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सात दिवसीय पारंपरिक कार्तिक पूर्णिमा मेला का सांसद ने किया शुभारंभ

Updated at : 17 Nov 2024 5:20 PM (IST)
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सात दिवसीय पारंपरिक कार्तिक पूर्णिमा मेला का सांसद ने किया शुभारंभ

सात दिवसीय पारंपरिक कार्तिक पूर्णिमा मेला का सांसद ने किया शुभारंभ

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विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम व बच्चों के बीच होगी प्रतियोगिता सौरबाजार . नगर निगम के बैजनाथपुर में आयोजित होने वाले सात दिवसीय पारंपरिक कार्तिक पूर्णिमा मेला का शुभारंभ शनिवार की रात सांसद दिनेश चंद्र यादव, पूर्व विधायक अरुण कुमार, पूर्व विधायक डॉ अरूण यादव एवं मेला समिति के सचिव सह पूर्व सरपंच अरूण कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. उद्घाटन समारोह को संबोधित करते सांसद ने कहा कि मेला समाज के बिखरे लोगों को एकजुट करने एवं मनोरंजन प्राप्त करने का माध्यम होने के साथ समाज को विकसित करने का भी माध्यम है. वहीं कार्यक्रम में मेला समिति द्वारा सांसद को बुके देकर सम्मानित किया गया. सात दिनों तक चलने वाले इस मेला में लोगों के मनोरंजन के लिए विभिन्न प्रकार का झूला, मीनाबाजार सहित कई तरह के उपकरण जुटाए गए हैं. रात्रि में प्रत्येक दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा. इसके अतिरिक्त मेला कमेटी द्वारा स्कूली बच्चों के बीच खेलकूद व अन्य प्रतियोगिता आयोजित कर बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित किया जायेगा. वहीं उद्घाटन के बाद स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. सेवानिवृत्त शिक्षक कमलेश्वरी यादव की अध्यक्षता में सभा को दोनों पूर्व विधायक ने भी संबोधित करते पूर्वजों द्वारा चली आ रही परंपरा को निभाते इस तरह के आयोजन के लिए मेला कमेटी की सराहना की. अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन डीएल कॉलेज बैजनाथपुर के अध्यक्ष कौशल किशोर ने किया. उन्होंने सांसद से बैजनाथपुर चौक पर ओवरब्रिज बनने के कारण स्थानीय दुकानदारों को हो रही परेशानी को कम करने के लिए चौक से पूरब खाली मनोहर उच्च विद्यालय के जमीन में सुपर मार्केट बनाने की दिशा में पहल करने की मांग की. मौके पर अधिवक्ता उमेश यादव, पूर्व जीप सदस्य शशिभूषण यादव, बिन्देश्वरी यादव, अंजुम हुसैन, रैवती रमण, अमर यादव, विनय यादव, रंजन यादव, राजकिशोर यादव, डॉ पन्नालाल यादव, कैलाश यादव, अनिल यादव, बिजय यादव, राहुल रोशन उर्फ मुन्ना, संजय रजक, श्यामसुंदर गुप्ता, वार्ड पार्षद बिपिन कुमार सहित अन्य लोग मौजूद थे. मेले का इतिहास मेला कमेटी से जुड़े लोगों ने बताया कि यह मेला आजादी के पूर्व से लगभग सौ वर्षों से अधिक समय से लगते आ रहा है. इसकी शुरूआत किसने एवं कब किया इसका पता नहीं चल पाया है. पूर्वजों द्वारा चली आ रही मेला की इस परंपरा को यहां के नई पीढ़ी द्वारा आज भी संजोया जा रहा है. स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के कारण इसे आज तक राजकीय मेला का दर्जा नहीं मिल पाया है. अब भी स्थानीय जनप्रतिनिधी एवं पदाधिकारी सहयोग करें तो इसे राजकीय मेला का दर्जा मिल सकता है. तत्कालीन बिहार सरकार के कला सांस्कृतिक मंत्री अशोक कुमार सिंह के समय यहां राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों की प्रस्तुति होती थी. तब यह मेला राजकीय मेला का दर्जा मिलने के करीब पहुंच चुका था. लेकिन धीरे-धीरे इस मेला के स्तर में गिरावट आने लगी. सहरसा मधेपुरा मुख्य मार्ग एनएच 107 के किनारे लगने वाला यह मेला भोगोलिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां बगल में बह रही ऐतिहासिक तिलावे नदी, महर्षि मेहीं योगाश्रम, पशु चिकित्सालय, मनोहर उच्च विद्यालय इस महा कार्तिक मंदिर की महत्व को और अधिक बढ़ा देता है. मेला परिसर में ही अंग्रेजों द्वारा बनाया गया ऐतिहासिक कोठी एवं बजरंग वली का मंदिर आकर्षण का केंद्र है. यहां शरर का भी एक विशाल पेड़ है.

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