यूजीसी का नया कानून रॉलेट एक्ट के बराबरः गौरव ठाकुर

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यूजीसी का नया कानून रॉलेट एक्ट के बराबरः गौरव ठाकुर

यूजीसी का नया कानून रॉलेट एक्ट के बराबरः गौरव ठाकुर

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सहरसा . छात्र नेता गौरव ठाकुर ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा लागू नया कानून इक्विटी रेगुलेशन एक्ट 2026 पर अपनी चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा कि यह एक्ट देश के शिक्षण संस्थानों में समरसता को भंग करेगा. इस कानून में सवर्ण वर्ग के छात्रों पर सीधे तौर पर भेदभाव किया गया है. जिससे उन्हें पहले से ही अपराधी मान लिया गया है. गौरव ठाकुर ने आशंका व्यक्त की कि इससे सवर्ण छात्र अपने ऊपर हो रहे कथित अत्याचार के खिलाफ आवाज नहीं उठा पायेंगे. उनमें हीन भावना पैदा होगी एवं शिक्षा संस्थान दूषित होंगे. उन्होंने इसे समानता के नाम पर जातीय राजनीति का बीज बोना बताया. जिससे अगली पीढ़ी एवं देश को नुकसान होगा. उन्होंने इस कानून की तुलना अंग्रेजों के शासनकाल के रॉलेट एक्ट से की है एवं इसे भयंकर बताया. छात्र नेता ने कहा कि यह कानून एक वर्ग विशेष के छात्रों को बिना किसी दोष के पहले ही अपराधी घोषित कर रहा है. उन्हें सामान्य वर्ग के बच्चों के प्रति पक्षपात एवं झूठी शिकायतों की आशंका है. उन्होंने कहा कि सवर्ण छात्रों की सुरक्षा के लिए कोई कानून नहीं होगा तो वे आत्महत्या करने या देश छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं. यह कानून सीधे तौर पर शिक्षा, नौकरियों एवं बेटियों को प्रभावित करेगा उन्होंने कहा कि देश को जातीय कानून या जातीय संरक्षण की नहीं, बल्कि समानता की आवश्यकता है.

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दीपांकर श्रीवास्तव

लेखक के बारे में

By दीपांकर श्रीवास्तव

दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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