पानी खत्म होते चढ़ गया खून

Published at :06 Mar 2017 6:14 AM (IST)
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पानी खत्म होते चढ़ गया खून

सदर अस्पताल. स्लाइन हटाने को िगड़गिड़ाते रहे परिजन, सोती रही नर्स समस्तीपुर : सदर अस्पताल की सीरत बदहाल है. यहां मरीजों की उचित देखभाल भगवान भरोसे. परिजन यदि सचेत न रहें, तो माजरा कब बदल जाये कहना मुश्किल. ऐसा ही कुछ शनिवार की रात यहां हुआ. सुबह जब परिजनों ने आपत्ति जतायी तो ए ग्रेड […]

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सदर अस्पताल. स्लाइन हटाने को िगड़गिड़ाते रहे परिजन, सोती रही नर्स

समस्तीपुर : सदर अस्पताल की सीरत बदहाल है. यहां मरीजों की उचित देखभाल भगवान भरोसे. परिजन यदि सचेत न रहें, तो माजरा कब बदल जाये कहना मुश्किल. ऐसा ही कुछ शनिवार की रात यहां हुआ. सुबह जब परिजनों ने आपत्ति जतायी तो ए ग्रेड स्टाफ आॅन ड्यूटी नर्स उदिता ने टका सा जवाब दिया. जच्चा को कुछ हुआ नहीं न. फिर क्यों शोर मचा रहे हैं. इससे खार खाये परिजनों ने जब डीएस से इसकी शिकायत की, तो वे खुद असहज प्रतीत हुए.

बताते चलें कि कर्पूरीग्राम निवासी कुमार शिवानंद की पत्नी को शनिवार की देर संध्या प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भरती कराया गया. इमरजेंसी में एक मात्र संविदा पर नियुक्त सेवानिवृत्ति कर्मी पशुपति तैनात थे. रजिस्ट्रेशन के बाद गर्भवती को लेबर रूम ले जाया गया. जहां जांच पड़ताल के बाद चिकित्सक ने वार्ड में भेज स्लाइन चढ़ाने का निर्देश दिया. बकौल परिजन पानी लगाने के बाद दोबारा महिला का हाल जानने तो दूर, कोई झांकने नहीं आया. इस बीच स्लाइन में पानी समाप्त होने की स्थिति भांप कर परिजन नर्स कक्ष में ऑन ड्यूटी नर्स उदिता से इंट्राकैट हटाने के लिए अनुरोध करते रहे, लेकिन वह कमरे का दरवाजा बंद कर सोयी रही.

इधर, देखते-देखते जच्चा की नस से खून निकल कर वापस स्लाइनसेट में भरने लगा. इसे देखते ही परिजनों की बीच अफरातफरी मच गयी. इस बीच परिजनों ने जाकर फिर से नर्स को अनुरोध किया, लेकिन नर्स नहीं आयी. इधर, महिला के साथ आये उसके परिजनों में से एक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए नस से इंट्राकैट निकाल दिया. इसके बाद लोगों की जान में जान आयी. रविवार की सुबह जब इसकी शिकायत लेकर परिजन उक्त आॅन ड्यूटी नर्स के पास पहुंचे, तो

उल्टे नर्स ने उनकी क्लास लेते हुए टका सा जवाब दिया कि जच्चा को जब कुछ हुआ नहीं तो शोर क्यों मचा रहे हैं. इसके बाद परिजनों की शिकायत पर पहुंचे डीएस डाॅ एएन शाही नर्स से कुछ सवाल करते इससे पहले ही नर्स ने उन्हें ड्यूटी को लेकर खरी खोटी सुनानी शुरू कर दी. यहां की व्यवस्था भांप कर जच्चा के परिजन अपने मरीज को सदर अस्पताल से सुरक्षित ले जाने के लिए समय की प्रतीक्षा में हैं. वे व्यवस्था को लेकर बार बार अस्पताल प्रशासन व सरकार को कोस रहे थे.
सूरत बदलती, सीरत नहीं : अस्पताल मौजूद मरीजों और उनके परिजनों का सीधा-सीधा कहना था कि सरकारी प्रयास से करोड़ों खर्च के बाद सूरत बदल गयी है, लेकिन यहां की वर्तमान व्यवस्था पहले से बदतर हो गयी है. एक समय था जब यहां की व्यवस्था सूबे में दूसरे पायदान पर हुआ करती थी आज ना जाने हालात कैसे हैं कि यहां दवा व जांच के लिए मरीजों को भटकना पड़ता है. कुछ सालों में सदर अस्पताल में रंगरोगन से लेकर आधुनिक चिकित्सा के उपकरण लगे तो नर्स और डाॅक्टरों का मरीज के प्रति लापरवाही में भी उसी हिसाब से इजाफा हुआ है.
डीएस ने मांगी लिखित शिकायत
परिजनों की शिकायत पर डीएस डाॅ एएन शाही ने उन्हें इसकी लिखित शिकायत करने का अनुरोध किया. यदि परिजन लिखित दें, तो संबंधित कर्मी से इसको लेकर सवाल जवाब किया जायेगा. बताया जा रहा है कि जच्चा के परिजन विभागीय उलझ को ध्यान में रख कर इसकी लिखित शिकायत करने से परहेज कर रहे हैं. दूसरी ओर अस्पताल कर्मियों की मानें, तो सदर अस्पताल की स्थिति दिनोंदिन बदतर होती जा रही है. इसके पीछे का कारण सीएस और डीएस के बीच का विवाद बताया जा रहा है. अस्पताल उपाधीक्षक होने के बावजूद डीएस की बात को डाॅक्टर व नर्स नहीं मानते हैं.

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