पेपरलेस निबंधन से दस्तावेज नवीसों का काम ठप, ओटीपी प्रक्रिया को लेकर ग्रामीण परेशान

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फोटो - खाली पड़ा दस्तानवीसों का बरामदा | Prabhat Khabar Network

सहरसा में नई पेपरलेस निबंधन व्यवस्था लागू होने से दस्तावेज नवीसों और संबंधित व्यवसायों की आय पर गहरा असर पड़ा है. ग्रामीण क्षेत्रों के लोग ओटीपी आधारित प्रक्रिया को समझने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं, जिससे निबंधन कार्य प्रभावित हो रहा है.

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सहरसा. राज्य सरकार की ओर से लागू की गई पेपरलेस निबंधन व्यवस्था का असर अब जिला निबंधन कार्यालय में दिखाई देने लगा है. वर्षों से निबंधन कराने वाले लोगों, दस्तावेज नवीसों, स्टांप विक्रेताओं और अन्य सहयोगियों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला कार्यालय परिसर पिछले कुछ दिनों से अपेक्षाकृत खाली नजर आ रहा है. निबंधन पेशे से जुड़े लोगों ने नई डिजिटल व्यवस्था के क्रियान्वयन को लेकर व्यावहारिक कठिनाइयों का दावा किया है.

ओटीपी प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों को परेशानी का दावा

दस्तावेज नवीसों का कहना है कि नई व्यवस्था में ओटीपी आधारित प्रक्रिया अनिवार्य किए जाने के कारण ग्रामीण क्षेत्र के निबंधनार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. कोसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो डिजिटल प्रक्रिया और अंग्रेजी भाषा में तैयार दस्तावेजों को आसानी से नहीं समझ पाते हैं. उनका कहना है कि तकनीकी जानकारी के अभाव में लोग नई व्यवस्था के तहत निबंधन कराने में सहज महसूस नहीं कर रहे हैं.

तीन अगस्त से दाखिल नहीं हुआ कोई दस्तावेज : नवीस

निबंधन पेशे से जुड़े दस्तावेज नवीसों का दावा है कि तीन अगस्त से अब तक आम लोगों की ओर से एक भी दस्तावेज दाखिल नहीं किया गया है. हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि निबंधन विभाग के स्तर से नहीं हो सकी है.दस्तावेज नवीसों का कहना है कि निबंधन कार्य प्रभावित होने से कार्यालय पर निर्भर दस्तावेज नवीस, उनके सहयोगी और मुद्रांक विक्रेताओं की आय पर सीधा असर पड़ा है.

आजीविका प्रभावित होने की जताई चिंता

निबंधन से जुड़े लोगों के अनुसार उनका काम पूरी तरह निबंधन प्रक्रिया पर निर्भर है. नई व्यवस्था में कामकाज प्रभावित होने से उनकी दैनिक आय लगभग समाप्त हो गई है. इससे उनके परिवार के भरण-पोषण को लेकर चिंता बढ़ गई है.

उनका कहना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने के साथ-साथ वर्षों से इस पेशे से जुड़े लोगों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए भी व्यावहारिक समाधान निकाला जाना चाहिए.

स्थानीय भाषा में सुविधा देने की मांग

दस्तावेज नवीसों और निबंधन पेशे से जुड़े लोगों ने सरकार एवं विभागीय अधिकारियों से डिजिटल व्यवस्था की व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने की मांग की है. उन्होंने ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए स्थानीय भाषा में सहायता उपलब्ध कराने तथा ओटीपी आधारित प्रक्रिया को सरल बनाने का आग्रह किया है.

डिजिटल व्यवस्था का स्वागत, लेकिन प्रक्रिया सरल हो

निबंधन पेशे से जुड़े लोगों का कहना है कि पेपरलेस और डिजिटल व्यवस्था पारदर्शिता एवं सुविधा की दिशा में सकारात्मक कदम है. लेकिन इसका लाभ तभी व्यापक स्तर पर मिल सकेगा, जब ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए प्रक्रिया आसान हो और उन्हें तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए.उन्होंने विभाग से निबंधन कार्यालय में सहायता केंद्र या हेल्प डेस्क की व्यवस्था करने की भी मांग की, ताकि लोगों को डिजिटल प्रक्रिया समझने और दस्तावेज दाखिल करने में परेशानी न हो.

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Vinay Kumar Mishra

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