स्कूल व कॉलेजों में लगाये जायेंगे निर्भीक बॉक्स

Published at :03 Apr 2017 6:28 AM (IST)
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स्कूल व कॉलेजों में लगाये जायेंगे निर्भीक बॉक्स

समस्तीपुर : छात्राओं के लिए अच्छी खबर है. शिक्षण संस्थानों में किसी छात्र अथवा शिक्षक की आप पर बुरी नजर है, राह चलते किसी ने अभद्र व्यवहार किया है तो अब आपको थाने जाने की जरूरत नहीं है. आप स्कूल व कॉलेजों में लगे निर्भीक बॉक्स में चुपचाप शिकायती पत्र डाल सकते हैं. महिला थाने […]

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समस्तीपुर : छात्राओं के लिए अच्छी खबर है. शिक्षण संस्थानों में किसी छात्र अथवा शिक्षक की आप पर बुरी नजर है, राह चलते किसी ने अभद्र व्यवहार किया है तो अब आपको थाने जाने की जरूरत नहीं है. आप स्कूल व कॉलेजों में लगे निर्भीक बॉक्स में चुपचाप शिकायती पत्र डाल सकते हैं. महिला थाने की पुलिस उक्त आवेदनों को बॉक्स से निकाल कर मामले की जांच उपरांत कार्रवाई करेगी. छात्राओं की पहचान को गुप्त रखा जायेगा. हालांकि, इसके लिए अभी थोड़ा इंतजार करना होगा. बिहार पुलिस बहुत ही जल्द जिले के सभी स्कूल व कॉलेजों में निर्भीक बॉक्स लगाने जा रही है.

उपरोक्त जानकारी रविवार को पुलिस अधीक्षक नवल किशोर सिंह ने कलेक्ट्रेट में पास्को व सीजीआरसी को लेकर आयोजित पुलिस पदाधिकारियों की एक दिवसीय ट्रेनिंग में दी. उन्होंने कहा कि स्कूल व कॉलेजों में छात्राओं के साथ होने वाले अपराध को रोकने के लिए महिला पुलिस जागरूकता अभियान चलायेगी. महिला पुलिस पदाधिकारी स्कूल व काॅलेजों में जाकर छात्राओं को ऑनलाइन शिकायत करने का तरीका के अलावा निर्भीक बॉक्स की जानकारी देंगी.
कार्यशाला के दौरान एसपी के अलावा बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष तेजपाल सिंह, चारों डीएसपी, इंस्पेक्टर व सभी थानों के थानाध्यक्ष उपस्थित थे.
ऑनलाइन शिकायत की जांच में परेशानी की दी गयी जानकारी
कार्यशाला के दौरान पुलिस पदाधिकारियों को बताया गया कि ऑनलाइन शिकायत की जांच में क्या-क्या परेशानी हो रही है और उसका निदान कै से होगा. ट्रेनरों ने बताया कि ऑनलाइन पर की गयी शिकायत अगले दस मिनट में संबंधित थाना को पहुंच जाता है. थानाध्यक्ष को दो घंटा के अंदर आवेदन पर कार्रवाई कर लौटाना है.
नहीं तो उक्त आवेदन अपने आप डीएसपी के पास पहुंच जायेगी. वहां से एसपी व फिर डीआइजी के पास. ट्रेनरों ने बताया कि ऑनलाइन शिकायत में थाना क्षेत्र की जानकारी नहीं होती है. इससे आवेदन के निष्पादन में पुलिस को परेशानी हो रही है. थानाध्यक्ष उक्त आवेदन को संबंधित थाने को सेंड करते हैं, तो वह संबंधित थानाध्यक्ष के पास आवेदन नहीं पहुंच पाता है. ट्रेनिंग के दौरान पुलिस पदाधिकारियों को जांच की प्रक्रिया कर जवाब देने की जानकारी दी गयी.
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