जिले में बिना डिग्री वाले फर्जी डॉक्टरों की बाढ़

Published at :06 Apr 2017 5:28 AM (IST)
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जिले में बिना डिग्री वाले फर्जी डॉक्टरों की बाढ़

कार्रवाई नहीं होने की वजह से बेखौफ मरीजों की जान से खेल रहे सहरसा : शहर में बिना डिग्री वाले फर्जी डॉक्टरों की बाढ़ आ गयी है. वे मरीजों के स्वास्थ्य से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं. फर्जी डॉक्टरों द्वारा क्लिनिक व नर्सिंग होम खोल बेहिचक दवाई लिखी जा रही है. सूई लगायी जा रही […]

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कार्रवाई नहीं होने की वजह से बेखौफ मरीजों की जान से खेल रहे

सहरसा : शहर में बिना डिग्री वाले फर्जी डॉक्टरों की बाढ़ आ गयी है. वे मरीजों के स्वास्थ्य से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं. फर्जी डॉक्टरों द्वारा क्लिनिक व नर्सिंग होम खोल बेहिचक दवाई लिखी जा रही है. सूई लगायी जा रही है. यहां तक कि मरीजों के शरीर में बेधड़क ब्लेड चला कर ऑपरेशन भी किये जा रहे हैं. ऐसी फर्जी व जानलेवा स्वास्थ्य सेवाओं की सारी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को है. लेकिन नकेल कसने अथवा किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने से ऐसे फर्जी डॉक्टरों का धंधा फलता-फूलता जा रहा है और गरीब मरीज इनके झांसे में आकर अपनी जान गंवाते जा रहे हैं.
सिविल सर्जन ने दिया था सख्त निर्देश
वर्ष 2014 के नवंबर माह में तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ भोलानाथ झा के निर्देश पर कई तथाकथित चिकित्सकों के प्रमाण पत्र व शैक्षणिक योग्यता से संबंधित कागजातों की जांच की गयी थी. जिसमें होमियोपैथ चिकित्सक मुरलीधर साह को छोड़ अन्य दस ने अपने डिग्री से संबंधित आवश्यक कागजात जमा नहीं किया था. सिविल सर्जन डॉ भोलानाथ झा ने बताया था कि जांच के दौरान डॉ मुरलीधर साह ने अपना होमियोपैथ की डिग्री प्रस्तुत की थी. जिन्हें केवल होमियोपैथ की दवाई लिखने का निर्देश दिया गया था. सीएस ने सौर बाजार के शिवशंकर सिंह जो दवा दुकानदार है, बनगांव रोड के संजय सिन्हा जो आरएमपी हैं,
मीरा सिनेमा रोड में क्लिनिक चलाने वाले नेत्र सहायक गौरी शंकर को नाम के आगे डॉक्टर नहीं लगाने का निर्देश दिया था. इसके अलावा नया बाजार के दवा दुकानदार अरविंद कुमार जो पेशे से दवा दुकानदार हैं.
उन्हें भी डॉक्टर हटाने का निर्देश दिया गया था. सौर बाजार के डॉ बीएन मंडल, रामानंद विश्वास, राम कुमार रमण, कृष्ण वल्लभ साह, रंजीत कुमार, बलराम यादव ने सिविल सर्जन को एंबुलेंस एसोसिएशन व रेडक्रॉस का प्रमाण पत्र देकर अपनी योग्यता को प्रमाणित करने का प्रयास किया था. सिविल सर्जन ने इन प्रमाण पत्रों को नियमानुकूल नहीं मानते क्लिनिक व प्रैक्टिस छोड़ने की सख्त हिदायत दी थी. जिसके बाद पुन: जांच नहीं होने के कारण तथाकथित डॉक्टरों की संख्या दिन व दिन बढ़ती चली गयी.
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