करोड़ों की लागत से बना मॉडल अस्पताल बदहाल, खराब एसी की जगह दीवारों पर टांगे एग्जॉस्ट फैन

वार्ड के येलो जोन में खराब एसी के बीच मरीज
सहरसा का करोड़ों की लागत से बना सदर मॉडल अस्पताल इन दिनों बदहाली का शिकार है, जहां खराब पड़े सेंट्रलाइज्ड एसी को ठीक कराने के बजाय वार्डों में एग्जॉस्ट फैन लगाकर खानापूर्ति की जा रही है. भीषण गर्मी और उमस के बीच अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं.
सहरसा से अंजन आर्यन की रिपोर्ट: करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सहरसा का सदर मॉडल अस्पताल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. जिस अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं का हब माना जा रहा था, वहां अब मरीजों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ रहा है. अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का आलम यह है कि खराब पड़े सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम को ठीक कराने के बजाय वार्डों की दीवारों में एग्जॉस्ट फैन लगाकर खानापूर्ति की जा रही है.
करोड़ों की परियोजना, लेकिन सुविधाएं केवल कागजों पर
सदर मॉडल अस्पताल को अत्याधुनिक बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया गया था. आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और मरीज वार्डों में सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम लगाया गया था ताकि मरीजों को राहत मिल सके. लेकिन वर्तमान में यह सिस्टम सफेद हाथी साबित हो रहा है. भीषण गर्मी और उमस के बीच एग्जॉस्ट फैन गर्म हवा बाहर निकालने में नाकाम साबित हो रहे हैं. मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि वार्डों के अंदर घुटन भरी स्थिति बनी रहती है, जिससे बीमारी और बढ़ने का खतरा रहता है.
कायाकल्प पुरस्कार पर उठ रहे सवाल
आश्चर्य की बात यह है कि हाल ही में स्वास्थ्य विभाग ने इस अस्पताल को बेहतर प्रदर्शन के लिए ‘कायाकल्प’ पुरस्कार के तहत 50 लाख रुपये की राशि से सम्मानित किया था. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. मरीजों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन केवल कागजों में व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखाता है. वार्डों में कई पंखे खराब हैं और भीड़ के कारण गर्मी का स्तर असहनीय हो जाता है. परिजनों ने सवाल उठाया कि जब अत्याधुनिक सिस्टम मौजूद है, तो उसे चालू कराने के बजाय ‘जुगाड़’ वाली व्यवस्था क्यों अपनाई जा रही है.
जिम्मेदार अधिकारी झाड़ रहे पल्ला
अस्पताल की इस बदहाली पर जब अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो वे जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टालते नजर आए. प्रभारी अधीक्षक डॉ. एसएस मेहता ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वे जानकारी देने के लिए अधिकृत नहीं हैं. वहीं, सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद ने पहले अस्पताल मैनेजर से जानकारी लेने की बात कही और बाद में फोन उठाना बंद कर दिया. अधिकारियों का यह रवैया अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करता है.
आगामी गर्मी बढ़ाएगी मुसीबत
फिलहाल मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण मरीजों को थोड़ी राहत है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही पारा चढ़ेगा, वार्डों की स्थिति नारकीय हो जाएगी. अस्पताल की साफ-सफाई, दवा वितरण और जांच व्यवस्था पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं. अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस करोड़ों के “मॉडल” अस्पताल की वास्तविक साख बचाने के लिए कब गंभीर कदम उठाता है.
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