ईंधन बचाने की नसीहत के बीच 8 गाड़ियों का काफिला लेकर पहुंचे शिक्षा सचिव, बनमा-ईटहरी में लोग हैरान

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ईंधन बचाने की नसीहत के बीच 8 गाड़ियों का काफिला लेकर पहुंचे शिक्षा सचिव, बनमा-ईटहरी में लोग हैरान

सचिव का काफिला

सहरसा जिले के बनमा-ईटहरी प्रखंड में आयोजित एक सरकारी सहयोग शिविर में सूबे के शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल का वीआईपी काफिला चर्चा का विषय बन गया है. एक तरफ सरकार जहां आम जनता को पेट्रोल-डीजल बचाने की सीख दे रही है, वहीं साहब के इस बड़े काफिले को देख स्थानीय लोगों ने तीखे सवाल खड़े किए हैं.

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बनमा-ईटहरी (सहरसा) से आशीष कुमार सिंह की रिपोर्ट:

सहयोग शिविर में सचिव की इंट्री पर गाड़ियों की लगी लंबी कतार

दरअसल, बनमा-ईटहरी प्रखंड क्षेत्र में शिक्षा विभाग की ओर से एक विशेष सहयोग शिविर का आयोजन किया गया था. इस शिविर की जमीनी हकीकत और व्यवस्था का जायजा लेने के लिए बिहार शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे. हालांकि, शिविर परिसर में जैसे ही साहब की इंट्री हुई, वहाँ मौजूद आम लोग और शिक्षक दंग रह गए. सचिव के साथ एक-दो नहीं, बल्कि कुल 8 सरकारी गाड़ियों का एक बड़ा काफिला चल रहा था. शिविर परिसर में एक साथ लाइन से खड़ी इन गाड़ियों को देखकर स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के विपरीत दिखे अफसरशाही के तेवर

शिविर में मौजूद प्रबुद्ध नागरिकों और स्थानीय लोगों ने इस तड़क-भड़क पर गहरा ऐतराज जताया. लोगों का कहना था कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार मंचों से पेट्रोल-डीजल की खपत को कम करने, ईंधन की बचत करने और मंत्रियों व प्रशासनिक अधिकारियों को अपने वाहनों का काफिला छोटा रखने की पुरजोर अपील कर रहे हैं. प्रधानमंत्री बार-बार याद दिलाते हैं कि ईंधन आयात करने पर देश का करोड़ों रुपया खर्च होता है. ऐसे में शिक्षा विभाग के सचिव का महज एक प्रखंड स्तरीय दौरे के लिए 8-8 लग्जरी गाड़ियों का काफिला लेकर चलना, केंद्र और राज्य सरकार की मूल मंशा के बिल्कुल विपरीत दिखाई देता है.

सरकारी खजाने और फिजूलखर्ची पर जनता ने उठाए सवाल

स्थानीय ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सारे अधिकारी एक ही विभाग के हैं और एक ही समीक्षा बैठक में आ रहे थे, तो अलग-अलग गाड़ियों का ईंधन फूंकने की क्या जरूरत थी. अफसरों की इस फिजूलखर्ची का सीधा बोझ आम जनता के टैक्स और सरकारी खजाने पर पड़ता है. लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि आम जनता को नियमों और किफायत का पाठ पढ़ाने वाले बड़े हुक्मरान खुद धरातल पर उन नियमों की धज्जियां उड़ाने से बाज नहीं आते हैं. इस वीआईपी कल्चर और काफिले को लेकर पूरे प्रखंड क्षेत्र में प्रशासनिक कार्यशैली की जमकर आलोचना हो रही है.

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दिव्यांशु प्रशांत

लेखक के बारे में

By दिव्यांशु प्रशांत

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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