वैल्यू एडेड टैक्स अदा करने का जल्द होगा सत्यापन

Published at :05 Jan 2018 4:38 AM (IST)
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वैल्यू एडेड टैक्स अदा करने का जल्द होगा सत्यापन

बेंच-डेस्क क्रय प्रकरण डीपीओ एसएसए ने 42 फर्म की सूची सत्यापन के लिए भेजी वाणिज्य कर उपायुक्त को गुणवत्ता की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम हुई थी गठित, 15 दिनों में देनी थी रिपोर्ट समस्तीपुर : वित्तीय वर्ष 2015-16 में उपस्कर की कमी को दूर करने के उद्देश्य से जिले के 985 प्रारंभिक विद्यालयों […]

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बेंच-डेस्क क्रय प्रकरण

डीपीओ एसएसए ने 42 फर्म की सूची सत्यापन
के लिए भेजी वाणिज्य कर उपायुक्त को
गुणवत्ता की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम हुई
थी गठित, 15 दिनों में
देनी थी रिपोर्ट
समस्तीपुर : वित्तीय वर्ष 2015-16 में उपस्कर की कमी को दूर करने के उद्देश्य से जिले के 985 प्रारंभिक विद्यालयों में बेंच डेस्क क्रय करने की अनुमति विभाग ने प्रदान की थी. लेकिन जिले के विद्यालयों में बेंच डेस्क खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई थी.
विद्यालयों में तय मानक की अवहेलना कर बेंच डेस्क की खरीददारी कर सरकारी राशि का दुरूपयोग किया गया था. डीपीओ एसएसए देवविंद सिंह ने इन विद्यालयों में बेंच डेस्क आपूर्ति करने वाले फर्म से संबंधित कागजात की जांच पड़ताल की तो कई खामियां उजागर हुई है. जिसका सत्यापन करने की प्रक्रिया शुरु कर दी गयी है.
डीपीओ ने बताया कि कुल 42 फर्म ने बेंच डेस्क आपूर्ति की थी. इन फर्म के द्वारा वैल्यू एडेड टैक्स अदा किया गया या नहीं इसकी सत्यता को जांचने के लिए डीपीओ ने 42 फर्म की सूची उपलब्ध कराते हुए वाणिज्य कर आयुक्त को पत्र भेज कहा है कि विभाग को राजस्व की क्षति ना हो इसके लिए सूचीबद्ध फर्म की जांच जरुरी है. सूत्रों की मानें तो सूची में कई फर्म ऐसे हैं जो सिर्फ कागजों पर ही चल रहे हैं. वहीं कुछ फर्म ऐसे भी हैं जो काम तो कुछ और करते हैं लेकिन बेंच डेस्क अन्यत्र जगह से क्रय कर विद्यालयों को मानक के अनुसार आपूर्ति नहीं की थी. इन फर्मों के द्वारा 6401889 रुपये वैट के रुप में अदा करने से संबंधित कागजात संलग्न किये थे.
गठित टीम ने अब तक नहीं सौंपी रिपोर्ट
कई विद्यालयों में कमीशन खोरी के चक्कर में बाजार से बेंच डेस्क की खरीद कर ली गई. प्रति बेंच डेस्क के लिए 3000 की राशि सुनिश्चित किया गया था, पर 71 विद्यालयों द्वारा नियमों को ताक पर रखते हुए दो दर्जन से अधिक फर्म के द्वारा बेंच डेस्क की खरीदारी की गई थी. सूत्र बताते हैं कि शिक्षा विभाग के एक वरीय अधिकारी के आदेश पर सरकारी नियमों को ताख पर रखकर बेंच डेस्क खरीदारी की गयी थी. इसके लिए मौखिक रूप से एक वरीय अधिकारी के सहयोगी एचएम से संपर्क स्थापित कर बेंच डेस्क खरीदारी करने का निर्देश देते थे. बताते चलें कि बीईपी के द्वारा मध्य व उत्क्रमित मध्य विद्यालयों के शिक्षा समिति को वित्तीय वर्ष 2014-15 में बेंच डेस्क क्रय करने के लिए करीब 6 करोड़ की राशि निर्गत की गयी थी.
डीडीसी वरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि शिक्षा समिति को तय मानक के अनरूप क्रय करने का निर्देश दिया गया था. इस क्रय की जांच जब बीइओ से करायी गयी तो 985 में से 914 विद्यालयों ने ही मानक के अनरुप बेंच डेस्क क्रय किया. जबकि 71 विद्यालयों ने मानक के अनुरूप नहीं खरीदारी की. इन विद्यालयों को बेंच डेस्क क्रय करने के लिए प्रति विद्यालय 60 हजार दिया गया था.
इसकी गुणवत्ता जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित की गयी थी. गठित टीम को 15 दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश भी दिया गया था. लेकिन गठित टीम के द्वारा अब तक जांच प्रतिवेदन नहीं सौंपा गया है जो कई प्रश्नों को खड़ा कर रहा है. गठित टीम में डीइओ, वरीय उप समाहर्त्ता, महाप्रबंधक, जिला उधोग केन्द्र व जिप के जिला अभियंता को शामिल किया गया था.
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