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जन्म से ही न बोल व सुन पाती हैं 13 साल की लक्ष्मी, लेकिन पेंटिंग से बता देती है मन की बात

Updated at : 03 Feb 2026 5:56 PM (IST)
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जन्म से ही न बोल व सुन पाती हैं 13 साल की लक्ष्मी, लेकिन पेंटिंग से बता देती है मन की बात

13 साल की लक्ष्मी, लेकिन पेंटिंग से बता देती है मन की बात

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लक्ष्मी के हाथों से उकेरी गयी पेंटिंग्स हर देखने वाले को कर देती है हैरान सहरसा. हौसले बुलंद हों एवं सीखने की लगन हो तो कोई भी कमी रास्ता नहीं रोक सकती. आज के डिजिटल युग में यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म ने लक्ष्मी जैसी प्रतिभाओं को नई उड़ान दी है. 13 साल की लक्ष्मी कुमारी आज उन बच्चों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जिन्हें समाज अक्सर कमजोर समझ लेती है. बिना बोले एवं बिना सुने भी लक्ष्मी ने यह साबित कर दिया है कि कला की कोई भाषा नहीं होती. वह सीधे दिल से दिल तक पहुंचती है. जिला मुख्यालय के पशुपालन कॉलोनी की रहने वाली 13 वर्षीय लक्ष्मी कुमारी एक ऐसी मिसाल हैं जो अपनी कला से यह साबित कर दिया है कि हुनर किसी आवाज की मोहताज नहीं होती. लक्ष्मी ना बोल सकती है एवं ना ही सुन सकती हैं. लेकिन उनके हाथों से उकेरी गयी पेंटिंग्स हर देखने वाले को हैरान कर देती है. रंगों के जरिए वह अपने जज्बात, अपने सपने एवं अपनी दुनिया को कागज पर उतार देती है. उनकी बनाई पेंटिंग्स इतनी जीवांत व भावपूर्ण होती है कि पहली नजर में कोई यह अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि यह कला एक मूक-बधिर बच्ची की है. बिना ट्रेनिंग के बनाती हैं पेंटिंग खास बात यह है कि लक्ष्मी ने पेंटिंग की कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली है. उन्होंने यह हुनर यूट्यूब से सीखा है. मोबाइल स्क्रीन पर चलती तस्वीरों को ध्यान से देखकर, वह खुद ब्रश उठाती हैं एवं कागज पर वही दृश्य उतारने की कोशिश करती है. कभी प्राकृतिक दृश्य, कभी चेहरे, तो कभी रंगों का अनोखा मेल हर पेंटिंग में लक्ष्मी की मेहनत एवं कल्पनाशीलता साफ झलकती है. लक्ष्मी के मामा अमित कुमार बताते हैं कि लक्ष्मी को बचपन से ही पेंटिंग का गहरा शौक रहा है. वह किसी भी चीज को ध्यान से देखती है एवं फिर उसे कागज पर उतारने की कोशिश करती है. हमेशा यूट्यूब पर कुछ नया सीखती रहती है. उसके हाथों में गजब का हुनर है. जब लोग उसकी पेंटिंग देखते हैं, तो दंग रह जाते हैं. जन्म से ही नहीं बोल पाती है लक्ष्मी उन्होंने आगे बताया कि लक्ष्मी जन्म से ही नहीं बोल पाती हैं एवं ना सुन पाती है. लेकिन इसके बावजूद उसने कभी हार नहीं मानी. पेंटिंग उसके लिए सिर्फ शौक नहीं बल्कि खुद को व्यक्त करने का जरिया बन गयी है. आज लक्ष्मी पेंटिंग के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना रही है. जिस पर पूरा परिवार गर्व महसूस करता है. लक्ष्मी की कहानी सिर्फ एक बच्ची की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए एक संदेश भी है कि अगर फोटो – सहरसा 01- पेंटिंग के साथ लक्ष्मी

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Dipankar Shriwastaw

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