गंदगी से लोग हो रहे बीमार लापरवाही. फेंका जा रहा मेडिकल कचरा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Oct 2016 5:09 AM (IST)
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अधिकांश अस्पताल, नर्सिंग होम व जांच लैब के पास नहीं है कचरा निस्तारण की व्यवस्था समस्तीपुर : चिकित्सकीय संस्थानों की छोटी-छोटी लापरवाही शहरवासियों पर भारी पड़ सकती है. अस्पताल, नर्सिंग होम एवं जांच लैब द्वारा फेंके गये बायो मेडिकल कचरे दूषित रूई, कॉटन, पट्टी, ब्लड बैग, सीरिंज, आइवी सेट, ट्यूब, कांच और प्लास्टिक की बोतल […]
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अधिकांश अस्पताल, नर्सिंग होम व जांच लैब के पास नहीं है कचरा निस्तारण की व्यवस्था
समस्तीपुर : चिकित्सकीय संस्थानों की छोटी-छोटी लापरवाही शहरवासियों पर भारी पड़ सकती है. अस्पताल, नर्सिंग होम एवं जांच लैब द्वारा फेंके गये बायो मेडिकल कचरे दूषित रूई, कॉटन, पट्टी, ब्लड बैग, सीरिंज, आइवी सेट, ट्यूब, कांच और प्लास्टिक की बोतल ब्लेड, सर्जिकल औजार से लोगों को हेपेटाइटिस बी, टिटनेस, एड्स एवं अन्य संक्रमण से फैलने वाली बीमारियों का शिकार बना सकती है. शहर के कई मोहल्लों की सड़कें, गड्ढ़ानुमा खेत एवं फुटपाथ इन चिकित्सकीय संस्थानों के कचरे से पटे हुए हैं.
शहर में इन बायो मेडिकल कचरों के निस्तारण की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है. हालांकि, सरकार इसको लेकर गंभीर जरूर है. इन कचरों के निस्तारण का जिम्मा मुजफ्फरपुर की एक मेडिकेयर एजेंसी को सौंपा गया है. सप्ताह में एक दिन शहर के गिने चुने सरकारी एवं निजी अस्पतालों के कचरे का ही उठाव करती है और उसे निस्तारण के लिए मुजफ्फरपुर ले जाती है. सड़क किनारे पड़े इन
कचरे को नगर परिषद उठाता है या यूं ही गड्ढ़े नालियों व खेतों में ये जमा होते जा रहे हैं.
नियमानुकूल नहीं जमा होता कचरा : सरकारी अस्पतालों में भी नियमानुकूल इन कचरों को इक्ट्ठा नहीं किया जाता है. अस्पताल कर्मियों में जानकारी का अभाव साफ दिखता है. सुरक्षात्मक दृष्टि से बायो मेडिकल कचरे को सामान्य कूड़े या घरों से निकलने वाले कूड़े से अलग इकट्ठा किया जाना चाहिए. मेडिकल कचरे को तीन तरह से अलग किया जाता है. शरीर के अंग, खून, दूषित रुई व पट्टी को पीले बॉक्स में डाला जाता है. ब्लड बैग, सीरिंज, आइवी सेट, ट्यूब को लाल रंग के बॉक्स व कांच की बोतल व स्लाइड के लिए नीले रंग का बॉक्स होता है. इस कूड़े के लिए निर्धारित व्यवस्था होने के बावजूद कर्मचारी गंभीरता नहीं बरतते हैं.
होगी कार्रवाई
बायो मेडिकल कचरे के निस्तारण का जिम्मा मुजफ्फरपुर की एक एजेंसी के पास है. उसके द्वारा ही जिले से इन कचरों का उठाव किया जा रहा है. इसके लिए निजी अस्पतालों को भी अनुबंध करवाना होगा. ऐसा नहीं करनेवालों के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी.
डॉ अवध कुमार, सिविल सर्जन, समस्तीपुर
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