रोज होता है 30 लाख का कारोबार, कीचड़ ने किया बाजार मंदा

Published at :21 Jul 2016 5:52 AM (IST)
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रोज होता है 30 लाख का कारोबार, कीचड़ ने किया बाजार मंदा

सुपर बाजार के समीप लोक बाजार में शिफ्ट नहीं हो रहा बाजार ग्राहक व दुकानदार दोनों हैं परेशान सहरसा : जिले की सबसे बड़ी सब्जी मंडी में शुमार शंकर चौक की सब्जी मंडी बदहाल व्यवस्था की पोल खोलती नजर आती है़ प्रशासन का तेवर जब सख्त होता है तो अतिक्रमण के नाम पर दुकानदारों पर […]

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सुपर बाजार के समीप लोक बाजार में शिफ्ट नहीं हो रहा बाजार

ग्राहक व दुकानदार दोनों हैं परेशान
सहरसा : जिले की सबसे बड़ी सब्जी मंडी में शुमार शंकर चौक की सब्जी मंडी बदहाल व्यवस्था की पोल खोलती नजर आती है़ प्रशासन का तेवर जब सख्त होता है तो अतिक्रमण के नाम पर दुकानदारों पर खूब डंडे चलते है़ं फिर कुछ ही दिनों में स्थिति जस का तस हो जाती है़ यहां के दुकानदार कभी उजड़ते तो कभी बसते रहते हैं. दुकानदार मजबूरीवश या फिर यूं कहें जानबूझ कर दुकानें लगा देते है़ं
लेकिन इन सब के बीच जो बातें खुल कर आती हैं वह है स्थाई तौर पर बने सब्जी मंडी में बाजार को नहीं ले जाने की उदासीनता. दुकानदारों का भी मानना है कि वह अनधिकृत रूप से ही दुकान लगा रहे हैं. अगर प्रशासन की ओर से स्थायी तौर पर बने लोक बाजार को व्यवस्थित कर दुकान लगाने की व्यवस्था कर दी जाये, तो वहीं दुकान खोल लेंगे, पर ऐसा नहीं हो रहा़
लाखों का होता है कारोबार: शहर के सब्जी मंडी पहुंचते ही कचरे का अंबार, सड़क पर जल जमाव व कीचड़ ग्राहकों को नाक पर रूमाल रखने को मजबूर कर देता है़ प्रतिदिन पच्चीस से तीस लाख रुपये का कारोबार यहां की सब्जी मंडियों से होता है़ आलू-प्याज से लेकर हरी सब्जियों का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है़
लेकिन सुविधाएं सब्जी मंडी से गायब नजर आती हैं. गंदगी का आलम यह है कि नाला का गंदा पानी और सड़क पर जल जमाव व कीचड़ ग्राहकों को सब्जी मंडी से दूर करता नजर आने लगा है़ सब्जी खरीदारों की संख्या में इन दिनों लगातार कमी आ रही है़ बरसात से पूर्व जहां इस मंडी में प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार ग्राहक पहुंचते थे.
वहीं इन दिनों आठ सौ से एक हजार ही ग्राहक सब्जी खरीदारी करने पहुंच रहे है़ं वजह साफ है कि गंदगी और कीचड़ के कारण ग्राहक सब्जी मंडी पहुंचने का जोखिम नहीं उठा रहे़
दुकानदारों की मांग: सब्जियों के विक्रेता छोटू मिया, मो नफूस, मो दिना मियां और खुदरा सब्जी के विक्रेता किशुन चौधरी, संतोष कुमार आदि का कहना है कि प्रशासन उन्हें स्थायी जगह और दुकान उपलब्ध करा दे और जो भी टैक्स या रेंट हो तय कर दे तो उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी़ लेकिन उनकी परेशानियों को हल करने के लिए किसी प्रकार की पहल अब तक नहीं हो सकी है़
यहां से मंडी में पहुंच रही सब्जी: मंडी में इन दिनों भरौली, बरियाही, गोरहो घाट, कोपरिया, बलवाहाट समेत जिले के अन्य हिस्सों से सब्जी की खेप पहुंच रही है़ बरसात का समय होने के कारण अभी स्थानीय सब्जी का ही कारोबार किया जा रहा है़ मंडी में सब्जियों के पहुंचने के बाद स्थानीय ग्राहकों तक सब्जियां पहुंचायी जाती है़ं
300 दुकानें सुविधाएं नदारद
सब्जी मंडी में तीन सौ दुकानें है़ं इनमें कुछ दुकानदार स्थानीय तो कई बाहरी भी हैं, जो सब्जी ला कर बेचते हैं और फिर चले जाते हैं. रेलवे की जमीन पर दुकान लगने के कारण दुकानदारों को कई बार हटना भी पड़ता है़ लेकिन मजबूरी में फिर से दुकान लगा देते है़ं स्थाई जगह शिफ्ट नहीं होने के कारण सड़क किनारे दुकान लगानी पड़ती है, जो सुरक्षा के दृष्टिकोण से सही नहीं है़
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