बाढ़ की आहट से दहशत में ग्रामीण
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Jul 2016 6:38 AM (IST)
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संकट. बरसात में फरकिया क्षेत्र में आवागमन में होती है परेशानीसहरसा-खगड़िया व अन्य जिले के सीमावर्ती इलाके के पूर्वी व पश्चिमी कोसी तटबंध के भीतर बसी लाखों की आबादी को बाढ़, सुखाड़, धूप, बारिश में आवागमन की कठिनाई बनी रहती है. फरकिया वासी को रोज गंतव्य तक पहुंचने में मशक्कत करनी पड़ती है. सिमरी : […]
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संकट. बरसात में फरकिया क्षेत्र में आवागमन में होती है परेशानीसहरसा-खगड़िया व अन्य जिले के सीमावर्ती इलाके के पूर्वी व पश्चिमी कोसी तटबंध के भीतर बसी लाखों की आबादी को बाढ़, सुखाड़, धूप, बारिश में आवागमन की कठिनाई बनी रहती है. फरकिया वासी को रोज गंतव्य तक पहुंचने में मशक्कत करनी पड़ती है.
सिमरी : सहरसा-खगड़िया जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के पूर्वी कोसी तटबंध के भीतर बसे कई पंचायतवासी को सालों भर नदी में नाव एवं रेत होकर आवागमन करना पड़ता है. सहरसा जिले के ग्यारह पंचायत वाले सलखुआ प्रखंड के चार पंचायत पूर्ण रूप से पूर्वी कोसी तटबंध के भीतर दियारा-फरकिया में बसे हुए हैं. उनमें उटेसरा, सितुआहा पंचायत के आंशिक भू-भाग तटबंध के अंदर बसे हैं.
गंभीर रूप से बीमार मरीजों के इलाज में होती है मुश्किल
ग्रामीणों की सुनें: दियारा-फरकिया के रहने वाले लक्ष्मण महतो, रामप्रवेश महतो, सागर महतो, दुलारचंद्र पासवान, संजय शर्मा, सुलतान सिंह, नरेश कुमार, लक्ष्मी यादव आदि बताते हैं कि ना जाने इन सुविधाओं के लिए और कितने वर्षों तक फरकिया के लोगों को इंतजार करना पड़ेगा.
गंभीर रूप से किसी के बीमार होने पर और भी परेशानी होती है. ग्रामीणों के अनुसार, मरीज के परिजन खाट के सहारे मुख्यालय तक पहुंचते है. जिस कारण कइयों का रास्ते में जीवन लीला समाप्त हो जाती है. इतना ही नहीं फरकिया में आवागमन की समस्या को देखते हुए जल्दी कोई रिश्ता तक जोड़ना नहीं चाहते. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार नेताओं ने आश्वासन दिया, लेकिन स्थिति जस की तस है.
फरकिया की डगर कठिन
सलखुआ प्रखंड अंतर्गत अलानी, कबीरा, चानन पंचायत की स्थिति आज भी ऐसी बनी हुई है, जो कोसी के जलस्तर में वृद्धि के साथ ही चिंताजनक हो गयी है. ग्रामीणों को इन दिनों तपती रेत के रास्ते मुख्य कोसी नदी में जान जोखिम में डाल कर नाव की सवारी करने के बाद चार पांच किलोमीटर की दूरी तक रेत होकर गुजरना पड़ता है. ग्रामीणों को कोसी नदी में नाव और नदी के बाद रेत अौर पगडंडी के सहारे घर तक पहुंचना पड़ता है.
इतना ही नहीं बालू के रेत व तपती धूप से राहत पाने के लिए दूसरे के खेत की मेड़ से आना जाना पड़ता है. वहीं फरकिया में यातायात की गंभीर समस्या है. इस पर न तो अधिकारी और न ही किसी जनप्रतिनिधि ही ध्यान दे रहे हैं. आजादी के इतने सालों बाद भी मुख्य कोसी नदी में पुल का निर्माण संभव नहीं हो सका है और न ही दियारा-फरकिया में गांव-गांव को जोड़ने के लिए पक्की सड़क का निर्माण हो सका है.
कबिरा व चिड़ैया से कबीरा के कई पंचायत के गांव अभी तक पक्की सड़क से नहीं जुड़ सके हैं. कच्ची सड़क व पगडंडी मार्ग ही ग्रामीणों के एकमात्र आवागमन का मुख्य साधन है. बारिश व बाढ़ के समय उक्त मार्ग पर चारपहिया वाहन चलने की बात दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. तटबंध पर बरसात के दौरान रेन कट घातक हो जाता है. जबकि कोसी नदी के बाद 2-3 फीट तक रेत है. तपती धूप में इस पर चलना काफी मुश्किल हो रहा है.
ऐसे में लोग मकई खेत के बीचोंबीच पगडंडी के रास्ते 3 से 6 किलोमीटर दूर स्थित चिड़ैया, कामाथान, कबीरा समेत दर्जनों गांव से आवागमन करते हैं. जबकि बरसात के दिनों में एक तो उक्त रेत व पगडंडी पर जलजमाव से कीचड़ उत्पन्न हो जाता है. जिससे ग्रामीणों को कोसी नदी व बांध तक पहुंचने के लिए भी नाकों तले चना चबाना पड़ता है. ऐसे में बरसात के चार महीने तक लगभग आवागमन मुश्किल हो जाता है. इस गंभीर स्थिति में बीमार मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में परिजनों को काफी परेशानी होती है.
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