गायत्री शक्तिपीठ में नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की हुई पूजा-अर्चना

Updated at : 19 Mar 2026 6:11 PM (IST)
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गायत्री शक्तिपीठ में नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की हुई पूजा-अर्चना

गायत्री शक्तिपीठ में नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की हुई पूजा-अर्चना

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नवरात्र में उनका वंदन, अर्चन करने का चलन है, जिनके कोख से सारा संसार पल रहा हैः डॉ अरूण सहरसा. गायत्री शक्तिपीठ में बासंती नवरात्र के प्रथम दिन, गुरुवार को आदि शक्ति मां शैलपुत्री का पूजन विधि-विधानपूर्वक किया गया. इस अवसर पर डॉ.अरुण कुमार जायसवाल ने बासंती नवरात्र के संबंध में कहा कि वर्ष में चार नवरात्र होते हैं.दो गुप्त नवरात्र और दो प्रत्यक्ष नवरात्र. प्रत्यक्ष नवरात्र में वर्तमान में बासंती नवरात्र चल रहा है.उन्होंने बताया कि प्रत्यक्ष नवरात्र से पूर्व शिवरात्रि आती है, जिसमें प्रकृति और पुरुष का मिलन होता है. इसके बाद होली, जिसे दारुण रात्रि कहा जाता है, और फिर बासंती नवरात्र अपने चरम पर पहुंचता है. बासंती उत्सव का समापन राम नवमी पर होता है, जिसे अत्यंत हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है.डॉ. जायसवाल ने कहा कि नए संवत्सर का आरंभ हो चुका है और यह नववर्ष की शुभकामनाओं का भी समय है. नवरात्र में मां का वंदन और अर्चन करने की परंपरा है, जिनकी कोख से समस्त संसार का पालन-पोषण होता है. उन्होंने कहा कि माता हमें कभी नहीं भूलती वही हमें हवा, सूर्य, चंद्रमा जैसे अनमोल उपहार देती है. चारों ओर फैली हरियाली, फल-फूल और सुगंधित वातावरण प्रकृति की अद्भुत छटा को दर्शाते हैं. प्रकृति हमें नक्षत्रों की चादर ओढ़ाकर सुलाती है और सूरज के साथ जगाती है. भारतीय संस्कृति में बसंत को भगवान के रूप में पूजने की परंपरा है, जो अन्य संस्कृतियों में विरले ही देखने को मिलती है.उन्होंने यह भी कहा कि मां ही बच्चे की प्रथम गुरु होती है, जो उसे परिवार और समाज से परिचित कराती है. जिस प्रकार मनुष्य नौ माह तक मां के गर्भ में रहकर जीवन का निर्माण करता है, उसी प्रकार नवरात्र के नौ दिनों में भक्त मां जगदंबा की शरण में रहकर अपनी साधना पूर्ण करते हैं. इस अवसर पर परिजनों ने 2 लाख 40 हजार गायत्री मंत्र जप का संकल्प लिया. कार्यक्रम में लगभग 1500 से अधिक परिजन उपस्थित थे. मां शैलपुत्री का पूजन मनीषा, भारती और लक्ष्मी द्वारा कराया गया, जबकि मुख्य यजमान चेतन आनंद अपनी पत्नी सहित रहे. कार्यक्रम में सभी गायत्री परिजन उपस्थित थे.

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