श्रीविधि से दोगुणा होगा आलू का उत्पादन

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पूसा. बॉरोलॉग इंस्टीच्यूट ऑफ साउथ एशिया (वीसा) फार्म में नवीनतम तकनीक इजात कर अब आलू की खेती भी श्री विधि से संभव हो गया. संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक डा. राज कुमार जाट ने आलू के खेतों में प्रत्यक्षण के दौरान इस तकनीक से अवगत कराया. जिसमें आलू की साइज, चमक एवं रंग पर खासतौर व्याख्या […]

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पूसा. बॉरोलॉग इंस्टीच्यूट ऑफ साउथ एशिया (वीसा) फार्म में नवीनतम तकनीक इजात कर अब आलू की खेती भी श्री विधि से संभव हो गया. संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक डा. राज कुमार जाट ने आलू के खेतों में प्रत्यक्षण के दौरान इस तकनीक से अवगत कराया. जिसमें आलू की साइज, चमक एवं रंग पर खासतौर व्याख्या की. वहीं उत्पादन सामान्य रोपनी के अपेक्षा दोगुणा संभव हो पाने की दावा की. इस तकनीक के बारे में विस्तार से बताते हुए डा. जाट ने कहा कि बेड प्लांटेशन विधि से मेड़ पर मक्का एवं नाली में आलू दिया जाता है तथा आलू को मिट्टी से नहीं ढककर उसे पुआल से ढक दी जाती है. जिससे सिंचाई की आवश्यकता बिल्कुल ही नहीं पड़ता है. साथ ही पुआल पर पड़े ओस की बूंद ही आलू की फसल को विकसित बनाने में सहयोग सिद्ध होता है. हमारे फार्म में इस श्रीविधि से आलू के विभिन्न प्रभेदों में कुल पांच तरह प्रभेद लगाया गया है. जिसमें ज्योति, कंचन, अशोक, अरुण एवं लाल पीटीएस प्रभेद शामिल है.

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