षण हैं तेज बुखार, तेज हाफना, ज्यादा लार निकलना, बेचैनी, भूख नहीं लगना तथा ज्यादा पानी पीना. भिण्डी की फसल को लीफ हॉपर कीट द्वारा काफी नकुसान होता है. यह कीट दिखने में सुक्ष्म होता है. इसके नवजात एवं व्यस्क दोनों पत्तियों पर चिपककर रस चूसते हैं. अधिकता की अवस्था में पत्तियों पर छोटे-छोटे धब्बे उभर जाते हैं और पत्तियां पीली तथा पौधे कमजोर हो जाते हैं, जिससे फलन प्रभावित होती है. इस कीट का प्रकोप दिखाई देने पर इमिडाक्लोपिड्र 0.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें. भिंडी फसल में माइट कीट की निगरानी करते रहें. प्रकोप दिखाई देने पर ईथियान प्रति 1.5 से 2 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव आसमान साफ रहने पर ही करें. गरमा सब्जियों भिन्डी, ननेअुा, करैला, लौकी (कद्दू) तथा खीरा की फसल में किसान निकाई- गुड़ाई करें. फल मक्खी लत्तर वाली सब्जियों ननेअुा, करैला, लौकी (कद्दू) तथा खीरा फसल को क्षति पहुंचाने वाला प्रमुख कीट है. यह घरेलू मक्खी की तरह दिखाई देने वाली भूरे रंग की होती है. मादा कीट मुलायम फलों की त्वचा के अन्दर अंडे देती है. अंडे से पिल्लू निकलकर अन्दर ही अन्दर फलों के भीतरी भाग को खाता है, जिसके कारण पूरा फल सड़ कर नष्ट हो जाता है. इस कीट का प्रकोप शुरू होते ही 01 किलोग्राम छोआ, 2 लीटर मैलाथियान 50 ईसी को 1000 लीटर पानी में घोलकर 15 दिनों के अन्तराल पर दो बार छिड़काव आसमान साफ रहने पर करें.
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