सॉफ्टवेयर आया नहीं, ऑनलाइन दाखिल-खारिज शुरू

Published at :04 Dec 2017 8:41 AM (IST)
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सॉफ्टवेयर आया नहीं, ऑनलाइन दाखिल-खारिज शुरू

समस्तीपुर : जिले के जितवारपुर अंचल में एक दिसंबर से ऑनलाइन दाखिल-खारिज की प्रक्रिया लागू हो गयी है. शुक्रवार को सीएम ने उक्त अंचल में ऑनलाइन दाखिल-खारिज प्रक्रिया का उद्घाटन कर दिया है. राज्य में पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह व्यवस्था सरकार द्वारा लागू की गयी है. लेकिन, सॉफ्टवेयर नहीं आने व सिस्टम अपडेट नहीं […]

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समस्तीपुर : जिले के जितवारपुर अंचल में एक दिसंबर से ऑनलाइन दाखिल-खारिज की प्रक्रिया लागू हो गयी है. शुक्रवार को सीएम ने उक्त अंचल में ऑनलाइन दाखिल-खारिज प्रक्रिया का उद्घाटन कर दिया है. राज्य में पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह व्यवस्था सरकार द्वारा लागू की गयी है. लेकिन, सॉफ्टवेयर नहीं आने व सिस्टम अपडेट नहीं होने के कारण फिलहाल ऑनलाइन दाखिल-खारिज की प्रक्रिया लंबित है.
सीओ समीर कुमार शरण की मानें तो एक-दो दिनों के अंदर पटना से सॉफ्टवेयर आते ही ऑनलाइन दाखिल खारिज शुरू किया जायेगा. जितवारपुर अंचल में कुल गांवों की संख्या 100 है. सिस्टम में इन गांवों का डाटा भी सत्यापन के बाद प्रविष्ट कर दिया गया है.
ऑनलाइन दाखिल-खारिज के लिए बना सॉफ्टवेयर : जिले में अब जमीन की ऑनलाइन दाखिल-खारिज होगा. सभी प्रखंडों में जल्द ही इसे प्रभावी कर दिया जायेगा. इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए राजस्व व भूमि सुधार विभाग इसकी उपयोगिता की जांच करेगा.
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नेशनल इन्फॉर्मेशन सेंटर ने सॉफ्टवेयर तैयार किया है.
यदि यह सॉफ्टवेयर मानकों पर खरा उतरता है, तो ऑनलाइन सभी सीओ को अंचल स्तर पर जमाबंदी के कंप्यूटरीकरण में इसे लगाने व समझने का निर्देश भी दिया गया था. फिलहाल जितवारपुर अंचल में ही ऑनलाइन दाखिल-खारिज की व्यवस्था की जायेगी. सीओ ने कहा कि सूचना व तकनीकी का उपयोग करते हुए नागरिकों को बेहतर सुविधा प्रदान करने की दिशा में यह उठाया गया कदम है.
डिजिटलाइजेशन के तहत जमीन संबंधी कार्य के लिए लोगों को कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना होगा और न ही कर्मचारियों के पास जाना होगा. लोग जमीन का दाखिल-खारिज ऑनलाइन करा सकेंगे व एक निश्चित अंतराल के बाद उनकी जमीन का दाखिल-खारिज कर दिया जायेगा.
क्या है नयी व्यवस्था
दाखिल-खारिज की नयी व्यवस्था से अब रैयतों को दाखिल-खारिज जैसे कार्यों के लिए कार्यालय व बाबुओं के यहां चिरौरी नहीं करनी पड़ेगी.
इसके तहत रैयती काउंटर पर जाकर खरीदी गयी जमीन का पूरा ब्योरा एक फार्म में भर कर देंगे, जिसमें जमीन किस तरह से खरीदी गयी है, किस कार्यालय से निबंधन हुआ है, केवाला का नंबर व तारीख के अलावा कितने रुपये में जमीन खरीद हुई है आदि जानकारी देनी होगी. इसके अलावा जमीन बेचने वालों का भी पूरा ब्योरा अंकित करना होगा. इसके बाद जमीन की चौहद्दी की जांच की जायेगी और निश्चित अवधि के अंदर जमीन का दाखिल खारिज रैयत के नाम कर दिया जायेगा.
ऑनलाइन होने से फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
ऑनलाइन की सुविधा उपलब्ध होते ही जमीन संबंधी कागजात में किये जाने वाले फर्जीवाड़ा आदि पर पूरी तरह से रोक लग जायेगी. जमीन व मकान आदि का म्यूटेशन आदि में लगने वाले समय की बचत होगी और लोगों को परेशानी से निजात मिल जायेगी.
इस सिस्टम के चालू हो जाने से जमीन के दाखिल-खारिज की स्थित क्या है, कहां पर किसने क्या रिपोर्ट दी है, किस स्तर पर दाखिल-खारिज रुका हुआ है यह सब जानकारी किसी भी साइवर कैफे या लोग अपनी मोबाइल से सर्च कर जान सकेंगे. सबसे बड़ी बात यह होगी कि उनका म्यूटेशन कहां से लंबित है उसकी स्थिति क्या है इस पर सारी जानकारी कहीं से भी ले सकेंगे.
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