क्रांतिकारियों ने मारी थी अंगरक्षक को गोली

Published at :08 Aug 2015 7:23 AM (IST)
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क्रांतिकारियों ने मारी थी अंगरक्षक को गोली

विद्यापतिनगर : आजादी की लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने के लिये युवा क्रांतिकारियों के एक दल ने फिरंगी सरकार के दरभंगा जिले के तहसीलदार विद्यापतिनगर के कष्टहारा गांव निवासी रामधारी तिवारी के घर डकैती डाली़ युवा क्रांतिकारियों के दल में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य शामिल थ़े इसकी पुष्टि तत्कालीन दरभंगा जिला के […]

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विद्यापतिनगर : आजादी की लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने के लिये युवा क्रांतिकारियों के एक दल ने फिरंगी सरकार के दरभंगा जिले के तहसीलदार विद्यापतिनगर के कष्टहारा गांव निवासी रामधारी तिवारी के घर डकैती डाली़
युवा क्रांतिकारियों के दल में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य शामिल थ़े इसकी पुष्टि तत्कालीन दरभंगा जिला के कलेक्टर एमजे डिक्सन ने 13 नवंबर 1928 में की थी़ स्वतंत्रता आंदोलन की इस घटना को सुन आज भी लोग रोमांचित हो जाते हैं. 1928 ई़ की यह घटना आज भी यहां सूकून देती है़ हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य ने धन के लिये कष्टहारा निवासी खानमिर्जापुर कोठी के तहसीलदार रामधारी तिवारी के 9 नवंबर 1928 को लूट व डकैती की घटना को अंजाम दिया था़
इसमें शामिल क्रांतिकारियों की पहचान उनके लिबास व बोल चाल की भाषा से की गयी थी़ जिन्हें आगे चलकर शहीद ए आजम सरदार भगत सिंह, योगेंद्र शुक्ल, राम विनोद सिंह, टी. परमानंद, बैकुंठ शुक्ल सहित दो दर्जन क्रांतिकारियों के रुप में की गयी़ घटना का विरोध कर रहे रामधारी तिवारी के सुरक्षा गार्ड स्थानीय रंगी सिंह एवं उनके एक रिश्तेदार रघुनंदन तिवारी क्रांतिकारियों के अनचाहे फायरिंग में मारे गये थ़े तब महिलाओं के शोर- शराबे पर एक पंजाबी युवक ने कहा था माताजी हम डाकू नहीं हैं
हमें देश को आजाद कराने के लिये थोड़ा सा धन चाहिए़ इस डकैती की योजना शाहपुर पटोरी के चकसलेम गांव में बनी थी़ इस गांव के टी परमानंद तहसीलदार रामधारी तिवारी के भतीजा थ़े दादा बटेश्वर तिवारी ब्रिटिश नील उत्पादक कंपनी इंडिगो में काम करते थ़े जब प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई छिड़ी तब इंडिगो कंपनी पलायन कर शाहपुर पटोरी आया था़
सन 1908 के आसपास इंडिगो कंपनी ने बटेश्वर तिवारी के पुत्र रामधारी तिवारी को खानमिर्जापुर कोठी का तहसीलदार नियुक्त किया था़ इस परिवार के कुछ सदस्य अंग्रेजों के खिदमतगार थे तो कुछ क्रांतिकारी गतिविधियों को मुकाम दिलाने में जुटे थ़े टी. परमानंद इनमें से सक्रिय सदस्य थ़े सन 1928 में क्रांतिकारियों की बैठक परमानंद के घर हुई़ इसमें आजादी की कमजोर पड़ रही लड़ाई के लिये धन जुटाने पर विचार हुआ.
तब परमानंद के कहने पर रामधारी तिवारी के घर डकैती की योजना बनी. 9 नवंबर 1928 की रात क्रांतिकारियों के इस दल ने डकैती की योजना को मूर्त रुप दिया़ इसमें भारी नकदी लूटे जाने की शिकायत तत्कालीन कलेक्टर एमजे डिक्सन से तहसीलदार रामधारी तिवारी ने की थी़
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