ePaper

माॅनसून की अनिश्चितता के बीच भी किसानों ने धान की खेती में झोंकी ताकत

Updated at : 20 Jun 2024 12:04 AM (IST)
विज्ञापन
माॅनसून की अनिश्चितता के बीच भी किसानों ने धान की खेती में झोंकी ताकत

मॉनसून की अनिश्चितता के बीच भी किसानों ने धान की खेती में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.किसान धान की खेती के लिये नर्सरी में धान का बिचड़ा गिराना शुरू कर दिये हैं, किसानों ने अबतक 18 प्रतिशत धान का बिचड़ा गिराया है,

विज्ञापन

समस्तीपुर : मॉनसून की अनिश्चितता के बीच भी किसानों ने धान की खेती में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.किसान धान की खेती के लिये नर्सरी में धान का बिचड़ा गिराना शुरू कर दिये हैं, किसानों ने अबतक 18 प्रतिशत धान का बिचड़ा गिराया है, हालांकि, यह अभी लक्ष्य से काफी दूर है. लेकिन, मौसम के प्रतिकूल रहने के बाद भी किसान हिम्मत दिखा रहे हैं. जिला कृषि विभाग के द्वारा भी धान की खेती का लंबा चौड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है. खरीफ 2024 में कृषि विभाग के द्वारा 76666.15 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिये 7558.1 हेक्टेयर में धान का बिचड़ा गिराने का लक्ष्य है. हालांकि, किसानों को धान की खेती पूरी तरह अपने संसाधनों के भरोसे ही करनी होती है. मौसम अगर मेहरबान नहीं होता है तो उन्हें सिंचाई के लिये बहुत अधिक परेशानी का सामाना करना पड़ता है. जिले में सिंचाई के लिये कोई माकूल सरकारी व्यवस्था नहीं है. वहीं, नहर की भी व्यवस्था नहीं है. किसान एक मात्र भूमिगत जल स्रोत के जरिये ही खेतों की सिंचाई कर पाते हैं. भूमिगत जल का लेयर बहुत अधिक नीचे चले जाने के बाद उन्हें भूमिगत जल से सिंचाई में भी परेशानी होती है. इसके बावजूद किसान हर साल कृषि विभाग के लक्ष्य को पूरा करने के लिए जी तोड़ मेहनत करते हैं. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के द्वारा किसानों के लिए जारी सुझाव में कहा गया है कि किसान अल्प अवधि वाले धान की किस्म एवं सुगंधित धान का बिचड़ा बीजस्थली में 20 जून से 10 जुलाई तक बोने के लिये अनुशंसित है. सुगंधित किस्मों का बिचड़ा बीजस्थली में पहले से गिराने से उसकी सुगंध खत्म हो जाती है. जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो वैसे किसान धान का बीज नर्सरी में प्राथमिकता से गिरावें. मध्यम अवधि के लिये संतोष, सीता, सरोज, राजश्री, प्रभात, राजेन्द्र सुवासनी, राजेन्द्र कस्तुरी, राजेन्द्र भगवती, कामिनी, सुगंधा किस्में अनुशंसित है. एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपाई हेतु 800-1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बीज गिराएं. नर्सरी में क्यारी की चौड़ाई 1.25-1.5 मीटर तथा लंबाई सुविधानुसार रखें. बीज को बाविस्टिन 2 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से मिलाकर बीजोपचार करें. 10 से 12 दिनों के बिचड़े वाली नर्सरी से खर-पतवार निकालें.लम्बी अवधि के धान की रोपनी के लिये खेतों की मेड़ तैयार कर लें. रोपाई के समय लम्बी अवधि की किस्मों के लिये 30 किलोग्राम नेत्रजन, 60 किलोग्राम स्फुर तथा 30 किलोग्राम पोटास के साथ 25 किलोगाम जिंक सल्फेट या 15 किलोग्राम प्रति हेक्टर चिलेटेड जिंक का व्यवहार करें. रोपे हुए धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के कार्य को प्राथमिकता दें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन