टूरस्टि कॉम्प्लेक्स को भी रहता है लग्न का इंतजार

Published at :07 Apr 2016 6:46 PM (IST)
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टूरस्टि कॉम्प्लेक्स को भी रहता है लग्न का इंतजार

टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स को भी रहता है लग्न का इंतजार साल 2002 में तीन करोड़ रुपये की लागत से हुआ था थ्री स्टार होटल का निर्माण झील के मृतप्राय हो जाने से नहीं आते पर्यटक, सरकारी कार्यक्रमों पर ही बढ़ती है भीड़प्रतिनिधि4सहरसा मुख्यालय’हेव ए डेट विथ ग्लोरियस डेस्टीनेशन’ का स्लोगन देकर पर्यटकों को लुभाने और बुलाने […]

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टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स को भी रहता है लग्न का इंतजार साल 2002 में तीन करोड़ रुपये की लागत से हुआ था थ्री स्टार होटल का निर्माण झील के मृतप्राय हो जाने से नहीं आते पर्यटक, सरकारी कार्यक्रमों पर ही बढ़ती है भीड़प्रतिनिधि4सहरसा मुख्यालय’हेव ए डेट विथ ग्लोरियस डेस्टीनेशन’ का स्लोगन देकर पर्यटकों को लुभाने और बुलाने वाले टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स ‘होटल कोसी विहार’ को भी लग्न का ही इंतजार रहता है. शादी-ब्याह के अलावी यहां सरकारी कार्यक्रमों के दौरान सरकारी अधिकारी ही ठहरते हैं. सामान्य रूप से ठहराव के लिए लोग यहां नहीं आते हैं और न ही रेस्टूरेंट में ही स्थानीय लोगों का आना होता है. टूरिस्ट होटल का यह हाल सिर्फ और सिर्फ मत्स्यगंधा जलाशय के मृतप्राय हो गया है. बावजूद इसके सरकार विमुख बनी हुई है. झील की लोकप्रियता से बना होटल शहरी क्षेत्र के उत्तरी छोर पर 1997 में बने मत्स्यगंधा जलाशय की रौनक लगातार बढ़ती चली गयी थी. झील में डाले गये रंग-बिरंगे पैदल बोट, पतवार बोट व मोटर बोट की सैर करने वालों की संख्या भी बढ़ती गयी. झील के सौंदर्य व विदेशी पंछियों को देखने दूर-दराज से लोग आने लगे थे. संपूर्ण बिहार से यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में भी लगातार इजाफा होता रहा. झील की बढ़ती लोकप्रियता व लगातार बढ़ती भीड़ को देखते तत्कालीन डीएम टीएन लाल दास की पहल पर सरकार ने यहां थ्री स्टार होटल निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति दी थी. बिहार सरकार के पर्यटन विभाग की ओर से तत्कालीन विभागीय मंत्री अशोक कुमार सिंह ने 16 फरवरी 2002 को इस टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स की नींव रखी थी. ठीक दो साल के बाद निर्माण कार्य पूर्ण हुआ और 12 फरवरी 2004 को मंत्री ने ही इस होटल का उद्घाटन किया था. सरकारी अधिकारी ही ठहरते हैं यहांटूरिस्ट कॉम्प्लेक्स में कुल 14 कमरे हैं. जिनमें दो एसी सूइट, डीलक्स, डबल बेड रूम, डोरमेट्री व कांफ्रेंस हॉल शामिल हैं. सर्विस के लिए मैनेजर सहित आठ कर्मचारी नियुक्त हैं. कांप्लेक्स के प्रबंधक पंकज कुमार बताते हैं कि शहर से दूर होने व मत्स्यगंधा झील के मृत होने के कारण पर्यटकों की इस होटल के प्रति कोई दिलचस्पी नहीं बनती है. पंकज बताते हैं कि टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स पूरी तरह लगन पर ही निर्भर है. आय बढ़ाने के लिए यहां शादी-ब्याह की पूरी व्यवस्था रखी गयी है. इसके अलावा सरकारी कार्यक्रमों के दौरान यहां अधिकारियों का ठहराव होता है. प्रबंधक बताते हैं कि सरकार को सलाना दस लाख 44 हजार रुपये देने होते हैं. इसके अलावे होटल के लीज, स्टाफ, बिजली, डीजल व अन्य मेंटेनेंस पर सवा दो लाख रुपये का मासिक खर्च होता है. सारे खर्च के लिए लगन या सरकारी कार्यक्रमों पर ही निर्भर रहना पड़ता है. संवरे झील, तो लौटेगी होटल की रौनकपंकज बताते हैं कि रक्तकाली चौंसठ योगिनी धाम आने वाले लोगों की संख्या रोजाना हजारों में होती है. लेकिन उनमें से एक फीसदी लोगों का आगमन भी होटल या रेस्टूरेंट की ओर नहीं होता है. यदि मत्स्यगंधा जलाशय (झील) की रौनक पूर्व की तरह लौटा दी जाए. झील में पर्याप्त पानी व वोटकंग की व्यवस्था हो. बिजली की रोशनी से चारों ओर जगमग हो जाए. सुरक्षा के प्रबंध हो जाएं तो टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स की चहलकदमी एक बार फिर स्वत: लौट जायेगी. फोटो-होटल 6- पर्यटकों की राह तकता होटल कोसी विहार

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