सलाखों के पीछे नया सवेरा बुन रहीं महिलाएं

Published at :26 Sep 2017 5:39 AM (IST)
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सलाखों के पीछे नया सवेरा बुन रहीं महिलाएं

महिला बंदियों की जिंदगी में नयी सुबह ले आती है यहां की ट्रेनिंग समस्तीपुर : कारा अर्थात काली कोठरी जहां गुनहगारों का झुंड रहता है, लेकिन ऐसे ही एक मंडल कारा की काली कोठरी उजाले का पैगाम दे रही है़ मंडल कारा के महिला बैरक की 30 बंदियों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया गया. कारा […]

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महिला बंदियों की जिंदगी में नयी सुबह ले आती है यहां की ट्रेनिंग

समस्तीपुर : कारा अर्थात काली कोठरी जहां गुनहगारों का झुंड रहता है, लेकिन ऐसे ही एक मंडल कारा की काली कोठरी उजाले का पैगाम दे रही है़ मंडल कारा के महिला बैरक की 30 बंदियों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया गया. कारा प्रशासन द्वारा उनके लिए सिलाई मशीनों की व्यवस्था करायी गयी है़ इससे वह कारा में बंद अपनी अन्य महिला बंदियों को भी सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दे रही हैं. महिला बंदियों को मंडल कारागार में पढ़ाया भी जा रहा है़ इसके लिए अध्यापक लगायी गयी है
.
वहां यह सिलाई सीखती हैं, पढ़ती हैं. खुद को इतना मजबूत बना रही हैं. ताकि कारा से बाहर निकलने पर एक नया सवेरा लिख सकें. देर से ही सही, पर कारागार में बंद 30 महिला बंदियों को अपनी गलती पर पछतावा है़ वह वक्त तो नहीं लौटा सकतीं, पर सलाखों के पीछे वह एक नया सबेरा बुन रही हैं. इसमें से 14 महिला बंदी पूरी तरह सिलाई कढ़ाई में निपुण भी हो चुकी हैं. अब वह यहां बंद अपनी अन्य बहनों को सिलाई-कढ़ाई सिखा रही है.
हाथों में होगा स्वरोजगार का हथियार : महिला बंदियों की रिहाई में देरी भले हो, मगर इतना तय हैं कि वह बाहर आयेंगी, तो उनके हाथों में स्वावलंबन का मजबूत आधार होगा़ मंडल कारा प्रशासन का कहना है कि एक एनजीओ ने संपर्क साधा है, पर्व के बाद एक बार फिर सिलाई कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जायेगा़ तीन महिला बंदियों के साथ उनके छह बच्चे भी मौजूद हैं. उन्हें मलाल है
कि उनकी करनी की सजा उनके बच्चे भोग रहे हैं. सिलाई-कढ़ाई व पढ़ाई के जरिए वह तैयारी में हैं कि कारा से बाहर आने पर वह अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देंगी़ पिछले दो माह से वह जी जान से जुटी हैं बदलाव के लिये. स्पष्ट है कि वह मंडल कारा से बाहर निकलेंगी, तो निश्चित ही उनके हाथों में स्वरोजगार का हथियार होगा़ इससे न सिर्फ उनके जीवन में चमक पैदा होगी, बल्कि यह पैगाम आधी आबादी को जायेगा.
दुर्गा पूजा व दशहरा जैसे प्रमुख त्योहार में परिवार से दूर होने का दुख जरूर होता है, लेकिन मंडल कारा परिसर में पारिवारिक माहौल मिलने के बाद बंदियों का दर्द कुछ कम जरूर हुआ़ मंडल कारा में बंद 25 बंदी भी माता रानी की पूजा-पाठ में जुटे हैं. इनमें 21 पुरुष व चार महिला बंदी शामिल हैं. कारा प्रशासन ने बताया कि इन बंदियों के द्वारा नवरात्र में दुर्गा पाठ किया जा रहा है़ अलग-अलग वार्डों में मां दुर्गा की फोटो लगाकर पूजा अर्चना की जा रही है. इनके द्वारा शाम में आरती भी की जाती है.
महिला बंदियों को सिलाई कढ़ाई में पारंगत करने के लिए कारा प्रशासन ने हर कदम पर सहयोग किया है़ ताकि जब वह कारा से बाहर निकलें, तो उनके समक्ष रोजगार का संकट न रहे और अपराध की राह त्याग कर स्वरोजगार करें.
नंद किशोर रजक, काराधीक्षक, मंडल कारा, समस्तीपुर
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