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Samastipur News:परीक्षा ही नहीं पढ़ाई के भी दबाव से उबरेंगे स्कूली बच्चे

Updated at : 22 Jun 2025 6:15 PM (IST)
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Samastipur News:परीक्षा ही नहीं पढ़ाई के भी दबाव से उबरेंगे स्कूली बच्चे

स्कूलों में नए पाठ्यक्रम के लागू होने के साथ सिर्फ परीक्षा ही नहीं बल्कि पढ़ाई का भी पैटर्न बदल जायेगा. जिसका मुख्य फोकस बच्चों को पढ़ाई के बेवजह के दबाव से राहत देना है.

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Samastipur News:समस्तीपुर :

स्कूलों में नए पाठ्यक्रम के लागू होने के साथ सिर्फ परीक्षा ही नहीं बल्कि पढ़ाई का भी पैटर्न बदल जायेगा. जिसका मुख्य फोकस बच्चों को पढ़ाई के बेवजह के दबाव से राहत देना है. यही वजह है कि स्कूलों के लिए जो नया नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) तैयार किया गया है, उसमें स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों के लिए वैश्विक मानकों के आधार पर पढ़ाई के घंटे भी निर्धारित किये गये हैं. इसके तहत स्कूलों में हफ्ते में अब सिर्फ 29 घंटे ही पढ़ाई होगी. इसमें सोमवार से शुक्रवार तक पांच से साढ़े पांच घंटे की और महीने के दो शनिवार को कुछ घंटे की ही पढ़ाई होगी. दो शनिवार को छुट्टी रहेगी. स्कूलों में पढ़ाई के लिए प्रस्तावित इस नए शेड्यूल में बच्चों को प्रत्येक स्तर पर पढ़ाई के दबाव से राहत देने की कोशिश की गई है. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत तैयार किये गये इस नये एनसीएफ में प्रमुख विषयों की कक्षाओं को छोड़ दें तो प्रत्येक स्टेज पर कक्षाओं का समय अधिकतम 35 मिनट तक ही रखा गया है. प्रमुख विषयों से जुड़ी कक्षाओं के लिए प्रत्येक स्टेज के अनुसार 40 से 50 मिनट तक का समय निर्धारित किया गया है. इस दौरान पूरी पढ़ाई को रूचिकर और दबाव मुक्त बनाने के लिए स्कूलों में हर दिन खेल, प्रतिस्पर्धा और आर्ट जैसी गतिविधियां आयोजित होगी, जो पढ़ाई के घंटों में ही आयोजित होगी. इन गतिविधियों के लिए औसतन हर दिन होने वाली पढ़ाई के घंटे में से आधा समय दिया जायेगा. इसके साथ ही स्कूल समय में ही बच्चों को ब्रेकफास्ट और लंच के लिए भी करीब घंटे भर का समय तय निर्धारित किया गया है.

– स्कूलों में हफ्ते में 29 घंटे ही होगी पढ़ाई

एनसीएफ के तहत स्कूलों में पढ़ाई के घंटे निर्धारित करने की यह पहल तब की गई है, जब अभी तक स्कूलों का कुछ ऐसा व्यस्त शेड्यूल देखने को मिल रहा था, जिसमें बच्चों को स्कूलों में दाखिल होने के बाद पूरे समय पढ़ाई में ही डूबे रहना होता है. लेकिन अब वह इस नई व्यवस्था के बाद दबाव मुक्त होकर पढ़ सकेंगे. इस व्यवस्था में प्रत्येक कक्षा के बाद पांच मिनट का ब्रेक भी रखा गया है. एनसीएफ ने स्कूली बच्चों को पढ़ाई से बोझ से राहत सिर्फ यहीं तक नहीं दी है बल्कि साल में उनके लिए दस दिन ऐसे तय कर दिए है, जिसमें उन्हें बगैर बस्ते के स्कूल आना होगा. इन दौरान बच्चों को किताबों की जगह मौखिक और प्रयोगों के जरिए पढ़ाया जायेगा. इस दौरान साल में स्कूलों में सिर्फ 180 दिन ही कक्षाएं लगेगी. एनसीएफ के तहत साल में वैसे भी राष्ट्रीय अवकाश सहित ग्रीष्म व शीतकालीन छुट्टियां आदि के चलते स्कूल 220 दिन ही खुलते है. इनमें से 20 दिन परीक्षाओं और 20 दिन स्कूलों में संचालित होने वाली अलग-अलग गतिविधियों में चले जाते है. ऐसे में पढ़ाई सिर्फ 180 घंटे ही होती है. इसके आधार पर पढ़ाई की पूरा शेड्यूल निर्धारित किया है. गौरतलब है कि एनसीएफ में छात्रों को परीक्षा के दबाव से राहत देने की भी पहल की गई है. इसके तहत बोर्ड परीक्षाओं को साल में दो बार आयोजित करने का प्रस्ताव किया गया है.नई शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन के संबंध में, यह सच है कि कई विद्यालय अभी भी पूरी तरह से तैयार नहीं हैं. तैयारी में कमी के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शिक्षकों का प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे में सुधार, और संसाधनों की उपलब्धता शामिल हैं. हालांकि, सरकार और शिक्षाविद इस दिशा में काम कर रहे हैं ताकि छात्रहित में लागू हो सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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KRISHAN MOHAN PATHAK

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By KRISHAN MOHAN PATHAK

KRISHAN MOHAN PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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