Bihar/Samastipur News:फरवरी में लाएं खीरा-लौकी, बाजार में पाएं मनचाहा दाम: किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों की खास सलाह

Author Prem kumar
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Bihar/Samastipur News:फरवरी में लाएं खीरा-लौकी, बाजार में पाएं मनचाहा दाम: किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों की खास सलाह

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, गरमा सब्जियों की अगेती खेती किसानों की तकदीर बदल सकती है. डॉ. धीरू कुमार तिवारी बताते हैं कि लो-टनल और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर यदि किसान सीजन से पहले बाजार में सब्जियां लाते हैं, तो उन्हें सामान्य से दोगुना दाम और बंपर मुनाफा मिलना तय है.

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Bihar/Samastipur News:पूसा (समस्तीपुर): कृषि के क्षेत्र में बदलती बाजार मांग और आधुनिक तकनीकों ने किसानों के लिए कमाई के नए रास्ते खोल दिए हैं. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के उद्यान विशेषज्ञ डॉ. धीरू कुमार तिवारी के अनुसार, अगर किसान परंपरागत तरीके को छोड़कर गरमा सब्जियों की अगेती खेती अपनाएं, तो वे कम समय में अपनी आय को दोगुना तक बढ़ा सकते हैं.

अगेती खेती क्यों है मुनाफे का सौदा?

आमतौर पर लौकी, खीरा, नेनुआ और करेला जैसी फसलें गर्मी के मौसम में आती हैं. लेकिन डॉ. धीरू बताते हैं कि जो किसान मार्च-अप्रैल का इंतजार करने के बजाय अपनी फसल फरवरी में ही बाजार में ले आते हैं, उन्हें सामान्य से 1.5 से 2 गुना अधिक भाव मिलता है. इस दौरान बाजार में सब्जियों की आवक कम होने के कारण प्रतिस्पर्धा घट जाती है और मांग बढ़ जाती है.

ठंड से बचाव के लिए अपनाएं ये तकनीक

अगेती खेती में सबसे बड़ी चुनौती जनवरी की कड़ाके की ठंड और पाला है. इससे निपटने के लिए विशेषज्ञ निम्नलिखित सुझाव देते हैं:

लो-टनल तकनीक:

प्लास्टिक टनल के माध्यम से फसलों को पाले से बचाया जा सकता है.

प्रो-ट्रे नर्सरी:

सीधे खेत में बीज बोने के बजाय प्लास्टिक प्रो-ट्रे में कोकोपीट का इस्तेमाल कर पॉलीहाउस के अंदर पौध तैयार करें. इससे बीजों का अंकुरण 100% तक होता है.

सही समय पर रोपाई:

फरवरी के मध्य में जब तापमान थोड़ा बढ़ने लगे, तब इन पौधों को मुख्य खेत में लगाएं.

उत्पादन बढ़ाने के आधुनिक तरीके

बेहतर गुणवत्ता और अधिक पैदावार के लिए डॉ. धीरू ने किसानों को कुछ खास टिप्स दिए हैं:

मल्चिंग फिल्म:

खेत की तैयारी के समय गोबर की खाद के साथ मल्चिंग फिल्म का उपयोग करें. इससे मिट्टी की नमी बनी रहेगी और खरपतवार की समस्या नहीं होगी.

मचान विधि:

चूंकि ये बेल वाली फसलें हैं, इसलिए बांस और तार के सहारे इन्हें ऊपर चढ़ाएं. इससे फल जमीन के संपर्क में नहीं आते और उनकी चमक व गुणवत्ता बनी रहती है.

ड्रिप सिंचाई:

कम पानी में अधिक पैदावार के लिए ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) सबसे कारगर है.

लंबी अवधि तक मिलेगी कमाई

अगेती खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब पारंपरिक खेती करने वाले किसानों की फसल में फूल आ रहे होते हैं, तब अगेती फसल बाजार में बिकने के लिए तैयार होती है. इससे किसानों को न केवल शुरुआती ऊंचा दाम मिलता है, बल्कि उनकी फसल की तुड़ाई की अवधि भी लंबी रहती है, जिससे कुल उत्पादन और मुनाफा दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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