मॉडल सदर अस्पताल में छह घंटे का ब्लैकआउट, जिम्मेदार कौन ?

Published by : Dipankar Shriwastaw Updated At : 04 Feb 2026 6:22 PM

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कोसी का पीएमसीएच कहा जाने वाला जिले का मॉडल अस्पताल बुधवार की सुबह नौ बजे से ही अंधेरे में डूबा रहा, जिससे अस्पताल की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गयी.

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पूर्व सूचना के बाद भी नहीं हुई तैयारी, जेनरेटर व्यवस्था ध्वस्त

अंधेरे में इलाज की मजबूरी, सदर अस्पताल बना मरीजों के लिए मुसीबत

नेबुलाइजेशन से लेकर दवा वितरण तक ठप

सहरसा. कोसी का पीएमसीएच कहा जाने वाला जिले का मॉडल अस्पताल बुधवार की सुबह नौ बजे से ही अंधेरे में डूबा रहा, जिससे अस्पताल की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गयी. अस्पताल में अफरातफरी का माहौल रहा, जबकि बिजली विभाग द्वारा इसकी दो दिन पूर्व सूचना दे गयी थी. फिर भी अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही बरती. जिससे मरीजों एवं परिजनों के बीच अफरातफरी का माहौल बना रहा. वैसे अस्पताल में जिला प्रशासन व जन प्रतिनिधियों द्वारा कई बार निरीक्षण किया जाता रहा है. हर बार निरीक्षण के दौरान कमी दिखाई देती है. बार बार व्यवस्था में सुधार के लिए दिशा-निर्देश दिया जाता है. बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण अस्पताल प्रबंधन का मनोबल लापरवाही वाला बना है. विभाग द्वारा सारी सुविधा देने का दावा किया जाता है. बावजूद प्रबंधन के लापरवाही के कारण परिजनों द्वारा महिला मरीज को गोद में उठा कर इमरजेंसी वार्ड में इलाज के लिए ले जाते दिख जाते हैं. सवाल उठता है कि अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में इस तरह की लापरवाही क्यों की जाती है. इलाज के अभाव में मरीज की मौत होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा.

प्रबंधन ने नहीं की ठोस व्यवस्था

अस्पताल प्रबंधन द्वारा कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किया गया. मरीजों, उनके परिजनों एवं चिकित्साकर्मियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. बिजली गुल होते ही अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी, जांच कक्ष, दवा वितरण काउंटर एवं अन्य महत्वपूर्ण विभाग अंधेरे में डूब गया. इमरजेंसी सेवा पर इसका सबसे अधिक असर देखने को मिला. डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ को मरीजों की जांच में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिससे इलाज की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़ा हो गया. ओपीडी में पहुंचे मरीजों की लंबी कतार अंधेरे में ही लगी रही. पर्ची बनाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने तक हर प्रक्रिया बाधित रही. खासकर बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं एवं बच्चों के परिजन सबसे अधिक परेशान नजर आये.

दवा काउंटर पर लगी लंबी लाइन

दवा काउंटर पर काफी देर तक मरीज व परिजनों की लंबी लाइन लगी रही. हाईटेक जांच घर बिजली नहीं रहने के कारण ठप रहा. चंडीस्थान सोनबरसाराज से आये एचआइवी पॉजिटिव मरीज के परिजन मनोज कुमार ने बताया कि पटना पीएमसीएच में इलाज के दौरान एचआइवी पॉजिटिव पाये जाने के बाद पीएमसीएच द्वारा यहां नियमित इलाज के लिए रेफर कर दिया गया. चिकित्सक द्वारा दवा लिख देने के बावजूद बिजली नहीं रहने के कारण दवा काउंटर से दवा नहीं दिया जा रहा है. वहीं पुलिस लाइन सपटियाही से अपने 94 वर्षीय दादी का इलाज करने आये मिथुन कुमार ने बताया कि दादी की तबीयत काफी खराब है. चिकित्सक द्वारा सुबह शाम नेमोलाइजेशन किया जाना है, लेकिन बिजली नहीं रहने के कारण नेमोलाइजेशन नहीं किया जा रहा है. चिकित्सक बिजली नहीं रहने की बात कह रहे हैं. मिथुन ने बताया कि इसकी सूचना जिलाधिकारी, सिविल सर्जन सहित पटना स्वास्थ्य विभाग को मेल किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

नहीं हो सकी आवश्यक जांच

कई मरीजों ने बताया कि वे दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से सुबह-सुबह अस्पताल पहुंचे, लेकिन बिजली नहीं रहने के कारण ना तो सही ढंग से जांच हो सकी एवं ना ही समय पर इलाज मिल रहा है. दवा काउंटर से दवा का वितरण नहीं हो रहा है. अस्पताल में मौजूद कई महत्वपूर्ण जांच मशीन एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी लैब एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह ठप हो गया. इससे मरीजों की जरूरी जांच नहीं हो सकी. वहीं दवा भंडार एवं वैक्सीन स्टोरेज में रखी जाने वाली दवाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रही. लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से कोल्ड चेन प्रभावित होने का खतरा बना रहा.

वैकल्पिक व्यवस्था जेनरेटर भी रहा फेल

सबसे हैरानी की बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन के पास पर्याप्त जनरेटर की व्यवस्था है, जबकि बिजली विभाग द्वारा पूर्व सूचना दिये जाने के बावजूद प्रबंधन द्वारा कोई तैयारी नहीं की गयी. इससे अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर हो गयी. मरीजों एवं उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते कहा कि जब पहले से बिजली कटौती की जानकारी थी, तो जनरेटर एवं अन्य वैकल्पिक संसाधनों को सक्रिय क्यों नहीं किया गया. इस बाबत पूछे जाने पर सिविल सर्जन डॉ राजनारायण प्रसाद ने बताया कि अस्पताल प्रबंधक से बात हुई है. जेनरेटर का बैटरी खराब है. अस्पताल प्रबंधक द्वारा नयी बैटरी खरीदने के लिए आदमी को बाजार भेजा गया है. नयी बैट्री लगने के बाद बिजली आपूर्ति बहाल हो जायेगी.

मोबाइल टॉर्च की रोशनी में चला इलाज

वहीं चार घंटे बाद स्थिति और बदतर हो गयी. दोपहर इलाज के लिए आये गंभीर रूप से बीमार मरीज को मौजूद डॉक्टर मोबाइल टॉर्च की रोशनी में इलाज करते नजर आये, लेकिन तब तक भी अस्पताल प्रशासन द्वारा कोई भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किया जा सका था.

छह घंटे बाद भी चालू नहीं हुई बिजली

सीएस से जानकारी हासिल करने के छह घंटे बाद भी बिजली आपूर्ति संचालित नहीं हो पाई थी. वहीं मिली जानकारी के अनुसार मॉडल सदर अस्पताल के जेनरेटर में खराबी आ गयी थी, जिसे कुशल तकनीशियन ही ठीक कर सकते थे. सूत्रों के अनुसार, बिजली जाने के बाद भी वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लगाए गए मॉडल सदर अस्पताल का जेनरेटर कभी संचालित नहीं किया जाता है.

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