फोटो संख्या : 8समस्तीपुर. जैसे जैसे वक्त गुजर रहा है, त्रासदी के दहशत में डूबे लोगों के चेहरे पर मुस्कान फिर से दिखने लगी है. जिन लोगों ने इस भूकंप में अपनों को खोया है, उनके नुकसान की भरपाई तो नहीं हो सकती है. प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने व दर्द बांटने में सभी समुदाय के लोग शिद्दत के साथ जुट गये हैं. दो दर्जन से अधिक भूकंप के झटकों को झेल चुके जिले में जिंदगी फिर से पटरी पर धीरे-धीरे आने लगी है. सरकारी कार्यालयों में बातचीत के दौरान भूकंप से संबंधित बातें तो केंद्रित थी ही, लेकिन कुछ पल के बाद सभी अपने अपने कार्यों के निष्पादन में जुट गये. वहीं आज भी महिलाएं भूकंप के झटकों से उबर नहीं पायी है. दो दिन पूर्व तक भूकंप के खौफ से सहमे बच्चे विद्यालय बंद होने के कारण मंगलवार को अभिभावकों के द्वारा छूट दिये जाने के कारण खेल कूद में ज्यादा व्यस्त दिखे. विगत तीन दिनों तक विरान दिखने वाला रेलवे स्टेशन व बस पड़ाव परिसर में यात्रियों की रौनकता वापस लौट आयी है. वेफिक्र होकर यात्री अपने गंतव्य स्थल की ओर जा रहे हैं. भूकंप के कारण भोजपुरी सिने प्रेमियों में छायी उदासी फिर से लौट आयी है. जिले के सिनेमा हॉलों में तीन दिनों के बाद अच्छा सेल हुआ है. स्टेशन रोड में एक चाय की दुकान पर कुछ लोग प्लेट में रखे कप से चाय की चुस्की लेते हुए मजाकिया मूड में यह कह रहे थे कि हमारी कप तो प्लेट में शिफ्ट हो गयी है, भूकंप के कारण धरती की जो प्लेट अव्यवस्थित हुई थी लगता है धीरे धीरे अब वह भी सेट हो चुकी है.
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वक्त के साथ चेहरे पर दिखी मुस्कान
फोटो संख्या : 8समस्तीपुर. जैसे जैसे वक्त गुजर रहा है, त्रासदी के दहशत में डूबे लोगों के चेहरे पर मुस्कान फिर से दिखने लगी है. जिन लोगों ने इस भूकंप में अपनों को खोया है, उनके नुकसान की भरपाई तो नहीं हो सकती है. प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने व दर्द बांटने में सभी समुदाय […]
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Prabhat Khabar Digital Desk
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