जिले में 49 प्रतिशत बच्चे बौनेपन की समस्या से ग्रसित
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 10 Jun 2024 11:39 PM
पोषण के नाम पर सरकार के द्वारा हर माह करोड़ों रुपये खर्च किये जाते हैं. कुपोषण दूर करने के लिये लगातार कोशिशें की जा रही है. हर वर्ष सितंबर में पोषण माह मनाया जाता है.
समस्तीपुर : पोषण के नाम पर सरकार के द्वारा हर माह करोड़ों रुपये खर्च किये जाते हैं. कुपोषण दूर करने के लिये लगातार कोशिशें की जा रही है. हर वर्ष सितंबर में पोषण माह मनाया जाता है. बाल विकास परियोजना विभाग के द्वारा बच्चों में बौनेपन की समस्या दूर करने के लिये अभियान के तहत विशेष मॉनिटरिंग की जाती है. फिर भी कुपोषण का शिकार होकर बच्चे शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर हो रहे हैं.जिले में कुपोषण एक गंभीर समस्या बनी हुई है. प्रावधान के मुताबिक आइसीडीएस विभाग के द्वारा बच्चों का नियमित वजन कराया जाता है, उनकी ऊंचाई मापी जाती है. इसके बावजूद जिले के बच्चे कुपोषण के शिकार हो रहे हैं.कुपोषण के वजन बच्चों की लंबाई कम रही है. वजन कम हो रहा हैं. जिले के बच्चों की तकरीबन आधी आबादी बौनेपन का शिकार है. आंकड़ा बताते हैं जिले में हर दूसरा बच्चा बौनेपन का तथा हर तीसरा बच्चा कम वजन का शिकार है. जिले में 49 प्रतिशत बच्चे बौनेपन के शिकार है. वहीं 30 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के कारण कम वजन के शिकार हैं. कुपोषण के कारण बच्चे कई की बीमारियों का भी शिकार हो रहे हैं. इसके साथ ही उम्र के हिसाब से उनकी लंबाई नहीं बढ़ रही. वजन भी लंबाई व उम्र के अनुपात में कम है. इसमें गरीब और ग्रामीण क्षेत्र के अलावा कुछ शहरी क्षेत्र के बच्चे भी शामिल है.अधिसंख्य अभिभावक बच्चों की इस समस्या से अनभिज्ञ हैं. गरीब परिवार के बच्चों को सही मात्रा में पोषण युक्त आहार उपलब्ध नहीं होने के कारण भी बच्चे उम्र के हिसाब से कम लंबाई व कम वजन के शिकार हो रहे हैं. वहीं शहरी क्षेत्रों में पौष्टिक आहार की जगह पढ़े लिखे लोग भी अपने बच्चों को चिप्स, नूडल्स, फास्टफुड खिला रहे हैं. यहीं चीजें उनके स्कूल के लंच बॉक्स में भी दिये जाते हैं. आज के बच्चे हरी सब्जी, साग, मौसमी फलों को बिल्कुल पंसद नहीं करते हैं. इस कारण उन्हें सही पोषण नहीं मिल पाता है.बच्चों के लिये जिले में 4943 आंगनबाड़ी केन्द्र चलाये जा रहे हैं. जहां बच्चों की नियमित मॉनिटरिंग व पोषण युक्त आहार उपलब्ध कराना है. जिले में शून्य से छह वर्ष के बच्चों की संख्या 388193 है. 49 प्रतिशत बच्चे बौनेपन तथा 30 प्रतिशत बच्चे कम वजन वाले हैं.शून्य से पांच वर्ष के बच्चों की संख्या 3176083 है. इसमें कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 13 है, वहीं ओवरबेट बच्चों की संख्या 8 प्रतिशत है.गर्भवती महिलाओं की संख्या 26228 है. शून्य से छह माह के बच्चों की संख्या 11852 है. 3 से 6 वर्ष के बच्चों की संख्या 238071 है.लैक्टिक माताओं की संख्या 16692 है. छह माह से तीन वर्ष के बच्चों की संख्या 167314 है.
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