जीविका दीदी का सिलाई घर बना महिलाओं की ताकत, 85 महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 17 May 2026 9:31 AM

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सिलाई केंद्र में कार्य करती महिलाएं

सहरसा के शाहपुर में संचालित जीविका दीदी सिलाई केंद्र में करीब 85 महिलाएं आंगनबाड़ी बच्चों की पोशाक सिलकर आत्मनिर्भर बन रही हैं. हालांकि, लगातार बिजली कटौती के कारण केंद्र की इंचार्ज ने प्रशासन से जनरेटर की मांग की है.

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सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट: नगर निगम क्षेत्र के शाहपुर (वार्ड संख्या सात) में संचालित ‘जीविका दीदी का सिलाई घर’ ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत केंद्र बनकर उभरा है. इस केंद्र के माध्यम से इलाके की लगभग 80 से 85 महिलाएं सिलाई कार्य से जुड़कर हर महीने सम्मानजनक आमदनी कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना रही हैं. उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक सिलाई केंद्र का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान किया था.

आंगनबाड़ी के बच्चों का ड्रेस कर रही हैं तैयार

जीविका द्वारा संचालित इस विशेष सिलाई केंद्र में मुख्य रूप से सरकारी आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस (पोशाक) तैयार की जाती है. महिलाओं द्वारा सिली गई यह पोशाक जीविका संगठन के माध्यम से सीधे संबंधित आंगनबाड़ी केंद्रों तक ससमय पहुंचाई जाती है. केंद्र में काम करने वाली महिलाओं को उनके द्वारा तैयार किए गए कपड़ों की संख्या और कार्य के आधार पर पारिश्रमिक (मेहनताना) दिया जाता है, जिससे उनके बैंक खातों में सीधे राशि पहुंच रही है.

घर के पास रोजगार मिलने से बढ़ी खुशी

केंद्र में कार्यरत जीविका दीदियों और अन्य महिलाओं ने बताया कि पहले उन्हें छोटे-मोटे रोजगार या मजदूरी के लिए घर से बाहर दूर-दराज के इलाकों में भटकना पड़ता था, जहां सुरक्षा और समय दोनों की समस्या होती थी. लेकिन अब अपने ही गांव और पंचायत स्तर पर अत्याधुनिक सिलाई मशीन और सुरक्षित माहौल मिलने से वे बेहद खुश हैं. महिलाओं ने कहा कि इस सरकारी पहल से न केवल समाज में उनका सम्मान और आमदनी बढ़ी है, बल्कि वे बच्चों की शिक्षा और परिवार के भरण-पोषण में अपने पति का हाथ बंटा पा रही हैं. शाहपुर के अलावा आसपास के कई अन्य गांवों की महिलाएं भी प्रतिदिन सुबह यहां काम करने पहुंचती हैं.

बिजली की आंख-मिचौनी से उत्पादन प्रभावित, जनरेटर की मांग

सिलाई केंद्र की इंचार्ज सावित्री कुमारी ने बताया कि केंद्र का प्रबंधन और संचालन पूरी तरह सुचारू है और महिलाओं में काम को लेकर भारी उत्साह है. हालांकि, वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या बिजली की अनियंत्रित कटौती बनी हुई है. उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा कि दिन के समय बिजली कट जाने पर सिलाई मशीनें बंद हो जाती हैं और महिलाओं को घंटों बैठकर बिजली आने का इंतजार करना पड़ता है, जिससे दैनिक उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होता है.

इंचार्ज सावित्री कुमारी और अन्य कर्मियों ने जिला प्रशासन, सरकार एवं संबंधित विभाग से सिलाई केंद्र पर एक हैवी जनरेटर (विद्युत बैकअप) उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि बिजली गुल होने की स्थिति में भी काम बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रह सके.

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों का भी मानना है कि जीविका का यह सिलाई घर ग्रामीण परिवेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है.

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