कन्दाहा सूर्य मंदिर को मिल सकती है राजकीय पहचान, राज्य स्तरीय सूर्य महोत्सव के लिए सरकार को भेजा गया प्रस्ताव

सहरसा – कन्दाहा सूर्य मंदिर
Saharsa News: सहरसा के ऐतिहासिक कन्दाहा सूर्य मंदिर में राज्य स्तरीय छठ महापर्व और राजकीय सूर्य महोत्सव आयोजित करने का प्रस्ताव बिहार सरकार को भेजा गया है. इससे मंदिर के विकास और धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद जगी है.
सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट
Saharsa News: महिषी प्रखंड स्थित ऐतिहासिक कन्दाहा सूर्य मंदिर को पर्यटन और सांस्कृतिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है. जिला प्रशासन ने मंदिर में राज्य स्तरीय छठ महापर्व एवं राजकीय कन्दाहा सूर्य महोत्सव आयोजित करने का प्रस्ताव कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार को भेजा है. प्रस्ताव भेजे जाने के बाद क्षेत्र के लोगों और श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है.
उत्तर बिहार के इकलौते ऐतिहासिक सूर्य मंदिर पर फोकस
कन्दाहा सूर्य मंदिर उत्तर बिहार का एकमात्र ऐतिहासिक सूर्य मंदिर माना जाता है. मंदिर अपनी धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है. वर्षों से यहां छठ पर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते रहे हैं.
जिलाधिकारी ने सरकार को भेजा प्रस्ताव
जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक को भेजे पत्र में बताया है कि सहयोग पोर्टल पर प्राप्त आवेदन में कन्दाहा सूर्य मंदिर के संरक्षण, विकास और राज्य स्तरीय महोत्सव आयोजन की मांग की गई है. आवेदन में मंदिर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है.
1981 से संरक्षित है यह धरोहर
प्रस्ताव के अनुसार कन्दाहा सूर्य मंदिर वर्ष 1981 से बिहार राज्य पुरातत्त्व निदेशालय द्वारा संरक्षित स्मारक है. मंदिर परिसर में स्थापित काले पत्थर की प्राचीन मूर्तियां और अभिलेखीय साक्ष्य इसकी ऐतिहासिक महत्ता को प्रमाणित करते हैं. यही वजह है कि इसे राज्य स्तर पर विकसित करने की मांग लगातार उठती रही है.
छठ महापर्व और सूर्य महोत्सव से बढ़ेगी पहचान
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यहां राजकीय स्तर पर छठ महापर्व और सूर्य महोत्सव का आयोजन शुरू होता है तो इससे न केवल मंदिर की पहचान बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी. इससे स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.
श्रद्धालुओं में जगी नई उम्मीद
जिला प्रशासन द्वारा प्रस्ताव अग्रसारित किए जाने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों में उम्मीद जगी है कि सरकार जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेगी. लोगों का कहना है कि कन्दाहा सूर्य मंदिर की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का यह सुनहरा अवसर है.
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लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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