अनुसंधान के नाम पर खानापूर्ति, अपराधी मस्त

Published at :06 Jul 2016 4:38 AM (IST)
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अनुसंधान के नाम पर खानापूर्ति, अपराधी मस्त

पुलिस डायरी में निर्देश के बावजूद नहीं हो रहा आपराधिक इतिहास का उल्लेख सहरसा : पुलिस अगर सुस्त रहेगी, तो जाहिर है अपराधी मस्त रहेंगे. अौर इसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ेगा. जिले के सदर थाना क्षेत्र में हो रहे पुलिसिया अनुसंधान की खामियों का फायदा अपराधी जम कर उठा रहे हैं. कोर्ट में […]

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पुलिस डायरी में निर्देश के बावजूद नहीं हो रहा आपराधिक इतिहास का उल्लेख
सहरसा : पुलिस अगर सुस्त रहेगी, तो जाहिर है अपराधी मस्त रहेंगे. अौर इसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ेगा. जिले के सदर थाना क्षेत्र में हो रहे पुलिसिया अनुसंधान की खामियों का फायदा अपराधी जम कर उठा रहे हैं. कोर्ट में जज के सामने अपराधियों के बड़े गुनाहों को जाहिर करने के बजाय पुलिस परदा देने का काम कर रही है. पुलिस की इस सुस्त कार्यशैली के कारण अपराधी जेल व बेल के खेल में कायदे कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं.
वहीं पीड़ित न्याय के लिए गिड़गिड़ाने को बाध्य हैं.
घर बैठे ही हो रहे अनुसंधान: थाना में दर्ज अधिकांश मामलों में पुलिस घर बैठे ही कांड अनुसंधान के कार्य को निबटा लेती है. इन मामलों में वादी व प्रतिवादी को गवाह सहित थाना में बुला वस्तुस्थिति की जानकारी ले ली जाती है. पुलिस डायरी में उल्लेखित करने के लिए चौहद्दी व दिशा की जानकारी इन गवाहों से ही ले ली जाती है. हालांकि थाना में अधिकारियों की कमी है. दर्जनों कांडों के निष्पादन का बोझ होता है.
डायरी में नहीं जोड़ते पुराने केस, नहीं जमा करते पूरे सबूत
केस स्टडी -1
सदर थाना कांड संख्या 243/16 में प्रगति क्लासेज के समक्ष हुई गोलीबारी की रिपोर्ट संस्थान के अशोक कुमार ने दर्ज करायी थी. जिसमें मुख्य अभियुक्त चर्चित रमण यादव को बनाया गया था. इस मामले में अनुसंधानकर्ता द्वारा कोर्ट में डायरी व चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य निकल कर सामने आये हैं. इस मामले में रमण यादव द्वारा पूर्व में किये गये अपराध से कोर्ट को वाकिफ नहीं कराया गया है. जबकि आरोपी पर सदर थाना में नौ मामले दर्ज हैं. इसके अलावा इस कांड में घटनास्थल से बरामद खोखा, बाइक का जिक्र नहीं किया गया है. अनुसंधानकर्ता द्वारा तकनीकी अनुसंधान को भी नजरअंदाज करते घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी फुटेज से न्यायालय को अवगत नहीं कराया गया है. अधिवक्ता प्रजेश कुमार बताते हैं कि अनुसंधान में बरती गयी लापरवाही का फायदा अभियुक्त को मिल रहा है.
केस स्टडी -2
बीते 20 जून को बाजार से घर वापस भरौली जा रहे युवक राकेश सिंह की अपराधियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी. इस मामले में मृतक के भाई द्वारा दिये गये आवेदन के आधार पर शंकर साह को गिरफ्तार किया गया है. इसके अलावा एक आरोपी आशुतोष सिंह ने कोर्ट में सरेंडर किया था.
इसके अलावा हत्या में शामिल शूटरों का पुलिस कोई सुराग हासिल नहीं कर सकी है. जबकि इस कांड का उद्भेदन गिरफ्तार शूटरों से ही होगा. आखिर किन वजहों से राकेश की हत्या की गयी थी. इस मामले में किन लोगों की संलिप्तता थी. ज्ञात हो कि पुलिस हत्याकांड के अनुसंधान में कोई प्रगति नहीं दिखा रही. जबकि अपराधी के शीघ्र गिरफ्तारी से ही हत्या में प्रयुक्त हथियार व बाइक बरामद की जा सकती है. ज्ञात हो कि हथियार व साक्ष्य के अभाव में हमेशा से अपराधी को फायदा मिलता आया है.
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