ढाई करोड़ खर्च, फिर भी बदहाल खुदनेश्वर धाम का शिवगंगा, गंदगी से परेशान श्रद्धालु

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खुदनेश्वर धाम शिवगंगा में फैली कचड़ा

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ऐतिहासिक खुदनेश्वर धाम का शिवगंगा सरोवर इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सरोवर गंदगी, कचरे और दुर्गंध से जूझ रहा है, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हो रही है.

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Khudneshwar Dham Shiv Ganga: मोरवा प्रखंड स्थित ऐतिहासिक खुदनेश्वर धाम का शिवगंगा सरोवर इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. कभी धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा यह सरोवर अब गंदगी, कचरे और दुर्गंध से जूझ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शिवगंगा की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है. इससे न केवल श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि पर्यटन की संभावनाओं को भी बड़ा झटका लग रहा है.

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गंदगी और कचरे से बदहाल हुआ शिवगंगा

स्थानीय लोगों के अनुसार पूरे मोरवा बाजार और हाट का कचरा शिवगंगा में फेंका जा रहा है. चारों ओर गंदगी का अंबार लगा है और सरोवर का पानी पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है. हालात ऐसे हैं कि श्रद्धालु अब इसमें स्नान तो दूर, पानी को छूना भी पसंद नहीं करते. गंदगी से उठने वाली दुर्गंध के कारण आसपास बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है.

ढाई करोड़ खर्च के बाद भी नहीं बदली तस्वीर

बताया जाता है कि वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सेवा यात्रा के दौरान खुदनेश्वर धाम पहुंचकर शिवलिंग और खुदनी बीवी की मजार पर पूजा-अर्चना की थी. उस दौरान इस स्थल को पर्यटन के नक्शे पर प्रमुख स्थान दिलाने और इसके विकास की घोषणा की गई थी. इसके बाद करीब ढाई करोड़ रुपये भी खर्च किए गए, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास के बजाय स्थिति और खराब हो गई.

हिंदू-मुस्लिम एकता की अनोखी मिसाल

खुदनेश्वर धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां एक ही गर्भगृह में भगवान शिव का शिवलिंग और खुदनी बीवी की मजार स्थित है. इसे हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है. इस अनोखी विरासत को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं, लेकिन शिवगंगा की बदहाल स्थिति देखकर उन्हें निराश लौटना पड़ता है.

सावन में लाखों श्रद्धालुओं का होता है आगमन

सावन महीने में हर दिन बड़ी संख्या में कांवरिया और श्रद्धालु खुदनेश्वर धाम पहुंचते हैं. धार्मिक मान्यता है कि शिवगंगा में स्नान करने के बाद भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. लेकिन वर्तमान में सरोवर का पानी इतना गंदा हो चुका है कि श्रद्धालु उसमें स्नान करने से बचते हैं.

मंदिर प्रबंधन ने उठाई जीर्णोद्धार की मांग

मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष इंद्रदेव शर्मा ने कहा कि सांसद, मंत्री और विधायक समय-समय पर शिवगंगा के जीर्णोद्धार के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. उनका कहना है कि यदि समय रहते शिवगंगा की सफाई और पुनर्जीवन का काम नहीं हुआ तो यह ऐतिहासिक धरोहर अपनी पहचान खो सकती है.

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