63 हजार हेक्टेयर में धान की खेती का किया जायेगा आच्छादन

Published at :17 May 2016 5:51 AM (IST)
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63 हजार हेक्टेयर में धान की खेती का किया जायेगा आच्छादन

खरीफ फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को किया जायेगा प्रोत्साहित प्रमंडल स्तरीय कार्यशाला में श्रीविधि से धान के पैदावार पर दिया जोर सहरसा सदर : इस वर्ष राज्य में माॅनसून की अच्छी खबर व वर्षा होने की अच्छी संभावना को देखते हुए सरकार ने खरीफ फसल की अधिक से अधिक पैदावार को बढ़ाने […]

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खरीफ फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को किया जायेगा प्रोत्साहित

प्रमंडल स्तरीय कार्यशाला में श्रीविधि से धान के पैदावार पर दिया जोर
सहरसा सदर : इस वर्ष राज्य में माॅनसून की अच्छी खबर व वर्षा होने की अच्छी संभावना को देखते हुए सरकार ने खरीफ फसल की अधिक से अधिक पैदावार को बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा किसानों को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है. सोमवार को स्थानीय प्रमंडलीय सभागार में आत्मा परियोजना व कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्रमंडल स्तरीय खरीफ कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उद्घाटन संयुक्त कृषि निदेशक शंकर कुमार चौधरी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया. इस मौके पर संयुक्त कृषि निदेशक ने पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से खरीफ फसल की ज्यादा पैदावार व वैज्ञानिक पद्धति से की जाने वाली खेती के फायदे को लेकर कृषि विशेषज्ञ से जुड़े लोगों ने कई जानकारी दी.
मौसम के अनुकूल रहने की संभावना: श्रीविधि तकनीक से की जाने वाले खेती की उपलब्धि व तकनीक से बढ़ते पैदावार को देखते हुए इस वर्ष मौसम को अनुकूल रहने की संभावना की तहत श्रीविधि से धान की खेती पर अधिक जोर दिया गया है. कार्यशाला को संबोधित करते निदेशक ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा किसान श्रीविधि की तकनीक को अपनाएं.
इसके लिए किसान सलाहकार गांव-गांव में जाकर छोटे से लेकर बड़े स्तर के किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से की जाने वाली श्रीविधि के खेती के बारे में बता और उन्हें जागरूक करने का काम करें. ताकि कम लागत में किसान अपनी खेतों में अधिक पैदावार कर ज्यादा मुनाफा कमा सके. उन्होंने कहा कि इस वर्ष 63 हजार हेक्टयर में धान की खेती के आच्छादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसमें से पांच हजार हेक्टयर में श्रीविधि से धान की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जायेगा.
धान की खेती में अपनायें वैज्ञानिक तकनीक : जिला कृषि पदाधिकारी नवीन कुमार ने धान के ज्यादा से ज्यादा पैदावार को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तकनीक पर एसआरआई विधि की जानकारी देते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि बिहार में जबसे कृषि रोडमैप जारी किया गया है. तब से नयी तकनीक को अपना कर किसान अनाज उत्पादन में अपने राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में अब तक सफल रहे हैं. उन्होंने कहा कि फसल उत्पादन में बिहार अब आत्म निर्भर हो चुका है. जरूरत है पंजाब व हरियाणा की तरह फसल उत्पादन में हम अपने आत्म निर्भरता को और आगे ले जायें. ताकि अन्य राज्य भी पंजाब की तरह बिहार पर आश्रित हो सके.
सहकारी समितियों से उठायें लाभ: कर्मशाला को संबोधित करते मंडन भारती कृषि महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ उमेश सिंह ने कृषि के क्षेत्र में राज्य के किसानों के बढ़ते कदम व कृषि के विकास को लेकर कई बातें रखी. फसल उत्पादन की क्षमता को और बढ़ाने के लिए उन्होंने कई सुझाव भी दिये. खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने को लेकर राज्य व केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही कई योजनाओं की जानकारी दी गयी. संयुक्त निबंधक सहकारी समितियां द्वारा कोसी प्रमंडल क्षेत्र में प्रधानमंत्री कृषि योजना जो हाल ही में बिहार में लागू हुई है. उसके फायदे को लेकर जानकारी उपलब्ध करायी गयी है. साथ ही सहकारिता विभाग से संबंधित कृषि के क्षेत्र में दी जा रही योजना से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध करायी गयी. इस मौके पर कृषि वैज्ञानिक संतोष कुमार, डॉ रणजीत कुमार ने भी खेती में उपर्युक्त कृषि यांत्रिकरण के उपयोग व उससे फायदे को लेकर जानकारी दी. कार्यशाला को डॉ आशुतोष कुमार, कृषि परामर्शी डॉ मनोज सिंह, निदेशक पौधा संरक्षण सहरसा, सुपौल आत्मा के परियोजना उपनिदेशक राजेश कुमार सहित कई अन्य विशेषज्ञों ने भी संबोधित किया. कार्यशाला को सफल बनाने में आत्मा के पंकज कुमार सिंह सहित अन्य का सराहनीय योगदान रहा.
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