कोसी तटबंध क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बढ़ा, प्रशासन अलर्ट, राहत केंद्र और नावों की तैयारी तेज

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फोटो - सलखुआ,सहरसा -  बाढ़ स्थल का मुआयना करते अधिकारी साम्हरखुर्द में राहत केंद्र के लिए स्कूल का जायजा लेते अधिकारी | Prabhat Khabar Network

फोटो - सलखुआ,सहरसा - बाढ़ स्थल का मुआयना करते अधिकारी साम्हरखुर्द में राहत केंद्र के लिए स्कूल का जायजा लेते अधिकारी | Prabhat Khabar Network

Flood Alert : मानसून और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर राहत केंद्रों और सुरक्षा की तैयारी तेज की गई है.

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Flood Alert : सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड में कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैयारियां तेज कर दी हैं. अधिकारियों ने तटबंध के अंदर बसे गांवों का निरीक्षण कर राहत केंद्र चिन्हित किए, चापाकल लगाने के निर्देश दिए और सरकारी व निजी नावों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड में मानसून के सक्रिय होने और कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है और तटबंध के अंदर बसे गांवों में राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं.

बुधवार को अंचलाधिकारी रवि कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी वीरेंद्र कुमार और राजस्व अधिकारी सचिन आनंद ने कोसी तटबंध के अंदर स्थित चानन, कबीरा, अलानी और सम्हारखुर्द पंचायतों के बाढ़ संभावित क्षेत्रों का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया. अधिकारियों ने राहत केंद्रों, ऊंचे स्थानों, आश्रय स्थलों और पेयजल व्यवस्था की समीक्षा की.

सम्हारखुर्द में राहत केंद्र नहीं, स्कूल को बनाया गया अस्थायी आश्रय स्थल

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि सम्हारखुर्द पंचायत में बाढ़ के समय लोगों को सुरक्षित ठहराने के लिए कोई स्थायी बाढ़ आश्रय स्थल उपलब्ध नहीं है. इसे देखते हुए उच्च विद्यालय सम्हारखुर्द को अस्थायी राहत केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया.

इसी तरह चानन पंचायत में सहरिया और बसाई स्थित विद्यालयों को बाढ़ के दौरान सुरक्षित राहत केंद्र के रूप में चयनित किया गया है, ताकि आपात स्थिति में ग्रामीणों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके.

हर राहत केंद्र पर लगेंगे दो-दो चापाकल

प्रशासन ने राहत केंद्रों पर पेयजल संकट से बचने के लिए प्रत्येक संभावित बाढ़ स्थल पर दो-दो चापाकल लगाने का निर्देश पीएचईडी विभाग को दिया है. इसके अलावा शौचालय और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों को भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि राहत शिविरों में केवल आश्रय ही नहीं, बल्कि पीने का पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी मूलभूत सुविधाएं भी सुनिश्चित की जाएंगी.

नावों का पंजीकरण और राहत सामग्री का भंडारण शुरू

बाढ़ के दौरान आवागमन सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. इसे देखते हुए प्रशासन ने सरकारी और निजी नावों का पंजीकरण शुरू कर दिया है. साथ ही नाविकों की सूची भी तैयार की जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत बचाव अभियान चलाया जा सके.

इसके अलावा सूखा राशन, पेयजल, आवश्यक दवाइयों और पॉलीथिन शीट का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि राहत सामग्री समय पर उपलब्ध रहे और किसी भी पंचायत में आपूर्ति बाधित न हो.

जिला प्रशासन ने अधिकारियों को किया 24 घंटे अलर्ट

जिला प्रशासन की उच्चस्तरीय बैठकों के बाद सभी संबंधित अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है. बाढ़ संभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्थानीय स्तर पर समन्वय बढ़ाया जा रहा है.

प्रशासन ने ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे कोसी नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत अंचल कार्यालय या संबंधित प्रशासनिक अधिकारी को दें.

Flood Alert : क्यों महत्वपूर्ण है यह तैयारी

कोसी तटबंध के अंदर बसे गांव हर मानसून में बाढ़ के खतरे का सामना करते हैं. समय रहते राहत केंद्र, पेयजल, नाव और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था होने से आपदा की स्थिति में जन-धन की हानि कम की जा सकती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह तैयारी समय पर पूरी हो जाती है, तो संभावित बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्य अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकेंगे.


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Bashistha Kumar

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By Bashistha Kumar

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