विश्वजननी मूल प्रकृति हैं मां कूष्माण्डा

समस्तीपुर : मां कुष्माण्डा को वेदों में विश्वजननी बताया गया है. मूल प्रकृति ईश्वरी होने के कारण यह आदि माता है. नवरात्र के पांचवें दिन मंदिरों व पूजा पंडालों में मां कूष्माण्डा की पूजा अर्चना की गयी. मान्यता अनुसार, मां इतनी शक्तिशाली है कि हंसी हंसी में ब्रह्माण्ड की रचना कर डालती हैं. सिंह पर […]
समस्तीपुर : मां कुष्माण्डा को वेदों में विश्वजननी बताया गया है. मूल प्रकृति ईश्वरी होने के कारण यह आदि माता है. नवरात्र के पांचवें दिन मंदिरों व पूजा पंडालों में मां कूष्माण्डा की पूजा अर्चना की गयी. मान्यता अनुसार, मां इतनी शक्तिशाली है कि हंसी हंसी में ब्रह्माण्ड की रचना कर डालती हैं. सिंह पर सवार मां कुष्मांडा सूर्य लोक में निवास करती है. माता अष्टभुजा धारी है. साथ ही मां के एक हाथ में अमृत कलश भी है. नवरात्र के चौथे दिन इन्हें मालपुए का नवैध लगाया जाता है.
मनुष्य अपने जीवन की परेशानियों को दूर करके सुख व समृद्धि की याचना मां से करते हैं. मंदिरों में इस अवसर पर माता की विशेष पूजा अर्चन की गयी. सुबह सवेरे मां का सप्तशती पाठ के अनुष्ठान से पूजा की गयी. शाम होते ही मंदिरों में विशेष संध्या वंदन के लिये लोगों की भीड़ उमड़ पड़ रही है. विशेषकर महिलाओं व युवतियों मंदिरों में संध्या दीपक माता को अर्पण करने पहुंचाते हैं. शहर के बस स्टैंड, कचहरी परिसर, गुदरी बाजार आदि जगहों पर तो अभी से ही मेला लगने लगा है.
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